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चचानडीह बाक्साइड खदान ने किया कई बैगाओं को बेघर {पुष्पराजगढ़ से अजय जयसवाल की रिपोर्ट}

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चचानडीह बाक्साइड खदान ने किया कई बैगाओं को बेघर {पुष्पराजगढ़ से अजय जयसवाल की रिपोर्ट}

राजेन्द्रग्राम :

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पुष्पराजगढ़ स्थित चचानडीह बाक्साइड खदान जो मुख्यालय से महज 8 किमी. दूर स्थित है पुष्पराजगढ़ सबसे जादा राजस्व देने वाला तहसील मुख्यालय है इसके बावजूद यहां के गरीब आदिवासीयों का घर रहन-सहन पहले से भी वद्दतर होते जा रहा हैं जहां एक ओर ठेकेदारों या राजस्व से जुडे़ क्रेषर सचांलको की क्रेषर या खदान दिनों दिन दुगने और चैगने गति से वद रहे हैं वही दिनों दिन आदिवासी बैगाओं की स्थितिया वद् से बद्तर होते जा रहे हैं सूत्रों की मानें तो यहां पर संचालित बाक्साईड बडाने के ठेकेदार के यहां करीब दो साल पहले आयकर विभाग का छापा पड़ा था तब न जाने उनके घर से अरबों खरबों रूपये मिले थे पर पैसों के सामने सत नट मस्तक होते हैं चाहे वो अधिकारी हो नेता, मंत्री या चपरासी हों।

कई बैगाओं को किया बेघर,

चचानडीह बाक्साईड खदान ने खुले आम नियमों की धज्जी उड़ाते हुए चचानडीह में रहने वाले सैकड़ों परिवार के बैगा जनजातिय को अपने आते ही खुली खदान के आड़ में मन मर्जी तरीके से किसी को मुवावजे के नाम पर एक लाख किसी को पचास हजार देकर अपने रास्ते से हटा दिया और उनके रहवासि इलाके में वेधड़क कब्जा कर सालों से लाखों तन बाक्साईड का परिवाहन करने में सफल रहे अब उन गरीब जनजातिय बैगाओं का हाल देखने वाला कोई नहीं बेचारे घास फूसं की झोपड़ी बना कर खदान के आस-पास खदान में ही मजदूरी कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। गरीब से अब गरीबी रेखा के नीचे पीले कार्ड धारी की पहचान पा चुके बैगाओं को आज किसी तरह की कोई सुविधा मुहाईया नही है ठेकेदार के द्वारा उन पर प्रतिनिधी कर्मचारी गरीब आदिवासी दिनों दिन गरीब होते जा रहा है और ठेकेदार दिनो दिन दोगनी और रात चैगुनी तरक्की कर रहा हैं।

360 रूपये की जगह 220 रूपये मिलती है मंजदूरी,

चचानडीह बाक्साइड खदान में कार्य करने वाले जनजातिय मजंदूरों का ठेकेदार के द्वारा लगातार लगभग 10वर्षो से शोस करते चला आ रहा है पहले तो अनकों घर से बेघर किया और पेट में भी खुले आम लाट मारने का कार्य जारी है। मंजदूरी के नाम पर 220 रूपये प्रति दिन दिया जाता है। जब कि उनका मुख्य 360 रूपये होता है। वो भी महीनों इंतजार करने के बाद नसीब होता है। सूत्रों की मानें तो ठेकेदार की मनमर्जी चरम पर हैं क्योंकि ठेकेदार मुख्यमंत्री के खास व्यक्ति है इससे स्पष्ट हो जाता है यह कहावत कि सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का इतना ही नहीं इन बैगाओं के बच्चे भी इन्ही के खदानों में काम करते स्पष्ट दिखाई दे जाऐगीं इनके स्कूलों की हालत भी खस्ता है बड़ी – बड़ी व्लास्टिर्ग से जर्जर हो चुके भवनों में बैठने से बच्चे व षिक्षक भी घबराते है षिक्षकों की मानें तो उन्होंने जिसकी षिकायत मुख्यमंत्री तक पहुुंचाई है मगर चंद चांदी के षिक्कों के आगे सब बेवस नजर आतें है। बड़े-बड़े कारनामों का खुलासा अगले अंक में,

 

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