गाजियाबाद :- 

दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा के शाहबेरी में निर्माणाधीन छह मंजिला इमारत गिरने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि गाजियाबाद के मिशलगढ़ी में निर्माणाधीन पांच मंजिला इमारत के ढहनेे का मामला सामने आया है। एक चश्मदीद के मुताबिक इमारत में दरार पड़ गई थी और मलबे में कई मजदूर दबे हुए हैं। बताया जा रहा है कि जिस इलाके में यह बिल्डिंग गिरी है, वह पूरी तरह से अवैध रूप से बसाई गई है।

जिम्मेदार लोगों के खिलाफ होगी कार्रवाई 

राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गाजियाबाद के डीएम और एसएसपी से मौके पर पहुंचकर राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं, साथ ही आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। आईजी लॉ एंड ऑर्डर ने कहा कि जैसे ही इमारत गिरने की जानकारी मिली, वैसे ही पुलिस मौके पर पहुंची। राहत और बचाव कार्य तेजी से चल रहा है। 7 लोगों को बचाया है, जिसमें 1 की मौत हो गई और 6 लोग अस्पताल में हैं, जिनका इलाज चल रहा है। जैसे ही बचाव कार्य पूरा होगा, हम मामले की जांच करेंगे और जो भी जिम्मेदार होगा उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।

राहत और बचाव कार्य शुरूहादसे की सूचना मिलने के बाद मौके पर पुलिस और NDRF की टीम पहुंच चुकी है राहत और बचाव का कार्य शुरू कर दिया गया है। बचाव के कार्य में डॉग स्क्वायड की भी मदद ली जा रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इमारत के गिरते उमसें कई मजदूर मौजूद थे। फिलहाल हादसे के बाद 2 बच्चों समेत सात लोगों को मलबे से बाहर निकाल लिया गया है।एक मजदूर की मौत गाजियाबाद निर्माणाधीन बिल्डिंग हादसे में घायल महिला गुलाबरानी (47), शिवा (8) व देवेन्द्र (5) साल की हालत गंभीर बनी हुई है। तीनों को जिला संयुक्त अस्पताल से जीटीबी दिल्ली रेफर कर दिया गया है। हादसे 35 वर्षीय एक मजदूर की मौत भी हो गई जिसका नाम अभी नहीं पता चल सका है। वहीं एक और घायल रईश को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। ।

अवैध इमारत 

गौरतलब है कि ग्रेटर नोएडा के शाहबेरी में मंगलवार की रात करीब 9 बजे दो इमारतें भरभराकर गिर गईं थीं।शनिवार सुबह नोएडा के सेक्टर-63 से बेसमेंट की दीवार गिर गई थी जिसमें एक बच्चेे की मौत हो गई थी।शाहबेरी में छह मंजिला इमारत का जमींदोज होना सिर्फ एक हादसा भर नहीं था। बल्कि इस हादसे ने धराशायी हो चुके सरकारी सिस्टम को भी उजागर हुआ है। जो इमारत धराशायी हुई थी, वह अवैध थी।

तय मानकों पर नहीं किया काम 

दिल्ली-एनसीआर में बनी सैकड़ों इमारतों की भी कमोबेश यही स्थिति है। बिल्डर परियोनाओं में खरीदारों को कब्जे के साथ ही फ्लैट के प्लास्टर व दीवार गिरने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन घटनाओं से बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले दशहत में आ चुके हैं। बिल्डरों ने अधिक से अधिक फायदा कमाने के लिए मानकों को दरकिनार कर घटिया निर्माण सामग्री लगाई है।

धराशायी हो चुके सिस्टम का सच, लाखों लोगों की कब्रगाह बन सकती हैं कमजोर इमारतें

सुरक्षित नहीं है साइबर सिटी

ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के बाद साइबर सिटी भी सुरक्षित नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि शहर में नगर निगम से बिना नक्शा पास करवाए और हरियाणा बिल्डिंग कोड 2017 की अवहेलना कर जगह-जगह अवैध निर्माण किए जा रहे हैं। सस्ते बिल्डर फ्लोर बेचने के फेर में कई बिल्डर इमारतों की क्वालिटी से भी समझौता कर रहे हैं। सस्ते घर का सपना दिखाकर लोगों को झांसे में लिया जा रहा है। ऐसे में ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद जैसा हादसा गुरुग्राम में भी हो सकता है।

सख्त कदम नहीं उठाए गए

अवैध निर्माणों की जानकारी नगर निगम के उच्चाधिकारियों को भी है, लेकिन अवैध निर्माण करवाने वालों के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है। खतरा सिर्फ इन अवैध निर्माणों में रहने वालों को ही नहीं है, बल्कि आसपास की रिहायशी इमारतों को भी नुकसान पहुंच सकता है।

 

By Amit Mishra