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अमरकंटक अध्यक्ष पर अविस्वास, चपरासी नगर परिषद पर भारी ( आशुतोष सिंह की रिपोर्ट )

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बगैर निविदा ठेका, 46 लाख वसूली, वाहन पार्किंग, निर्माण कार्यों मे धांधली

इंट्रो- मैकांचल की एक मात्र नगर परिषद अमरकंटक का विवादों से चोली दामन का नाता है। परिषद अध्यक्ष पर अतिक्रमण वाले आरोप के साथ पार्षदों ने अविस्वास प्रस्ताव के लिये बैठक तक आहुत कर ली है तो वहीं गेस्ट हाउस की बकाया वसूली नही होने से सीएमओ पर मातहतों पर महरबानी के आरोप लग रहे हैं। इधर भृत्य अपने पुत्र व उसके साथियों के कंधों पर कमान रख तीर रुपी नगर परिषद चला रहा है।

अनूपपुर। जिले अंतर्गत आने वाली अमरकंटक नगर परिषद वर्तमान समय मे विवादों से घिरती जा रही है। मां नर्मदा की उद्गम स्थली आज राजनीतिक अखाड़ा द्वेष, रसूख, अवैध वसूली जैसे आरोपों की गढ़ बन चुकी है। पर्यटक गेस्ट हाउस, काॅटेज, सामुदायिक भवन की शेष 4683740/ ठेके की वसूली राषि जमा नही करने वाले ठेकेदार पर महरबानी कायम है। कुछ पार्षदों ने नगर परिषद अध्यक्ष पर अविस्वास प्रस्ताव लाने बैठक आहुत करने वाले पत्र लिखे है तो वहीं अध्यक्ष पर अतिक्रमण – निर्माण करने के आरोप लगे है। वाहन पार्किंग का विवादित ठेका बिना प्रस्ताव पारित करने के आरोप सीएमओं सहित परिषद कर्मचारियों पर लग रहे है। पार्किंग स्थल से अन्यत्र ठेकेदार द्वारा जबरिया वसूली की बातें भी प्रायः अखबारोे व शोशल मीडिया की सुर्खियां बन रही है।

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गेस्ट हाउस, ठेका और वसूली
अमरकंटक मे बने व्हीआईपी/पर्यटक गेस्ट हाउस के 14 कमरे, ए-काटेज गेस्ट हाउस के 6 कमरे व सामुदायिक भवन का ठेका वर्ष 2018-19 मे अभय यादव को अलग अलग राशि के कुल योग 40,13,600/ मे दिया गया था। साथ ही निस्पादित अनुबंध मे 31 मार्च 2019 तक ठेके की संपूर्ण राशि जमा करने की बात कही गई थी। 6 मार्च को ठेका नोटसीट मे टीप अंकित कर आचार संहिता का हवाला देकर उक्त ठेकेदार को 30 जून (3 माह) के लिये सामुदायिक भवन को छोड़कर क्रमशः 2 लाख 30 हजार एवं 85 हजार की बृद्धि कर दोनो ही गेस्ट हाउस के परिचालन की बृद्धि कर दी गई किन्तु इस बृद्धि के समय अनुबंध पत्र नही भराया गया। 20 जून 2019 तक ठेकेदार द्वारा ठेके की पूर्ण राशि जमा नही की गई फिर भी परिषद के पदाधिकारियों द्वारा 21 जून को नोटसीट पर पुनः टीप अंकित कर 10 प्रतिषत बृद्धि राशि के साथ ठेके की अवधि को 3 माह (1 जुलाई) तक के लिये पुनः बढ़ा दिया गया। बड़ा सवाल यह है कि ठेकेदार द्वारा अनुबंध पत्र अब भी नही लिया गया जो कुछ पार्षदों समेत परिषद कर्मचारियों के मिलीभगत की ओर इशारा ही नही संलिप्तता जाहिर करते है।

अविस्वास प्रस्ताव य दबाव
अमरकंटक नगर परिषद अध्यक्ष के विरुद्ध अविस्वास प्रस्ताव वाले पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले ग्यारह पार्षदों ने दस्तखत व सील लगाकर जिला कलेक्टर के नाम पत्र लिखा है। पत्र मे लिखा है कि अध्यक्ष नगर परिषद की कार्यप्रणाली से हम पार्षद/सदस्य असंतुष्ट है। पार्षदों द्वारा नगर पालिका अधिनियम की धारा 43क(2)(1) के तहत अविस्वास सम्मिलन बुलाये जाने का उल्लेख किया गया है। राजनीतिक द्वेश व भ्रष्टाचार की पर्याय बन चुकी नगर परिषद अमरकंटक के पार्षदों द्वारा जारी पत्र पर दिनांक अंकित न होना एक भूल हो सकती है पर लगातार वाहन र्पािर्कंग की अवैध वसूली से पर्यटकों और श्रद्धालुओ पर पड़ रहे दुष्प्रभावों को नजर अंदाज करना सर्वविदित रहा है। यह अविस्वास प्रस्ताव भी दबाव बनाने की राजनीति बनकर न रह जाये बहरहाल यह नगर परिषद अमरकंटक के अध्यक्ष पार्षदों व कर्मचारियों का अंदरुनी मामला है जो समयानुरुप ही करवट लेगा।

भृत्य का पुत्र-मित्र ठेकेदार
नगर परिषद अमरकंटक मे भृत्य के पद पर कार्यरत मनोजकान्त तिवारी पर कुछ कर्मचारी पार्षदों को रिस्वत दे लोगों के असंवैधानिक कार्य कराने के आरोप प्रायः जनचर्चा का विषय बना रहता है। परिषद के ठेको पर पैनी नजर रखने वाले भृत्य ने पहले तो अपने पुत्र पवन तिवारी को ठेकेदार बनाया फिर राशि गबन के आरोप लगते ही दूसरा ठेका पुत्र के मित्र अभय यादव को दिलवाने की चाल मे सफलता अर्जित की। अब अभय यादव द्वारा संविदा की बकाया राशि जो 46 लाख से अधिक है जमा नही की गई है। कहने को ठेकेदार अभय यादव मामले मे दोषी पाया गया है लेकिन ठेके से प्राप्त राशि रुपी मलाई खाने वाले तिवारी परिवार वर्तमान मे दोष मुक्त चोला धारण किये हुये है।

निर्माण कार्यो मे अनियमितता
पवित्र नगरी अमरकंटक मे प्रायः निर्माण कार्य पूरे वर्ष चलता रहता है। परिषद मे पदस्थ उपयंत्री निर्माण कार्यों मे भ्रष्टाचार कर मोटी मलाई खा अपने मातहतों को खुस करने का हुनर जानते है। जनप्रतिनिधि/पार्षद पर प्रायः कमीशन लेकर ठेका व अन्य निर्माण कार्यो की सहमति देना नई बात नही है। जानकारों की माने तो अमरकंटक मे सैकड़ों अतिक्रमण किये गये है। आज उसी क्रम मे आरोप नगर परिषद अध्यक्ष पर भी लगे है। ऐसा कोई वार्ड नही जहां हुये निर्माण कार्यो मे अनियमितता न बरती गई हो बावजूद इसके परिषद प्रशासन अपनी जेब भर आंख मूंद ’’सब सही है’’ के अंदाज मे भूले बैठा है। आरोप तो यह भी है कि जब कमीशन की राशि का बटनवारा तय सीमा से नही हो पाता तो नाराज पक्ष मामले को तूल देने मे जुट जाते है और बटनवारा सही रहा तब ’’सब सही है’’ का राग अलापते दिखाई पड़ते है। बहरहाल यह नगर परिषद का अंदरुनी मामला है पर जनचर्चाओं जानकारों और कुछ निर्विवाद समाजसेवियों के आरोपों को निराधार भी नही माना जा सकता।

अतिक्रमण मे राजनीति
नगर परिषद अमरकंटक की अध्यक्ष पर अविस्वास करने वाले 11 पार्षदों ने बैठक आहुत करने के लिये जिला कलेक्टर को पत्र लिख अवगत कराया है। नगर पालिका अधिनियम की धारा का उल्लेख करते हुये अध्यक्ष को पदच्युत करने की तैयारी कर ली है। अतिक्रमण कर घर बनाने के आरोप से घिरी नगर परिषद की पहली महिला पर राजस्व ने नोटिस दे निर्माणाधीन जगह को म.प्र. शासन की जंगल व चारागाह करार दिया है। 800 वर्ग फुट खसरा नंबर 56/1 रकवा 1.248 भूमि पर वास्तविक कब्जा और मालिकाना हक की लड़ाई राजस्व न्यायालय मे विचाराधीन है। आरोप प्रत्यारोप का दौर तो यूं ही चलता रहेगा किन्तु अमरकंटक मे हुये अतिक्रमण अब साफ नजर आने लगे है। अब अतिक्रमण की जद्द मे नेता, कर्मचारी, पण्डा, आश्रम सहित पिछलग्गू लोगों के आलिशान महल वहां बने है जहां सरकारी दस्तावेजों मे आज भी संरक्षित क्षेत्र लिखा है।

इनका कहना है
हमारे द्वारा बकाया राशि के संबध मे दस्तावेज व जांच प्रतिवेदन जिला कलेक्टर को दे दिये गये है उनके द्वारा लिये गये निर्णयानुसार आगामी कार्यवाही की जायेगी।
पवन साहू
सीएमओ नगर परिषद अमरकंटक

भारतीय जनता पार्टी के प्रतिनिधियों द्वारा अतिक्रमण अवैध उत्खनन जैसे कार्यो मे संलिप्तता जग जाहिर है। ये सरकारी संपत्तियों को अपनी संपत्ति समझा व्यक्तिगत उपयोग करते रहे है उसी क्रम मे आज भी अतिक्रमण अवैध वसूली व रगंदारी को अंजाम दिया जा रहा है।
बीरु तांबोली
नगर कांग्रेस अध्यक्ष अमरकंटक

हम इस भूमि पर 1956 म.प्र. स्थापना के समय से रहते आये है। हमारी तीन पीढ़ी इसी जगह पर निवास की है। हमे भूमिहीन के तहत यहां आवास दिया गया था उसी जगह अब निर्माण कराया जा रहा है। आरोप राजनीतिक द्वेष के सिवा कुछ भी नही है।
प्रभा पनाड़िया
अध्यक्ष नगर परिषद अमरकंटक

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