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लग्जरी वाहनों से छत्तीसगढ़ पहुंचाई जा रही शराब ( आशुतोष सिंह की रिपोर्ट)

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तय राशि से अधिक दामों पर बिक रही शराब

आबकारी सहित पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली कटघरे में

कहने को तो निगरानी के लिए आबकारी विभाग के प्रवर्तन दस्ते, स्पेशल स्ट्राइकिंग फोर्स, एक्साईज इण्टलीजेंस ब्यूरो और जिलों में आबकारी निरीक्षकों का पूरा लाव लश्कर है। इसके बावजूद शराब की तस्करी नहीं रोकी जा पा रही है। जिलों में चल रही लाइसेंसी शराब की दुकानों पर जिले के शौकीन जाम का लुत्फ तो उठा ही रहे हैं, वहीं शराब माफिया भी शराब छत्तीसगढ़ बार्डर पार करा कर चांदी काट रहे हैं।

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छत्तीसगढ़ में जब से राज्य सरकार की ओर से शराब दुकानों का संचालन कराया जा रहा है, तब से सीमावर्ती जिले अनूपपुर में चल रहे मयखानों की बल्ले-बल्ले हो गई है। इन लाइसेंसी शराब की दुकानों पर विदेशी शराब का मासिक कोटा उठाने में शराब विक्रेताओं को छींके आती थीं, मगर अब इनके चेहरे खिले हुए हैं। अब इन दुकानों से अंग्रेजी शराब की मासिक बिक्री में 70 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोत्तरी बताई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि आबकारी और इन क्षेत्रों में पडने वाले थानों की शराब ठेकेदारों से अच्छे संबंध है, इस वजह से अनूपपुर की शराब छत्तीसगढ़ में खप रही है और मासिक उठाओ में बढोत्तरी दर्ज कराई जा रही है।

खूब खप रही शराब बढ़ गई बिक्री

सूत्रों की माने तो जिले की शराब छत्तीसगढ़ के निकटवर्ती जिलों में खेपों के माध्यम से पहुंचाई जा रही है। गौरतलब है कि पूर्व में भी लग्जरी कार में बड़ी मात्रा में शराब जब्त की गई थी। आये दिन जिले से दूसरे प्रदेश में जाने वाली शराब बगैर पुलिस वा आबकारी के संरक्षण बिना आखिर कैसे पहुंचाई जा सकती है ? यह समझ से परे हैं।

चल रही अंधेरेगर्दी अंकित मूल्य से ज्यादा वसूली

जिले में आबकारी विभाग और शराब ठेकेदार मिलकर खरीदारों को लूट रहे हैं, खुलेआम तय मूल्य से ज्यादा पर शराब बेची जा रही है। यहां तक कि बिल मांगने या पूछे जाने पर गाली-गलौज की स्थिति संचालकों द्वारा बना ली जाती है विभाग से भी कई बार शिकायत की जा चुकी है। इसके बाद भी उचित कार्रवाई नहीं हो सकी और न ही मदिरा शौकीनों से अतरिक्त मूल्य वसूलना रुका है। सूत्रों का कहना है कि तय मूल्य की शराब को अतिरिक्त मूल्य में बेंचा जाता है। और इसकी शिकायत आबकारी मुख्यालय में भी की जा चुकी है। बावजूद शराब की दुकानों में अंधेरगर्दी चल रही है। दुकानों के आगे बिल लेने वाली सूचना भी अंकित नहीं की गई है, जबकि नियमतः सभी दुकानों के सामने लिखा जाना चाहिए कि सुविधा के लिए बिल की डिमांड कर सकते हैं। मांगने पर बिल देना भी जरूरी है, लेकिन जिला मुख्यालय सहित पूरे जिले की शराब दुकानों में न तो इसकी जानकारी दी जा रही है ना ही बिल दिया जा रहा है। यही नहीं 11 बजे के बाद भी शराब दोगुने दामों पर बेची जा रही है।

पुरानी बोतल नया दाम

इस गोरखधंधे का एक पहलू यह भी है कि इन दिनों दूसरे जिले की शराब छत्तीसगढ़ में खप रही है। उसी क्रम में अनुपपुर से भी शराब छतीसगढ़ पहुंचाई जाती है, जानकारों की मानें तो यह सब खेल आबकारी विभाग और पुलिस प्रशासन की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है, इसके अलावा नकली शराब के जरिए भी शराब माफिया और दुकानदार जमकर मुनाफा कमा रहे हैं, सूत्र बताते हैं कि पुराने रेट की शराब बीयर आदि की बोतलों में नए रेट चस्पा कर बेंचा जाता है। दुकानदार अंधाधुंध तरीके से अपनी जेब भरने में लगे हुए हैं, इसमें कुछ एक छुटभैये राजनेताओं का भी हाथ है, यही वजह है कि पुलिस इनपर हाथ डालने के बजाय अपना हिस्सा लेने में ही भलाई समझ रही है।

इनका कहना है

बोतलों में दर्ज कीमत पर ही शराब की बिक्री होनी चाहिए यदि उससे ज्यादा कीमत पर किसी भी लाइसेंसी दुकान से शराब बेची जाती है तो वह गलत है। हमे किसी भी अनियमितता की जानकारी दीजिए हम कार्यवाही करेंगे।

अखलाक हुसैन कुरैसी
आबकारी अधिकारी
अनुपपुर

छतीसगढ़ सीमा पर हमारी चौकी है अभी तक ऐसे मामले सामने नही आये हैं यदि किसी सूत्र से जानकारी मिली तो कार्यवाही निश्चित है।

भानुप्रताप सिंह
थाना जैतहरी

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