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प्रशासन की चुप्पी, नेताओं के मौन से मिला ललन को वरदान (आशुतोष सिंह की रिपोर्ट)

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बिना क्रेशर ही सरस्वती मिनरल्स ने किया अवैध उत्खनन, अब धड़ल्ले से क्रेशर संचालित

इंट्रो –  मैकलांचल पर्वत अपनी सुदंरता के लिए जाना जाता है,यंहा पहाड़ और हरे भरे पेड-पौधे प्राकृति सौदर्यता को दोगुना बढ़ाते रहे है लेकिन इस प्राकृतिक सौदर्यता व खनिज पदार्थो पर माफियाओ की नजर लगी है जो बेतहाशा उत्खन, बेपरवाह परिवहन और अवैध भंडारण व उड़ती स्टोन डस्ट से बर्बाद करने पर तुले हुए हैं।

अनूपपुर/

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आशुतोष सिंह मो. 8770310375

पुष्पराजगढ़ जनपद अंतर्गत आने वाले क्षेत्रो में खनिज माफियाओ द्वारा लगातार शासकीय एवं निजी भूमियो में खनिज विभाग के सह पर खनिज पदार्थो का दोहन किया जा रहा है। जिसकी लगातार शिकायतो के बाद भी मैकलांचल क्षेत्रो में खनिज पदार्थो के अवैध उत्खनन व परिवहन पर विभाग उदासीन बना बैठा है। ललन महराज जैसे पत्थर कारोबारी जिले की खनिज सम्पदा का दोहन खुलेआम वर्षों से करते आ रहे हैं। सरस्वती मिनरल सहित पठार में लगे सभी स्टोन क्रेशर को जिन मापदंडों पर संचालन की अनुमति दी गई है उसका खुले आम उलंघन खनिज प्रसासन की सह पर किया जा रहा है।

यह है मामला
मैकलांचल पर्वत पर बसे पुष्पराजगढ़ अंतर्गत आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों व ग्रामो में अवैध उत्खनन का कार्य लगातार जारी है। ग्राम दोनिया में कुछ समय पूर्व सिर्फ दस्तावेजो पर संचालित होने वाला सरस्वती मिनरल्स अब वास्तविक रूप धारण कर लिया है। क्रेशर संचालक घनश्याम तिवारी उर्फ ललन महराज द्वारा वर्षो तक बिना क्रेशर स्थापित किए ही फर्जी तरीके से खसरा नंबर ७३८/१ख, रकवा १.२१४ हेक्टेयर भूमि पर लीज लेकर लगातार पत्थरो का उत्खनन कर उसे छत्तीसगढ़ के गौरेला तहसील अंतर्गत ग्राम धनौली में लगे क्रेशर तक पहुंचा सरकार को राजस्व की हानि पहले ही पहुंचा चुके हैं वर्तमान में भी बारूदी धमाके के साथ बिना प्रशिक्षित ऑपरेटर – श्रमिक से स्टोन क्रेशर चलवा दुर्घटना को खुला आमंत्रण दे रहे हैं।

कागजो के खेल में चला कार्य

सरस्वती मिनरल्स के संचालक ने पुष्पराजगढ़ के ग्राम दोनिया में वर्ष २५ जनवरी २००३ से २४ जनवरी २०१३ तक खसरा नंबर ७३८/१ख, रकवा १.२१४ हेक्टेयर भूमि पर लीज लेकर लगातार खनिज पदार्थो का दोहन करता रहा तथा लीज अवधि खत्म होने के बाद भी वर्ष २०१३-१६ तक अवैध उत्खनन कर पत्थर को छत्तीसगढ स्थित क्रेशर में परिवहन करता रहा जिसके कारण प्रदेश शासन को करोडो की क्षति हुई, वहीं इस पूरे मामले में खनिज विभाग ने सिर्फ पत्राचार कर इतिश्री कर ली है। जबकि उक्त क्रेशर संचालक द्वारा पत्थर खदानों पर न तो फिनसिंग कराई गई न ही प्रदूषण रहित बातावरण बनाने के लिए ठोस कदम उठाये गए हैं। संचालक द्वारा पूर्व की भांति नियमों को ताक में रख अब खदान की जगह पर ही क्रेशर लगा धड़ल्ले से उसका संचालन किया जा रहा है।

खदान कंही पत्थर कंही और से

जानकारी के अनुसार सरस्वती मिनरल्स द्वारा खनिज विभाग में सरस्वती मिनरल्स क्रेशर स्थापित करने के लिए खसरा नंबर ८१८ दर्शाया गया है, लेकिन जानकारों के अनुशार ग्राम दोनिया के खसरा क्रमांक ८१८ में कोई भी क्रेशर संचालित नही है। बलिक सरस्वती मिनरल्स के संचालक ने पूरे मामले को छिपाने के लिए खसरा नंबर ८१८ में अपना कार्यालय खोल लिया। जबकि उत्खनन पट्टा क्रेशर आधारित लीज पर ही दिया जाता है मामले की गंभीरता से यदि जांच की जाए तब अवैध उत्खनन की कहानी से पर्दाफाश हो सकता है उक्त क्रेशर संचालक द्वारा लीज खदानों से पत्थर निकालने की जगह अवैध खदानों से ही बर्तमान में क्रेशर को संचालित किया जा रहा है। विभाग द्वारा खदानों से निकले पत्थर और काटी गई रायल्टी का यदि मिलान किया जाए तब अवैध उत्खनन की कहानी से पर्दा उठ सकता है।

बोल्डर से गिट्टी की अंतर राशि नही की गई जमा

सरस्वती मिनरल्स द्वारा वर्ष २००३ से पत्थरो के उत्खनन के लिए लीज तो लिया गया और वर्षो तक उस लीज से पत्थरो का अवैध उत्खनन करता रहा। लेकिन बोल्डर से गिट्टी की अंतर राशि खनिज विभाग में जमा ही नही की गई। यह पूरा मामला सरस्वती मिनरल्स के पास क्रेशर ही संचालित नही होने का है जिससे प्रशासन सहित विभाग को बीते वर्षो से लगातार गुमराह कर फर्जी दस्तावेजो के आधार पर ग्राम दोनिया में लीज प्राप्त किया है।

शासन को पहुंची करोडो की क्षति

सरस्वती मिनरल्स के संचालक घनश्याम तिवारी उर्फ ललन महराज द्वारा खनिज विभाग को गुमराह करते हुए बिना किसी क्रेशर स्थापित किए ही जहां समतल भूमि को खाई में तब्दील कर दिया गया, वहीं लीज से अवैध उत्खनन कर उसे गलाने के लिए धनौली छ.ग. के क्रेशर में पहुंचाता रहा है। ग्राम दोनिया से उत्खनन किए जा रहे पत्थर को व उसके भंडारण का अब तक खनिज विभाग को पता भी नही है। पूरा मामला विवादस्पद होने के कारण इसकी शिकायत पूर्व में खनिज अधिकारी से भी की गई थी किन्तु अपने रसूख के दम पर लल्लन महराज द्वारा न तो अंतर की राशि जमा की गई न ही खदानों में फेंसिंग, व व्रक्षारोपन कराया गया और न ही स्वीकृत खदानों से पत्थर निकाला गया इसके विपरीत अवैध खदानों में बारूदी धमाके कर पत्थरो का भंडारण व साँचालन बदस्तूर किया जा रहा है।

इनका कहना है

प्रदूषण/प्रबंधन के साथ सिया और डिया के नियमो का पालन खनिज विभाग करे सुनिशित

जिला कलेक्टर कार्यालय
जनसम्पर्क अनूपपुर

मामले की जानकारी मुझे वाट्सअप में दें यदि कुछ गलत हो रहा है तब निश्चय ही उचित कार्यवाही की जावेगी

विजय डहेरिया
अनुविभागीय दंडाधिकारी पुष्पराजगढ़

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