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वैश्विक चुनौतियों के बीच मोदी का आत्मनिर्भर भारत # जान – जहान के साथ # तालमेल बनाना भारत की जरुरत. # मोदी सरकार 2.0 एक साल – कई मिसाल (मनोज कुमार द्विवेदी, अनूपपुर, मप्र)

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अनूपपुर।  30 मई 2019 को प्रचण्ड बहुमत के साथ दूसरी बार प्रधानमंत्री के पद पर आसीन नरेन्द्र दामोदर दास मोदी एक वर्ष से तमाम वैश्विक- घरेलू चुनौतियों के बीच अटल साबित हुए हैं। पिछले बारह माह के पहले चार महीने मोदी सरकार ने ताबडतोड निर्णय लेते हुए देश को वैश्विक परिदृश्य में स्थापित करने के लिये तथा देश को मजबूत बनाने की दिशा में कई कार्य किये। विपक्ष को लगभग चौंकाते हुए मोदी सरकार ने एक झटके से जम्मू – कश्मीर की समस्या के जड पर करारा वार किया। जम्मू – कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटा कर जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख दो नये केन्द्र शासित प्रदेश बना कर उसे विकास की मुख्य धारा से जोड दिया। 31 अक्टूबर को इसे एक साल पूरा हो जाएगा। लेकिन अब वहाँ छुटपुट घटनाओं को छोड़ दें, तो देश का यह सबसे अशांत क्षेत्र अब अन्य प्रांतों की तरह पूरी तरह शान्त तथा विकास के मार्ग पर अग्रसर है। अनुच्छेद 370 हटाना मोदी सरकार की सबसे महत्वपूर्ण घोषणा को पूरा करता है। भाजपा ने अपनी स्थापना के समय से अनुच्छेद 370 को हटाने, राम जन्मभूमि मन्दिर निर्माण तथा समान नागरिक संहिता लागू करने के मुद्दे को चुनावी घोषणापत्र मे प्रमुखता से रखा। 370 के हटने से भले ही पाकिस्तान में हाय तौबा मची हो या कांग्रेस सहित विपक्ष का एक खेमा सदमें मे हो, देश का सबसे बडा आम नागरिकों का तबका बहुत खुश है। जम्मू कश्मीर, लद्दाख में इस अनुच्छेद के हटने का सकारात्मक परिवर्तन दिख रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद श्री रामजन्मभूमि मन्दिर निर्माण का कार्य ट्रस्ट बनाने, जमीन समतलीकरण के साथ प्रारंभ हो चुका है। सनातन हिन्दुओं के आराध्य भगवान श्री राम का मन्दिर निर्माण का शुभारंभ उनके जन्म स्थान अयोध्या जी मे हो चुका है। इसने हिन्दू मुसलमानों के बीच दशकों से चल रहे विवाद का पटाक्षेप कर दिया है। यह मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की बडी उपलब्धि मानी जा रही है।
नागरिकता संशोधन अधिनियम –2019 को देश में लागू करके मोदी सरकार ने अफगानिस्तान, बांग्लादेश, पाकिस्तान के धार्मिक प्रताडना के शिकार हिन्दु, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी, इसाईयों को भारत की नागरिकता प्रदान करने का मार्ग प्रशस्त कर दिया। यद्यपि कांग्रेस, वाम ,आप सहित तमाम दलों ने इस पर जमकर शाहीन बाग जैसे बवाल काटे। महीनों आम जनता को टार्चर करके , रास्तों को बन्द करके आन्दोलन, धरना प्रदर्शन किये। एक वर्ग विशेष की संतुष्टि के आरोपों के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की भारत यात्रा के बीच दिल्ली मे खॊफनाक दंगे हुए। जिसे समय रहते कुचलते हुए दंगों को रोक दिया गया। यद्यपि दंगों मे दिल्ली पुलिस की भूमिका पर सवाल उठे तो रोहिंग्या मुसलमानों के दंगों में शामिल होने के आरोप लगाए गये। लेकिन जिस कडाई से दंगाईयों से निपटा गया, वह केन्द्र सरकार को राहत देने वाली बात मानी गयी।
मुस्लिम महिला विवाह संरक्षण अधिनियम — 2019 के द्वारा नरेन्द्र मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक जैसी कुरीति से मुक्ति दिलाकर उन्हें बडी सुरक्षा प्रदान की है। सर्वोच्च न्यायालय मे भारत सरकार के रुख के बाद महिलाओं के हित में तीन तलाक को दण्डनीय एवं अवैध बना दिया गया है।
देश के पंजाबी श्रद्धालुओं के लिये पाकिस्तान स्थित करतारपुर साहिब गलियारा खोल दिया गया।
ब्रू रियांग समझौता सफलता पूर्वक लागू करके लगभग 34 हजार लोगों को त्रिपुरा मे बसाने का रास्ता खोल कर 23 वर्ष पुरानी समस्या का हल निकाला। इसी प्रकार से एतिहासिक बोडो समझौता लागू कर इस समाज को मुख्यधारा मे लाने का कार्य किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने दूरदर्शी निर्णय लेते हुए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना -2020 के तहत 1.70 लाख करोड रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की।
कोरोना आक्रमण के कारण गिरती अर्थव्यवस्था को संभालने तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए कृषि, मत्स्यपालन,खाद्य प्रसंस्करण के लिये कृषि अधोसंरचना को मजबूत करने के लिये महत्वपूर्ण कदम उठाए गये । लाकडाऊन के समय 80 करोड गरीबों को पांच माह तक पांच किलो मुफ्त राशन , उज्ज्वला योजना के हितग्राहियों को तीन महीने तक मुफ्त गैस सिलेण्डर प्रदान किया गया। 20 करोड महिला जनधन खाताधारकों को तीन माह तक 500 तथा 3 करोड गरीब वरिष्ठ, विधवा, दिव्यांग को तीन माह तक 1000 रुपये प्रदान किये। प्रधानमंत्री किसान सम्माननिधि से 16.5 करोड किसानों के लाभान्वित होने की संभावना है।
चीनी कोरोना वायरस एक वैश्विक आपदा है। इस वायरस हमले के कारण विश्व के अन्य देशों की तरह भारत को भी भारी जन – धन की हानि की आशंका बनी हुई है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इस आपदाकाल मे लाकडाऊन मे जाने से पहले जनता कर्फ्यू का ऐलान कर देश के मानस को लाकडाऊन के लिये तैयार कर लिया। शंख, घंटी, घडियाल, तालियों से देश भावनात्मक रुप से मजबूत तथा एकजुट हो गया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने 24 मार्च से देश व्यापी लाकडाऊन की घोषणा की । 30 देशों में फंसे लगभग 72000 प्रवासी भारतीयों को सुरक्षित भारत लाया गया। लाकडाऊन के बीच दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, जम्मू कश्मीर ,आन्ध्रप्रदेश तथा अन्य राज्यों से 28 मई तक 3840 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से लगभग 52 लाख श्रमिकों को अलग अलग राज्यों में उनके जिलों तक पहुंचाया गया।
जनवरी 2020 मे कोविड परीक्षण की केवल 1 प्रयोगशाला थी , 25 मई तक यह संख्या 610 हो गयी है। अब हम अधिक संख्या मे प्रति दिन परीक्षण कर रहे हैं। दुनिया के अन्य देशों की तुलना मे रिकव्हरी रेट सबसे अच्छा लगभग 42 प्रतिशत तथा मृत्यु दर सबसे कम 2.7 प्रतिशत है। यह मोदी सरकार की नेतृत्व
क्षमता का कमाल है कि अन्य देश जब मास्क , पीपीई किट के लिये दूसरे देशों का मुंह देख रहे थे,भारत इसके निर्माण मे आत्मनिर्भर हो गया है। यह अन्य देशों को गुणवत्ता युक्त मास्क, पीपीई तथा हाईड्राक्सी क्लोरोक्वीन आपूर्ति कर रहा है। भारत ने 120 देशों को कोरोना संक्रमण काल मे दवाएं प्रदान की है।
मोदी सरकार 2.0 की सफलता तथा तेजी से विपक्ष हताश , निराश है। यदि विपक्ष अपना दायित्व भली भांति ,स्वस्थ तरीके से पूरा करता तथा राज्य सरकारें लाकडाऊन के नियमों, निर्देशों का पालन सही तरीके से केन्द्र के मार्गदर्शन में करते तो कोरोना संक्रमण के मामलों मे इतना इजाफा नहीं होता। बहरहाल ! देश मजबूती से कोरोना तथा अन्य चुनौतियों का सामना कर रहा है।
आने वाले अगले 12 माह मोदी सरकार के लिये भारी चुनौतियों वाले होगें। बडी संख्या में सामने आते कोरोना पाजिटिव का इलाज , लोगों की जानें बचाने के साथ गिरती अर्थव्यवस्था को थामे रख कर लोगों को रोजगार के अवसर मुहैया कराना बडा काम है। जान – जहान का महत्व राज्यों तथा केन्द्र के बीच समन्वय से ही संभव है। यह राज्यों तथा केन्द्र सरकार के आपसी सहयोग पर निर्भर होगा । विपक्ष को भी मुसीबत के समय एकजुटता बनाए रखना होगा। चीन पर पडता वैश्विक दबाव, हांगकांग, ताईवान की दशा, उत्तरपूर्वी सीमाओं पर चीन से खींचतान, पाकिस्तान की धूर्तता , आतंकवाद, नेपाल सहित अन्य देशों से रिश्तों को संभाले रखना मोदी सरकार की कठिन परीक्षा है‌ । मोदी हैं तो मुमकिन है….सबका साथ- सबका विकास- सबका विश्वास नारे की परीक्षा भारत को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिशों पर टिकी हुई है ।उम्मीद है कि आल इज वेल के साथ भारत के लिये सब कुछ अच्छा ही होगा।

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