# मुख्यमंत्री सीएम शिवराज सिंह का हुआ आगमन ##

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पशु चिकित्सालय के अस्तित्व पर खतरा ( वरिष्ठ पत्रकार यदुवंश दुबे की कलम से )

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राजेन्द्रग्राम।

पुष्पराजगढ़ मुुख्यालय में पशु चिकित्सालय केन्द्र संचालित है। जो कभी वर्ष 1958-60 मे ग्राम बसनिहा पशु चिकित्सालय के नाम से जाना जाता रहा है। बढ़ती आबादी पशु पालको की संख्या को देखकर पशु चिकित्सालय ग्राम बसनिहा से हटाकर मुख्यालय परिषर राजेन्द्र्रग्राम मे संचालित किया गया। यह व्यवस्था तब की गई जब भारत देश के पहले राष्ट्रपति डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद का आगमन म.प्र. के शहडोल जिले मे पवित्र पावन सलिला मा नर्मदा आंचल के धरती ग्राम बसनिहा मे वर्ष 1959-60 के बीच हुआ। प्राटोकाॅल व्यवस्थाओं के अनुसार जब कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति शासक हो य प्रशासक किसी जगह पदार्पण करता है जिनके सुरक्षा व्यवस्था, मान सम्मान, खान पान, स्वास्थ, शिक्षा आदि की सभी नियम अपनाये जाते है। महामहिम डाॅॅ राजेन्द्र प्रसाद ग्राम बसनिहा रात्रि विश्राम कर सुबह सूरज उगने की दिनचर्या के साथ राजेन्द्रग्राम लोकनिर्माण विभाग के डाक बगले मे जो उस समय शहडोल जिले के देख रेख मे संचालित था मे पदार्पण हुआ। कहा जाता है कि महामहिम राष्ट्रपति के पदार्पण स्थान की जगह पर नाई, मोची, धोबी, आचार्य, हलवाई, बढ़ई, लोहार, चिकित्सक आदि की सभी व्यवस्थाये की जाती है जो पूर्व मेे महाराजा रीवा द्वारा जोहिला तट से लगा रिक्त स्थान को पुुष्पराजगढ़ नाम से सुसोभित किया था जहां महामहिम डाॅ राजेन्द्र सिंह के द्वारा उपरोक्त रिक्त स्थान को राजेन्द्रग्राम के नाम से अलंकृत किया। जो सरकारी रिकार्डो मे दर्ज पाया जाता है। राष्ट्रपति महामहिम डाॅ राजेन्द्र प्रसाद जी ने राजेन्द्रग्राम नाम से अलंकृत ग्राम जो आदिवासी समुदाय का बसीहट ग्राम किरगी है राजेन्द्रग्राम को संलग्ल करते हुये जो आज किरगी राजेन्द्रग्राम नाम से जाना जाता है जहां अस्पताल, तहसील, थाना, पशु चिकित्सालय आदि की सभी व्यवस्थाये संचालित हुई। लखौरा ग्राम से संचालित तहसील पुष्पराजगढ़ मे स्थित हुई। वहीं लखौरा ग्राम से ही थाना राजेन्द्रग्राम जाना जाने लगा। वहीं पशु चिकित्सा अस्पताल बहुत दिनों तक ग्राम बसनिहा के नाम सेे संपादित होती रही जो अब पषु चिकित्सालय राजेन्द्रग्राम के नाम से जाना जाता है वहीं डाॅ महामहिम डाॅ राजेन्द्र प्रसाद द्वारा प्रषासनिक व्यवस्थाओं के साथ राजेन्द्रग्राम मे ग्राम बसनिहा पटना (लांघाटोला) बघर्रा, कोहका आदि ग्रामों से वहाँ के आदिवासी निवासी एवं अन्य वर्ग को लाकर बसाया गया। वहीं किरगी ग्राम को अब किरगी राजेन्द्रग्राम के नाम से जाना जाता है।

परिषर एक कार्यालय अनेक

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जैसा कि किरगी राजेन्द्रग्राम का मुख्यालय पुष्पराजगढ़ के नाम से प्रचलित है जहां तहसील पुष्पराजगढ़ के नाम से जानी जाती है। तहसील से लगा थाना परिषर राजेेन्द्रग्राम के नाम से जाना जाता है। जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ के नाम से जानी जाती है। सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र पुष्पराजगढ़ के नाम से लिखा जाता है। वहीं ग्राम बसनिहा से उठकर राजेन्द्रग्राम मुख्यालय रीवा अमरकंटक रोड के समीप पशु चिकित्सा अस्पताल के लिये तहसील पुष्पराजगढ़ के पटवारी नक्से मे 1 एकड़ 80 डिसमिल जमीन पशु चिकित्सा विभाग उप संभाग राजेन्द्रग्राम को आवंटित किया गया। जहां पशु चिकित्सा अस्पताल की भूमि पर आवागमन की सुविधा को दृष्टिगत रखते हुये रोड निर्माण मे चली गई एवं कुछ भूमि पर आवस्यकता नुसार छोटी बालिकाओं के पढ़ाई हेतु कन्या प्राथमिक शाला का निर्माण हो गया तथा कुछ भूमि पर विभाग के ही द्वारा अतिरिक्त कक्ष का निर्माण हुआ। कुछ भूमि इधर उधर भवनों के बन जाने से दब गई। पशु चिकित्सालय विभाग को आवंटित 1 एकड़ 80 डिसमिल भूमि की जगह मात्र 1 एकड़ 20 डिसमिल भूमि शेष बची है जहां पर विभाग का अस्पताल संचालित है। एवं 1 एकड़ 20 डिसमिल भूमि के परिषर मे मुख्य ग्राम खण्ड केन्द्र संचालित हो रहा है।

पशु चिकित्सा परिषर मे टेम्पो एवं छोटे चार पहिया वाहनों का जमावड़ा

जैसा कि देखा गया है कि पशु चिकित्सा के प्रांगण मे पुष्पराजगढ़ से तकरीबन 25 से 30 किमी की दूरी से आने वाले टेम्पो एवं चार पहिया वाहन, दो पहिया वाहन खाली जगह पड़ी होेने के कारण बाहुल्य संख्या मे वाहनों का जमावड़ा हो जाता है जिसके कारण अस्पताल परिषर मे पशुओ की दवा कराने आये पशुपालक के पीड़ित जानवर वाहनों की गड़गड़ाहट से कटघरा जानवर य तो कूद जाते है जहां दवाई करने की बजाय जानवर चोटिल हो जाते है वहीं अस्पताल पशुचिकित्सा परिषर मे ऐसी कोई व्यवस्था नही है जहां डाॅकटर, कर्मचारी निडर एवं स्वतंत्र होकर पशुओ का उपचार कर सकें।
इतना ही नही इसी परिषर मे परिषर के सामने व्यवसाई सब्जी, किराना, कपड़े आदि का व्यवसाय करने के लिये दुकाने लगा ली जाती है जहां बीमार पशुओ केे ईलाज के लिये आने जाने का रास्ता बंद हो जाता है भीड़ भाड़ को देखते ईलाज केे लिये आये पशु परिषर से भाग जाते है। पशु चिकित्सालय राजेन्द्रग्राम मे बीमार पशुओ को समुचित स्वतंत्र उपचार करने के लिये न तो कोई बाउन्ड्री है न कोई प्रतिबंध आये दिन परेशानी उत्पन्न होती रहती है। जो समय को देखते हुये अब अति आवस्यकता है कि पशु चिकित्सालय राजेन्द्रग्राम मे बाउन्ड्रीवाॅल बना दिया जायेेेेेेेेेेेेेेे तो पशुओ एवं पशुपालको को हो रही परेशानियों से निजात मिल सकेगी वहीं 1 एकड़ 80 डिसमिल से 1 एकड़ 20 डिसमिल बची भूमि सिकोड़ने से बचाई जा सकेेगी।
इस पशु चिकित्सालय परिषर के रखरखाव हेतु अभी तक पशु चिकित्सा विभाग के उच्च सक्षम कार्यालय द्वारा मुख्य ग्राम खण्ड राजेन्द्रग्राम एवं पशु चिकित्सालय पुष्पराजगढ़ को उसके समुचित विकास के लिये एवं कार्यरत पशु चिकित्सा विभाग मे डाॅ एवं फील्ड कर्मचारियों को अभी तक कोई किसी प्रकार की आवासीय सुविधा नही प्रदान की गई जहां पशु चिकित्सक डाॅ कर्मचारी अन्यत्र किराये पर कमरे लेकर पशु चिकित्सा विभाग राजेन्द्रग्राम पुष्पराजगढ़ मे अपनी सेवा प्रदान कर रहे है। तथा कुछ अधिकारी कर्मचारी राजेन्द्रग्राम से 25 से 30 किमी दूर रहकर अपने ड्यूटी का निर्वहन करते है। पशु चिकित्सा सेवाये सक्षम कार्यालय द्वारा मुख्य ग्राम खण्ड राजेन्द्रग्राम पशु चिकित्सालय पुष्पराजगढ़ को समुचित विकास के लिये कोई भी संसाधन उपलब्ध न कराये जाने के कारण उपरोक्त परिषर आये दिन सिकुड़ता जा रहा है। जो समय की मांग को देखते हुये उपरोक्त परिषर को बाउन्ड्रीवाॅल से सुसज्जित करने के साथ 10 बाई 10 के कमरे, दुकान आदि बनवा दी जाये तो परिषर के सामने होती भीड़, वाहनों का जमावड़ा, वाहनों के धुयें से उड़ते प्रदूषड़ से निजात तो मिलेगी ही साथ उपचार के लिये आये पशुओ का स्वच्छ उपचार भी हो सकेगा।

 

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