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IGNTU विश्वविद्यालय अमरकंटक को भारत सरकार से मिला 395 लाख रूपए का बजट… ( मनीष अग्रवाल की रिपोर्ट)

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किसानों को अत्याधुनिक उन्नत तकनीकि की जानकारी देने बनेगा क्लाउड ऐप तथा मृदा परीक्षण किट…

अनूपपुर। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रोदयोगिकी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा स्वीकृत परियोजना के क्रियान्वयन की रूप रेखा पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में प्रो. श्रीप्रकाशमणि त्रिपाठी ने बताया कि विश्वविद्यालय का दायित्व छात्रों के लिए बेहतर अध्ययन और अध्यापन, शैक्षणिक क्रियाकलापों के साथ-साथ समाज एवं देश के लिए आवश्यक अनुसंधान एवं महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को क्रियान्वित करना होता है जिसका परिणाम राष्ट्र निर्माण एवं राष्ट्र कल्याण से हो। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रोजेक्ट के लिए 395 लाख रूपए का बजट एवं 31 पदों के साथ अनुमोदित इस प्रोजेक्ट में उभरती प्रौद्योगिकी-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और क्लाउड नेटिव कम्प्यूटिंग आधारित किसान-एप को भारत के कृषकों के लिए लाॅच किया जाएगा। यह किसान-एप कृषकों को गुणवत्ता वाले बीज की किस्मों का चयन, बीज प्रबंधन, उर्वरक प्रबंधन, खरपतवार प्रबंधन, कीटप्रबंधन, रोगप्रबंधन, सिंचाई प्रबंधन और कितना कीटनाशक डालना है इसे तय करने में मदद करेगा। किसानों को मौसम की जानकारी, कृषि आधारित तकनीक के विषय में जानकारी देकर किसानों की आमदनी को कई गुना बढ़ाने में सहायक होगा। इसके द्वारा किसान किसी रिसर्च सेंटर जाने के बजाए अपने मोबाइल में देखकर समझ पाएगा कि कैसे किसी फसल की अच्छी पैदावार ली जा सकती है। इसकी मदद से किसान खेती का वैज्ञानिक मॉडल समझ पाएगा। परम्परागत फसल की अच्छी पैदावार ली जा सकती है, कृषि आधारित तकनीकी उपकरणों के अभाव ने पंरापरागत फसल की खेती कम होने से औषधीय गुणों से भरपूरभारत की प्राचीन अनाज जैसे-जई (घोड़ जई), जौ (बारली), क्विनोआ, रागी (मरुआ), बाजरा, टेफ, इंकॉर्न, एम्मर, बकलादाल, सावा, टवनी, कोदो, अमरनाथ, अलसी अब लुप्त होने की कगार पर है इन पर शोध करके आवश्यक उपकरण के स्टार्टअप शुरू करने का प्रबंध किया जायेगा।
प्रो. श्री प्रकाशमणि त्रिपाठी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में “एसना मृदा परीक्षण किट का अनुसंधान एवं निर्माण किया जाएगा, प्रधानमंत्री मृदा परीक्षण योजना में मिट्टी के पोषक तत्वों नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, कैल्शियम, मैग्निशियम एवं सल्फर, पीएच, ओसी (कार्बन), बोरान, जिंक, आयरन, मैग्नीज, कॉपर की जांच हेतु मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना भारत सरकार द्वारा लाई गई है। इस परियोजना के तहत सरकार की किसानों के लिए एक सोइल कार्ड जारी करने की योजना है, जिससे किसान को मिट्टी की गुणवत्ता का अध्ययन करके अच्छी फसल प्राप्त करने में सहायता मिल सके। यह एसना मृदा परीक्षण किट मिट्टी के गुण के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी डिजिटल सिग्नल के माध्यम से प्रदान करेगा।

प्रोजेक्ट का दूसरा भाग उद्यमिता निर्माण को लेकर है जिसमें मध्यप्रदेश सहित पांच राज्यों महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, झारखंड, बिहार एवं छत्तीसगढ़ में आत्मनिर्भर-भारत केंद्र की स्थापना करके उद्यम शुरू करने का प्रशिक्षण की शुरूवात की जाएगी तथा इच्छुक युवाओं को उद्यमी/ उद्योगपति बनाया जाएगा। उद्यमिता निर्माण में मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक स्टार्ट अप, हेल्थ केयर प्रोडक्ट्स स्टार्टअप, एग्रोमशीन रीस्टार्टअप, हर्बलप्लांट एंड प्रोडक्ट्स स्टार्टअप, ग्लास एंड पिं्रटिंग मटेरियल स्टार्टअप, हस्तशिल्प एवं हथकरघा स्टार्टअप, हार्ड वेयर प्रोडक्ट् सस्टार्ट अप, बम्बू वर्क स्टार्टअप, प्लास्टिक एवं रबर प्रोडक्ट स्टार्टअप, एग्री कल्चर स्टार्टअप, हॉर्टिकल्चर स्टार्टअप, मसाला (स्पाइसेस) उद्योग स्टार्टअप, आयल प्रोडक्शन स्टार्ट अप, आईटी प्रोडक्ट्स स्टार्टअप, सोलर एनर्जी स्टार्टअप, स्टेशनरी प्रोडक्ट स्टार्टअप, डिं्रक्स एंड बेव रेज प्रोडक्ट स्टार्टअप सहित अलग-अलग 2500 स्टार्टअप के लिए मध्यम, लघु और सूक्ष्म उद्यम इकाइयां और स्टार्ट अप श्रेणी के उद्यमों का डीपीआर तथा ईपीसी तैयार किया जाएगा। मुद्रा लोन योजना, एमएसएमई बिजनेस लोन और स्टैंड अप इंडिया लोन योजना प्रमुख सरकारी लोन योजना हैं, इसके अंतर्गत युवाओं को एक नया कारोबार शुरु करने के लिए अपने डीपीआर के अनुसार 10 लाख से लेकर 1 करोड़, 1 करोड़ से 10 करोड़ और 20 करोड़ तक का बिजनेस ऋण ले सकते है।

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कुलपति ने बताया कि कोरोना वायरस (कोविड़-19) महामारी के संक्रमण से लोगों के जीवन को बचाने के लिए लगाए गये बेहद आवश्यक सम्पूर्ण लॉडाउन ने विश्व के अधिकांशदेशों की वित्तीय स्थिति खराब कर दी है। आज हमारे देश की अर्थव्यवस्था भी उसके प्रभाव से अछूती नहीं है। आज हमारे देश की अर्थव्यवस्था को भी मुश्किल हालात के दौर से गुजरना पड़ रहा है, संकट के इस दौर मे लोकल अर्थात स्थानीय स्तर पर निर्मित उत्पादों ने ही हमें आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया है, आत्मनिर्भर बनने का मंत्र लोकल पर वोकल का मंत्र सभी वर्गों के लोगों के बहुत ज्यादा हित में है। स्वदेशी वस्तु अपनाने से भारत की अपनी कंपनियों को बहुत अधिक लाभ होगा।
बैठक में प्रमुख रूप से प्रो. ए.के. शुक्ला, प्रो.हरीनारायण मूर्ति, प्रो. संध्यागिहर, प्रो.बी.एन.त्रिपाठी, प्रो. खेम सिंह डहेरिया, प्रो. रविंद्र मनुकोंडा, डॉ. एस. डी. त्रिपाठी, डॉ. विकास सिंह, डाॅ. राधवेंद्र मिश्रा, डॉ. संजीव सिंह, तथा कुल सचिव उपस्थित रहे।

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