# मुख्यमंत्री सीएम शिवराज सिंह का हुआ आगमन ##

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पुष्पराजगढ़ मे चतुष्कोणीय मुकाबला ( पुष्पराजगढ़ से आशुतोष सिंह की रिपोर्ट )

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270 मतदान केन्द्रो पर 28 को ईवीएम मे बंद होगी 13 प्रत्यासियो की किस्मत

आदिवासी बाहुल्य विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 88 पुष्पराजगढ़ अपनी भौगोलिक स्थिति के लिये जाना जाता है समुद्री तट से 1054 मी. ऊपर मैंकांचल पर्वत श्रेणी श्रंखला मे अमरकंटक नामक जगह है यह म.प्र. की जीवन दायिनी कही जाने वाली नर्मदा नदी की उदगम स्थली है यह यहां की मुख्य पहचान है विगत कई वर्षो तक यह क्षेत्र कांग्रेस के गढ़ के रुप मे जाना जाता रहा है वर्ष 2003 मे भारतीय जनता पार्टी ने सुदामा सिंह सिंग्राम के रुप मे अपना खाता खोला था इससे पहले प्रायः इस सीट पर कांग्रेस का ही कब्जा रहा है हालाकि 1977 मे हजारी सिंह एवं 1989 मे जनता दल के प्रत्यासी कुन्दन सिंह भी जीत हासिल कर चुके है पूर्व के दोनो ही विधायको का कार्यकाल अल्पकालिक सरकार मे रहा है वर्तमान 2018 के चुनाव मे 13 प्रत्यासी अपनी किस्मत आजमा रहे है किन्तु मुख्य रुप से यहां दोनो प्रमुख राष्ट्रीय दल के प्रत्यासी कांग्रेस के उमीदवार फुन्देलाल सिंह मार्को वा बीजेपी के उमीदवार नरेन्द्र मरावी के साथ गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी के उम्मीदवार अनिल सिंह धुर्वे एवं बीजेपी से बागी हुये 10 वर्षो तक विधायक रहे प्रत्यासी सुदामा सिंह के बीच है इस प्रकार कहा जाये तो यहां चतुष्कोणीय मुकाबले की स्थिति बनी हुई है।

अतीत के पन्नो पर पुष्पराजगढ़

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अनुसूचित जनजाति के लिये आरक्षित इस विधानसभा सीट मे वर्ष 1971 मे निर्दलीय प्रत्यासी के रुप मे आनाज उड़ाता हुआ किसान चुनाव चिन्ह लेकर क्षेत्र के सबसे बड़े नेता कहे जाने वाले दलबीर सिंह ने चुनाव जीता था तब कांग्रेस का चुनाव चिन्ह गाय और बछड़ा हुआ करता था चुनाव जीतने के बाद दलबीर सिंह ने कांग्रेस का दामन थाम लिया और अगला चुनाव कांग्रेस के बैनर तले शहडोल संसदीय क्षेत्र का लड़ा यहीं से यह क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ बनता चला गया और दलबीर सिंह पहली बार राजीव गांधी मंत्री मंडल मे केन्द्रीय राज्य शहरी विकास मंत्री वा नरसिम्हा राव मंत्री मंडल मे केन्द्रीय राज्य वित मंत्री बने दलबीर सिंह की राजनैतिक पकड़ मजबूती के साथ आगे बढ़ने लगी केन्द्रीय राज्य वित मंत्री रहते समय इनके पास बैकिंग इन्सोरेन्स का काम हुआ करता रहा तब शहडोल संसदीय क्षेत्र मे कई बैंक वा इन्सोरेन्स की साखाये खोली गई थी तब दिल्ली के आवासीय कार्यालय का कार्य इनके भतीजे नर्बदा सिंह देखा करते थे साथ ही उनका निवास पुष्पराजगढ़ मे होने से कांग्रेस की पैठ यहां बढ़ती गई 1971 के बाद क्रमशः 1977 मे हजारी सिंह 1980 मे अम्बिका सिंह 1985 मे डीलन सिंह 1989 मे कुन्दन सिंह 1993 से 2003 तक शिव प्रसाद सिंह 2003 से 2013 तक सुदामा सिंह सिंग्राम वा 2013 मे फुन्देलाल सिंह मार्को विधायक चुने गये 

मत प्रतिशत वा जातिगत समीकरण

वर्तमान मे विधानसभा क्षेत्र पुष्पराजगढ़ मे 1,84,725 मतदाता है जिसमे 93,102 पुरुष वा 91,623 महिला मतदाता शामिल है लगभग 83 प्रतिशत जनजाति समुदाय के लोग है, पिछड़ा वर्ग 09 प्रतिशत, सामान्य 07 प्रतिशत व हरिजन 01 प्रतिशत निवास करते है पिछले चुनाव 2013 से 2018 तक लगभग विधानसभा क्षेत्र 88 मे 10,000 मतदाता की बढ़ोत्तरी हुई है जिसमे को-हार्ड बोटर (18से19वर्ष) की संख्या 1,479 है वही दूसरी तरफ 100 वर्ष के उपर 07 मतदाता शामिल है सर्वाधिक मतदाता अनुसूचित जनजाति के गोड़ जाति के है वहीं अधिकांस उमीदवार इसी जाति से आते है किन्तु गोंड़ जाति का रुझान इस बार सर्वाधिक गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी की ओर दिखाई दे रहा है ऐसे मे यह चुनाव चतुष्कोणीय होता जा रहा है पिछले चुनाव वर्ष 2003 मे 11 प्रत्यासी मैदान मे रहे कुल मतदाता 1,44,206 रहे वा मतदान का प्रतिशत 67.86 रहा बीजेपी 37.04 प्रतिशत के आधार पर 36,271 मत प्राप्त कर जीत हासिल की वही कोंग्रेश प्रत्यासी को 26.24 प्रतिशत के आधार पर कुल 25,694 मत हासिल हुये शेष 09 प्रत्यासियो को 24.91 प्रतिशत मत प्राप्त हुये वर्ष 2008 के चुनाव मे 18 प्रत्यासियो ने अपनी किस्मत आजमाई जिसमे एक बार पुनः बीजेपी के सुदामा सिंह 28.88 प्रतिशत मतों के आधार पर 30,356 मत हासिल कर विजयी रहे वही काग्रेस 27.51 प्रतिशत मतो के आधार पर कुल 28,916 मत हासिल कर सकी जीत का अंतर महज 1,440 रहा साथ ही कुल मत प्रतिशत 71.22 रहा शेष दल व प्रत्यासियो का मत प्रतिशत14.83 रहा है उसी क्रम मे वर्ष 2013 मे 11 लोगो ने अपनी किस्मत आजमाई वही दोनो प्रमुख्य पार्टियो ने अपने पुराने उमीदवारो को एक बार फिर मैदान मे उतारा नवीन मतगणना के अनुसार इस बार क्षेत्र के मतदाता बढ़कर 1,78,733 हो गये जिसमे पुरुष और महिला क्रमशः 90,494 एवं 88,239 रहे मतदान प्रतिशत भी अपने रिकार्ड स्तर 77.40 प्रतिशत पर पहुंच गया इस चुनाव मे अप्रत्यासित रुप से कांग्रेस के फुन्देलाल सिंह मार्को को 52.07 प्रतिशत मतों के आधार पर 69,192 मत हासिल हुये वही बीजेपी के सुदामा सिंह सिंग्राम को 25.25 प्रतिशत मत ही मिल सके जो कुल 33,545 थे इस प्रकार 35,647 मतो से फुन्देलाल सिंह मार्को विजयी रहे इस बार गोड़वाना गणतंत्र पार्टी के उम्मीदवार ललन सिंह परस्ते 10,759 मत हासिल कर तीसरी बड़ी पार्टी बनकर उभरे जो दोनो ही स्थापित पार्टी के लिये चिंता का विषय रहा ।

चुनावी निष्कर्ष का पूर्वानुमान

वर्ष 2018 मे 13 प्रत्यासी मैदान पर है कांग्रेस से फुन्देलाल सिंह मार्को वा बीजेपी से नरेन्द्र सिंह मरावी को उमीदवार बनाया गया है अब से पहले प्रायः दोनो ही पार्टियो के बीच मुख्य मुकाबला देखा गया है किन्तु इस बार गोड़वाना गणतंत्र पार्टी ने अपने प्रखर वक्ता अनिल सिंह धुर्वे को मैदान मे उतारकर दोनो ही पार्टियो की नींद उड़ा दी है वही पुष्पराजगढ़ भारतीय जनता पार्टी के इतिहास मे पहली बार बागी होकर 10 वर्षो तक विधायक रहे सुदामा सिंह सिंग्राम भी जोर आजमायिस कर रहे है इस प्रकार चतुष्कोणीय मुकाबला होते दिखाई दे रहा है एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2018 मे मत प्रतिशत कम रह सकता है कारण पुष्पराजगढ़ मे निवासरत खेतिहर ग्रामीण मजदूर बहुतायात संख्या मे काम की तलास मे बाहर गये हुये है कारण बारिस नही होने की वजह से खेती का काम बंद है यहां की 80 प्रतिशत खेती असिंचित है वहीं दूसरी तरफ चुनाव को लेकर पहले की भांति उत्साह भी नही देखा जा रहा है ऐसे मे जाहिर सी बात है कि पिछले चुनाव मे हुये रिकार्ड 77 प्रतिशत मतदान की तुलना मे मत प्रतिशत गिरेगा और मुकाबला कांटे की टक्कर के रुप मे सामने आयेगा लगभग 35-40,000 मत हासिल करने वाला प्रत्यासी विजय हासिल कर सकता है चूंकि इस बार मुकाबला चतुष्कोणीय बन गया है और अनुमान के मुताबिक लगभग 1,20,000 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकते है ऐसे मे 33.33 प्रतिशत मत हासिल करने वाला जीत हासिल कर सकता है यदि दोनो स्थापित दलो के खाते मे 20-20 हजार मत मान लिया जाये और गोड़वाना गणतंत्र पार्टी वा निर्दलीय प्रत्यासी सुदामा सिंह को 15-15 हजार मत सुरुआती दौर मे हासिल हो जाते है तब शेष बचे मतो का विभाजन अन्य पार्टी वा प्रत्यासी के साथ चारो प्रमुख प्रतिद्वन्दियो को जायेगा अब तक हुये चुनावो मे देखा गया है कि हर उमीदवार 1-2,000 मत आसानी से प्राप्त कर लेता है इस प्रकार चतुष्कोणीय मुकाबले को छोड़कर शेष 09 प्रत्यासी लगभग 20 से 25,000 मतों को प्रभावित कर सकते है जन शक्ति चेतना पार्टी के 3300 कार्यकर्ता यहां निवासरत है यदि सामूहिक रुप से इस पार्टी को मतदान कर देते है तब मुकाबला और भी रोचक हो सकता है किन्तु ये कार्यकर्ता सामूहिक मतदान नही करते जिसका फायदा अन्य उमीदवारों को जायेगा किन्तु यह पार्टी भी 10,000 मतो के करीब पहुंच सकती है इस बार यदि आश्चर्य चकित कर देने वाला परिणाम सामने आया तो कोई अतिशयोक्ति नही होगी वर्तमान परिदृश्य मे मतदाता मौन धारण किये हुये है और चुनावी परिणाम को किसी के प्रति मोड़ सकते है जहां तक हमारा अनुमान है कि जीत हार का अंतर ज्यादा से ज्यादा 5000 का होना चाहिये अब पूर्वानुमान के मुताबिक दोनो स्थापित पार्टी वा गोड़वाना गणतंत्र पार्टी निर्दलीय प्रत्यासी सुदामा सिंह एवं जन शक्ति चेतना पार्टी के मतो को जोड़ दिया जाये तब यह आंकड़ा 80,000 हो जायेगा इन पांचो को छोड़कर शेष 08 प्र्रत्यासी 20-25,000 मत प्राप्त कर सकते है तब बचे हुये महज 20,000 मतो के विभाजन मे जीत हार तय होगी और लोकतंत्र के इस महायज्ञ का फैसला आयेगा।

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