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प्रदेश भर में लिपिक वर्गीय कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर, दफ्तर खाली, कामकाज ठप

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प्रदेश भर में लिपिक वर्गीय कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर, दफ्तर खाली, कामकाज ठप

भोपाल| 

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चुनाव से पहले कर्मचारियों की नाराजगी सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही है| एक बार फिर कर्मचारियों ने आंदोलन की राह पकड़ ली है|  वेतन विसंगति सहित अन्य मांगों को लेकर आज से प्रदेश भर के लिपिक संवर्ग के सभी कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं| कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक मांग पूरी नहीं होगी वह आंदोलन करेंगे और धरना दिया जाएगा।  कर्मचारियों के हड़ताल पर रहने से शासकीय काम प्रभावित हो रहा है| अलग अलग जिलों से तस्वीरें सामने आयी है जिसमे सभी लिपिक एवं चतुर्थ श्रेणी सम्बर्ग के लिपिक कर्मचारियों द्वारा एक जुट  होकर कार्यालय के काम काज को छोड़कर हड़ताल की जा रही है|

हड़ताल कर रहे लिपिकों का कहना है रमेशचंद शर्मा समिति की 23 अनुशंसाओं की स्वीकृति के बाद भी शासन द्वारा मनमानी की जा रही है। इन अनुशंसाओं के पालन में आदेश जारी नहीं किए जा रहे हैं।  वेतन विसंगति सहित कई ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें पूरा करने के लिए लिपिक साथियों द्वारा लगातार मांग की जा रही है। लेकिन शासन द्वारा उनकी मांगों को अनदेखा किया जा रहा है। इसलिए अब अनिश्चितकालीन हड़ताल का फैसला लिया गया है।

संरक्षक लिपिक वर्ग कर्मचारी संघ एवं अध्यक्ष मंत्रालय कर्मचारी संघ इंजी.सुधीर नायक ने सभी लिपिक एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की है| उन्होंने कहा पारस्परिक सापेक्षता और समकक्षता का यह सिद्धांत जो 46 संवर्गों पर लागू किया गया, लिपिकों और चतुर्थ श्रेणी पर लागू क्यों नहीं हो पा रहा है। नायक ने कहा यह दोहरे मापदंड क्यों हैं? पटवारी, सहायक शिक्षक, ग्राम सेवक, ग्राम सहायक, पशु चिकित्सा क्षेत्र सहायक,MPW,ANM–ये सब लिपिक से कम वेतन पर थे, फिर बराबर हुए, फिर आगे निकल गए, और अब और आगे के लिए वे लोग आंदोलन कर रहे हैं। इन संवर्गों की पारस्परिक सापेक्षता के आधार पर लिपिक का भी उन्नयन होना था, जो कि नहीं किया गया।  चतुर्थ श्रेणी का मुख्य सचिव के बराबर वृत्ति कर कट रहा है। चतुर्थ श्रेणी की सेवा निवृत्ति आयु64 वर्ष नहीं की गई। मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद चतुर्थ श्रेणी के पदनाम परिवर्तन नहीं किये गये। उन्होंने कहा आज भारत सरकार से भी अधिक योग्यता राज्य के लिपिक के लिए निर्धारित है। शिक्षक को जिंदगी में केवल एक बार बी.एड.पास करना है, जबकि लिपिक बनने के इच्छुक व्यक्ति को हर दो वर्ष बाद CPCT पास करना है।इतनी सख्त योग्यता लेने के बाद भी ग्रेड पे उन्नयन सहित अन्य मांगों के लिए शासन तैयार नहीं है। लिपिक षड्यंत्र का शिकार हुए है|

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