# मुख्यमंत्री सीएम शिवराज सिंह का हुआ आगमन ##

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शोसल मीडिया में पुकार तीन बेटीयो का होना है बेकार पुष्पराजगढ़ से आशुतोष सिंह की रिपोर्ट

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शोसल मीडिया मे पुकार तीन बेटीयों का होना है बेकार

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पुष्पराजगढ़ से अशुतोष सिंह कि रिपोर्ट:–

पुष्पराजगढ़ के आॅचलिक वाटॅसएप शोसल मीडिया ग्रुपों में एक वीडियों सूर्खियां बटोर रहा है,जिसमे एक महिला यह कहते हुए दिख रही है कि मुझे मेरे पति ने मार पीट कर घर से सिर्फ इसलिए बेदखल कर दिया कि मेरी तीनों संतान बेटी है,यह महिला ग्राम करौंदा टोला थाना क्षेत्र अमरकंटक की रहने वाली है जिसके पति मोहित बनावल पढ़े लिखे होने के साथ कानून के जानकार भी हैं पेसे से एक वकील हैं,उनके द्वारा यदि ऐसे किया गया है,तो ऐसी घटना समाज के लिए कतई सही नही कहि जा सकती साथ ही पढ़े लिखे समझदार नागरिक का इस तरह संकुचित विचार धारा का रखना घातक है।

सरकार के दावे खोखले :—

सरकार चाहे लाख दावा करे कि वह बेटियों को बेटे के बाराबर मानती है,बेटा बेटी एक समान हैं,पर यह वास्तविकता कि धरातल पर सही होते नही दिखते इतना ही नही मध्यप्रदेष सरकर के मुखिया मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान अपने आप को लड़कियों के मामा बताना किसी भी कार्यक्रम पर नहीं भुलते उन्हीं के राज्य मे उनके अनुसार उनकी एक गरीब बहन सिर्फ इसलिए घर से बेदखल कर दी जाती है कि उसने लगातार तीन बच्चियों को जन्म दिया है,जबकि उसके घरवालों की चाहत थी कि बच्ची की जगह बच्चा हो राज्य के मुखिया मामा को भांजा न दे कर भांजी देने वाली उनकी बहन आज दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है,किसी भी माॅ के गर्भ मे पल रहे शिशु का बेटा या बेटी होना कुदरत के हाँथ में होता है,यह इन्शान के हाँथ का काम नही है माँ के गर्भ में जो भी है उसे बेटा या बेटी बनाने मे न तो माता का हाथ होता और ना ही पिता का पर हमारा समाज आज तक इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रहा है संकुचित,कुंठित,अशिक्षा, परिवारवाद,वंसवाद,जैसे अनगिनत मुद्दौ पर हमेसा महिला पर ही अत्याचार होता आया है।
आखिर ऐसा क्यों?
सरकार चाहे लाख दावे करे पर आज भी पुरूस प्रधान यह समाज महिलाओ को दोयम दर्जे पर ही रखता है कहने को तो कई सरकारी योजनाएॅ महिलओं पर अधारित है जैसे कि बच्चियों के लिए चलाई जा रही मुख्यमंत्री कि महत्वा कांछी योजना लाडली लक्ष्मी,उज्जवला योजना,सौभाग्य योजना,सामूहिक विवाह योजना,स्कूलों में साइकल वितरण आदि अनेकों प्रकार से बेटियों को बढ़ावा देने का कार्य विभिन्न योजना के माध्यम से चल रहे है पर आज जो घटना प्रकास में आई है और अक्शर अखबारों न्यूज चैनलों में छाए रहने वाली महिलाओं के शोषण पर आधारित दिखाई पड़ती है,हम आए दिन रेप जैसे जघन्न अपराध कि खबरें पढते सुनते रहते है यह सरकार के लाख दावे को गलत साबित करती घटनाएँ हैं,यह कुंठित समाज के साथ सरकार की लचारी और बेबसी का परिचायक है।

आखिर क्या है पूरा मामला :–

प्रतिमा बनावल पति मोहित प्रसाद बनावल ग्राम करौदा टोला कि रहने वाली एक ग्रामीण महिला है,प्रतिमा बनावल और मोहित बनावल एक ही गांव के रहने वाले हैं अतः दोनो का ही ससुराल वा मायका एक ही गांव में है यह गांव करौंदा टोला के रूप में जाना जाता है प्रतिमा बनावल कुछ अर्शे से अपने मायके में अपने पिता धीरज के घर मे रह रही थी मोहित बनावल अपनेे पैतृक घर पर ही रह रहा था प्रतिमा बनावल का अरोप है कि उसकी तीसरी संतान बेटी के रूप में होने से उसे उसके ससुराल से उसका पति मोहित बनावल यह कह कर घर से निकाल देता है कि मुझे लडका चाहिए था लेकिन पिछली दो सन्तानो(लड़की) कि
तरह तुमने इस बार भी लडकी को ही जन्म दिया अब लडकी पैदा होने पर मेरा क्या दोश है ? ऐसी स्थितिमें मै तीन बेटियों को लेकर कंहा जाऊं ? किसके पास रहूं ? कैसे इनका लालन पालन करूँ ? इनकी शिक्षा दिक्षा कैसे करूॅ ?
वहीं दूसरी ओर मोहित बनावल थाने जा कर सिकायत दर्ज कराता है कि मेरी पत्नी प्रतिमा मायके में रह रही थी,में जब दिनांक 7/7/2018 को साम 5 बजे अपनी पत्नी प्रतिमा को लेने गया था तब वँहा ससुर धीरज के साथ विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई मेरे ससुर धीरज ने मेरी पत्नि प्रतिमा को लाठी लेकर आने को बुलाया और मुझे गाली गलौज करता रहा तब प्रतिमा अपने पिता धीरज के कहने पर हल्दी कूटने वाली लोहे की मूसर लेकर बाहर आई और मेरा ससुर धीरज उस लोहे के मूसर को प्रतिमा से छुडाकर मेरे सिर पर मारा जिससे मुझे गम्भीर चोंटे आई हैं मेरे सर से काफी खून बहा और मै खून से लथपथ हो गया था जिसके दो चश्मदीद गवाह भी हैं इस बटना की जानकारी थाना अमरकंटक को उचित कार्यवाही हेतु मेने दी है।

समाज का पिछडापन या अशिक्षा:–

सच चाहे जो भी हो वह थाना अमरकंटक प्रभारी अपने स्टाॅप के साथ तलासने कि कोसिस कर रहे है पर वायरल विडियो समाज मे एक बार फिर महिलाओं पर हो रहे घरेलू हिंसा अत्याचार आदि कि बहस के बजार को गर्म कर दिया है हम ये नही कहते कौन सही है या कौन गलत इसका
फैसला तो भारतीय संविधान के अनुरूप कानून करेगा किन्तु जब एक परिवार का अन्तरिेक मामला इस तरीके से सोसल मीडिया या अन्य किसी माध्यम से घर की चार दिवारी से बाहर आता है तब ’’जितने मुह उतनी बाते’’ वाली बात चरितार्थ होती है,ऐसे मामले समाज को दूषित करता है हमारा समाज 21 वी सदी में आकर भी गुलामी के दिनों के मानसिकता को यदा कदा दर्शा ही देता है यदि यह मामला प्रकास मे नही आया होता तो अनगिनत मामलों कि तरह कंही दब कर रह जाता घरेलु हिंसा के अनगिनत मामले समझाईस दे कर सुलझाए जा सकते है,किन्तु समझाईस दे कौन ? जब तक जनजागरण के माध्यम से समाज को नही सुधरा जाएगा तब तक ऐसे अनगिनत प्रतिमा कुंठा की शिकार होती रहेंगी और ऐसे कई मोहित का परिवार टूटता रहेगा इस कुंठा और संकुचित मानसिकता शिक्षा और पिछडे पन कि उपज है एक स्वक्ष समाज के निर्माण मेें उच्च गुणवत्ता युक्त शिक्षा की हमेशा जरूरत रहती है।

इनका कहना है:–

यह मामला थाना अमरकंटक में आया है इसे हम आई.पी.सी.की धारा 323,294,506,498 के तहत दर्ज कर घरेलू झगडे की तरह देख रहे थे आप के माध्यम से तीन बच्चियों कि वजह से घर से निकालने की बात सामने
आई है अब हम इसकी तहकीकात कर सच्चाई तक पहुंचेंगे।

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