# मुख्यमंत्री सीएम शिवराज सिंह का हुआ आगमन ##

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नेता मौन…..निर्माण कार्य ठप्प, जारी है रेत की मारामारी (आशुतोष सिंह की रिपोर्ट)

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इंट्रो – निमार्ण कार्य में अतिआवश्यक रूप से रेत का प्रयोग किया जाता है शासन ने ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के विकास को लेकर निर्माण कार्य निर्वाध रूप से कराये जाने के सख्त निर्देश पहले ही जारी कर रखे है। जिले में उपयोगी रेत की आवष्यकता लाॅक डाउन के पहले से ही बनी हुई थी जो अब बड़े रूप में सामने आ रही है। जंहा बहुउपयोगी खनिज रेत के मामले में नेताओं की चुप्पी टूटने का नाम नही ले रही तो वही निर्माण कार्य ठप्प पड़े हुये है प्रशासन नियमावली के फेरे में उलझा व उलझाता हुआ दिखाई पड़ता है तो बारिश में छत का सपना संजोये ग्रामीणों की आखों में बेवसी दिखाई पड़ रही है। कोविड19 की मार से बेवस मजदूर काम की आश लगाये इन्तजार कर रहे है तो वही ट्रांसपोटर 55 दिनो के लाॅक डाउन से बाहर आने का रास्ता जोहार रहे है।

अनूपपुर – वैसे तो जिले में 20 से आधिक रेत की वैध खदाने संचालित है किन्तु 22 मार्च से हुये लाॅक डाउन, प्रशासन व ठेकेदार की उदासीनता से आज तक एक भी खदाने सुचारू रूप से शुरू नही हो सकी है जिसका सीधा नुकसान निर्माण कार्यो की पर्याप्त गति में न होने के रूप में दिखाई पड़ रहा है। विगत दिनों अपर सचिव म.प्र. खनिज साधन विभाग द्वारा जारी आदेश में स्पष्ठ किया गया है कि रेत खनिज की स्वीकृत ठेको में कोविड19 के कारण व्यसायिक गतिविधिया प्रभावित हुई है। जिसके वजह से ठेकेदारो को देय किस्त में लाॅक डाउन के 55 दिनों की राशि में छूट दी जायेगी। छूट उन्ही ठेकेदारो को दी जायेगी जिनके अनूबंध व बंधात्मक राशि 6 जून तक जमा हो चुके है। वैसे तो जिले के समस्त रेत खदाने के जी ग्रुप ने ठेके में ले रखी है पर संचालन किसी भी खदान का जारी नही किया है। वजह साफ है मामले पर शासन प्रशासन व नेता पहल करने से कतरा रहे है। यदि यही स्थ्ति आगामी 2 सप्ताह तक और बनी रही तब निमार्ण कार्य या तो 4 माह के लिये बन्द पड़ जायेंगे या अवैध रेत माफिया जरूरत से ज्यादा गठ जोड़कर सक्रिय दिखाई देंगे।

सांसद विधायक सहित नेताओं ने साधी चुप्पी

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प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना अन्तर्गत स्वीकृत आवासों के लिये जिले में लगभग 1 लाख 40 हजार घन मीटर रेत की आवश्यकता जिला पंचायत द्वारा बताई जा रही है। कोतमा, बदरा व पुष्पराजगढ़ जनपद अन्तर्गत क्रमशः 1460, 2500, 6465 प्रधानमंत्री आवास बनाने का लक्ष्य पहले ही निर्धारित किया जा चुका है इनमें से अधिकांश कार्य या तो शुरू नही हो सके है या नागन्य रूप में शुरू किये गये है साथ ही अन्य कार्य जैसे गौशाला, सीसी रोड, रपटा कम स्टाप डेम आदि मे भी रेत की आवश्यकता बनी हुई है जिले के नेताओं ने खुद को मामले से दूर कर रखा है कारण चाहे जो भी हो छत का सपना लिये ग्रामीणों की आस अब टूटती जा रही है बारिश के मौषम आने में कुछ ही दिन बचे है ऐसे में आवास का निमार्ण पूर्ण हो सकेगा यह संसय लगभग सभी हितग्राहियों को सता रहा है हमेशा विकास कार्यो की डफली पीटने वाले नेताओं को सायद निर्माण कार्यो में हो रही देरी दिखाई नही पड़ रही है तभी तो पक्ष व विपक्ष के नेता मौन साधे सब देख रहे है।

सिर्फ छः खदानो से ही रेत का परिवहन

जिले में सरकारी आकड़ो की बात की जाये तब 20 से अधिक खदाने ठेके पर दी गई है पूर्व में खनिज विभाग द्वारा सरकारी निर्माण कार्यो के लिये आवश्यक रेत आपूर्ति हेतु जनपदो को रायल्टी पर्ची प्रदान की गई थी तब 105 रूपये घन मीटर की दर से छः खादानो से रेत का परिवहन वाहन मालिको द्वारा कराये जाने की बात कही गई थी कुछ पर्चियो के माध्यम से रेत का परिवहन कराया भी गया किन्तु लगातार शिकायतों और पारदर्शिता के आभाव वाली इस व्यवस्था को जिला कलेक्टर द्वारा बन्द करना पड़ा। बात तो यह भी समझ में नही आती जब जिले में 20 से अधिक खदाने है तब सिर्फ छः खदानों से ही रेत का परिवहन कराये जाने की बात क्यू की जा रही है़….खनिज विभाग द्वारा जो खदाने रेत के परिवहन के लिये पूर्व में स्वीकृत की गई थी उनमें चचाई, जैतहरी, चोलना, बकही, बलबहरा, गोबरी जैसी खदानों से रेत परिवहन की बात की गई थी जानकारो की माने तो इन खदानो में या तो रेत की पर्याप्त उपलब्धता नही है और जहां है भी वह गुणवत्ता युक्त नही कही जा सकती जिले की अन्य खदानों में से आखिर रेत का परिवहन का न कराया जाना समझ के परे है। जबकि इन खदानो समेत अन्य खदानो का ठेकेदार भी एक है और सभी खदाने एक ही नियम शर्तो के आधीन नीलाम की गई थी जिला कलेक्टर कार्यालय के पास सोन नदी की मानपुर खदान में पर्याप्त रेत उच्चगुणवक्ता युक्त मौजूद है और वहा तक पहुच मार्ग भी अन्य खदानो से बेहतर है इस पर ध्यान जानबूझ कर नही दिया गया या अनजाने में ही ऐसा हुआ है यह अब अनसुलझी पहेली बनकर रह गया है।

वाहन मालिको पर दोहरी मार तो हो रहा राजस्व का नुकसान

देष के प्रधानमंत्री जंहा आत्मनिर्भर बनने का शंदेस दे रहे है तो वही जिले की प्रशासनिक व्यवस्था से वाहन मालिक दोहरी मार झेल रहे है स्वरोजगार की तलाश में अधिकांश यूवक किस्तो के माध्यम से मालवाहक वाहन खरीद कर ईमानदारी से अपना परिवार चला रहे है उन्हे बीते 22 मार्च से अपने वाहन खड़े करने पड़े विश्वव्यापी संकट की मार से ये स्वरोजगार धर्मी उबर ही नही पाये थे कि अब काम न मिल पाने का संकट गहराने लगा है आने वाला समय वर्षा काल का होगा जिसमें माल वाहक वाहन कम ही चल पाते है ऐसे में परिवार का भरन पोषण, वाहन की किस्त व ड्राइवर आदि का पेमेन्ट दे पाने की चिन्ता सता रही है। म.प्र. सरकार को रेत खदानो के संचालन में हो रही देरी से राजस्व का नुकसान झेलना पड़ रहा है निकटवर्ती राज्य से आ रही 600 फिट रेत पुष्पराजगढ़ में 22 से 25 हजार रूपये में बिक रही है यह रेत कुछ लोग तो खरीद पा रहे है तो कुछ नही यदि इस रेत से प्रधानमंत्री आवास बनाने की बात सोची जाये तब यह जानना जरूरी हो जाता है कि प्रधानमंत्री आवास की पहली किस्त महज 25 हजार ही होती है ऐसे में पहली किस्त से सिर्फ रेत ही खरीदी जा सकती है बाकी निर्माण का अधर में लटकना निष्चित है। म.प्र. सरकार को राजस्व का नुकसान तो उठाना ही पड़ रहा है निर्माण कार्य भी अधर में लटके है।

अवैध परिवहन पर नही लग रही लगाम

जहा एक ओर प्रसाशन नियमावली में उलझकर लगातार देरी कर रहा है तो वही अवैध रेत कारोबारी मौके का फायदा उठाते हुये मालामाल हो रहे है जैतहरी से पुष्पराजगढ़ की और आने वाली सड़क से प्रायः हर रात दर्जनो गाड़िया बेखौफ रेत लेकर आती है तो वही कोतमा, बदरा जनपद अन्तर्गत ट्रैक्टरो के माध्यम से रेत बेची जा रही है इन अवैध रेत माफियाओं ने कुछ नेताओ से गठजोड़ कर अपनी अलग व्यवस्था बना रखी है इससे शासन के राजस्व में कमी आ रही है तो वही ईमानदारी से कार्य करने वाले वाहन मालिको में कुन्ठा जागृत हो रही है जानकारो की माने तो जिले में ये कारोबारी कई जगह रेत का स्टाक कर रखे है जिसे दिन ढलते ही बेचने का कार्य किया जाता है ऐसा नही है कि इसकी जानकारी प्रसाशन को नही है किन्तु इस कारोबार से दूरी बनाये रखना या कार्यवाही न करने से रेत माफियाओ के हौसले बुलन्द हैै।

इनका कहना है

जिले में रेट उत्खनन परिवहन की अनुमति किसी को नहीं है जो भी रेत बेच रहे है वह अवैधानिक है
राहुल सांडिल
खनिज इंस्पेक्टर अनूपपुर

अवैध रेत परिवहन करने वालो के विरूद्ध ससख्त कार्यवाही किया जाये
नरेंद्र मरावी सांसद प्रतिनिधि 

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