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MP के सरकारी स्कूलों में कोरोना की ‘एंट्री’, जानिए क्या है स्कूल शिक्षा विभाग की इससे निपटने की प्लानिंग

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स्कूल शिक्षा विभाग (education department) कोरोना महामारी (corona) पर भी एक पाठ पाठ्यक्रम में शामिल करने का सोच रहा है.अगर सहमति बनी तो अगले साल से ये सिलेबस का हिस्सा होगा…

भोपाल.मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सरकारी स्कूलों (government schools) में भी अब कोरोना (corona) की एंट्री होने वाली है. स्कूल शिक्षा विभाग अपनी किताबों में इसे शामिल कर रहा है. वो किताबों में कोरोना से बचाव का संदेश छपवा रहा है. इस संदेश के ज़रिए लाखों छात्र छात्राओं (students) को कोरोना वायरस से बचाव के लिए जागरुक किया जाएगा. अगले साल से एक पाठ भी सिलेबस में शामिल किया जा सकता है.

9वीं और 11वीं की अंग्रेजी की किताबों में संदेश
एमपी के स्कूली छात्र-छात्राओं को कोरोना से बचाने के लिए उन्हें जागरुक किया जा रहा है. इसकी शुरुआत जागरुकता संदेश से हो रही है जो पाठ्यक्रम की किताबों में छपवाया जाएगा. शुरुआत 9वीं और 11 वीं की किताबों से हो रही है. अंग्रेजी भाषा की किताब में छात्र-छात्राओं के लिए जागरूकता संदेश प्रकाशित हो रहा है.ताकि छात्र छात्राएं कोरोना से बचने के उपाय जान सकें.

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अंग्रेजी ही क्यों

स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है फिलहाल अंग्रेजी की किताबों में ही ये संदेश छप पाएगा.ये किताबं एनसीईआरटी से ली जा रही हैं. एनसीईआरटी से दोनों विषयों की सीडी देर से मिली.इसलिए ये किताबें अभी छप नहीं पायी थीं. इसलिए इसमें कोरोना जागरुकता संदेश छापने की गुंजाइश थी. बाकी किताबें पहले ही छापी जा चुकी हैं इसलिए उनमें संदेश शामिल करना संभव नहीं था

स्कूल की दीवारों पर लिखा जाएगा संदेश

स्कूल खुलने के बाद छात्र-छात्राओं को मास्क पहनकर आना होगा. साथ ही दूसरे उपाय भी किए जाएंगे. स्कूल की दीवारों पर कोरोना से बचाव के संदेश लिखवाए जाएंगे. हर क्लास में शिक्षक पीरियड लेने से पहले छात्रों को कोरोना वायरस से बचने के बारे में बताएंगे.

अगले साल से सभी किताबों में संदेश

स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है क्योंकि इस बार 9वीं और 11वीं की अंग्रेजी(भाषा)को छोड़कर सभी कक्षाओं की किताबें छपकर तैयार हो गई हैं, इसलिए इस साल पाठ्यक्रम में कोरोना वायरस से बाचव के संदेश को शामिल नहीं किया जा सका. अगले शिक्षण सत्र से कोरोना वायरस से संबंधित सुरक्षा के उपाय को पाठ्य पुस्तकों में शामिल किया जाएगा.पहली से लेकर 12वीं कक्षा तक के सभी विषयों की किताबों में दो पेज का(पहले और आखिरी पेज में ) जागरूकता संदेश जोड़ा जाएगा.

पाठ्यक्रम में शामिल करने पर विचार
अभी तक स्कूलों में छात्र-छात्राओं के पाठ्यक्रमों में जीव विज्ञान में एड्स मलेरिया,स्माल पॉक्स,स्वाइन फ्लू हेपेटाइटिस-बी, हैजा और अन्य रोगों के बारे में पढ़ाया जाता है. लेकिन अब स्कूल शिक्षा विभाग कोरोना महामारी पर भी एक पाठ पाठ्यक्रम में शामिल करने का सोच रहा है.अगर सहमति बनी तो अगले साल से ये सिलेबस का हिस्सा होगा.

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