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जैतहरी महिला बाल विकास बना अनियमितताओं का गढ

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सीडीपीओ सतीस जैन की कार्यप्रणाली से पूरा महकमा है खफा

वर्तमान मे महिला बाल विकास जैतहरी मे भारी अनियमितता देखी जा रही है। जहां सीडीपीओ सतीश जैन की कार्यप्रणाली से पूरा महकमा खफा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओ से लेकर सहायिक, सुपरवाइजर ऑफिस मे पदस्थ बाबू, चपरासी आदि से सतीश जैन द्वारा तानासाही पूर्वक कार्य कराया जाता है। सतीश जैन की वजह से जैतहरी महिला बाल विकास अपने मूल उद्देश्य से भटकता जा रहा है। शासन द्वारा लगाये जाने वाले कैम्पों मे भी पैसों का गोलमाल किया जाता है। लगने वाले कैम्पो मे आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सुपरवाइजर, सहायिका, गर्भवती महिलाओं बच्चों आदि को खाना तक नसीब नही होता है। जबकि सीडीपीओ अपने मर्जी का बिल लगाकर शासन द्वारा प्रदत्त कार्यक्रमो हेतु आबंटित रुपयों का आहरण कर लेता है। सतीश जैन ने पूर्व मे पदस्थ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता राधिका यादव को अपने ऊपर यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराने पर वैमनस्यता भरा व्यवहार अपनाकर जालसाजी कर पद से पृथक कर दिया वा रीतू कोल को राधिका यादव की जगह आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रुप मे भर्ती कर लिया था। इसकी बकायदा विज्ञापन के माध्यम से रिक्त पद होना बताकर भर्ती निकाली गई थी। वर्तमान मे रीतू कोल को भी पद से पृथक कर दिया गया है। चूंकि राधिका यादव के पद पृथक्करण को कमिश्नर शहडोल ने खारिज कर दिया है। रीतू कोल की गलती सिर्फ इतनी थी कि उसने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की निकली भर्ती मे आवेदन किया और उसमे उसका चयन चचाई आबाद के लिये हुआ था। अब सीडीपीओ द्वारा दिये गये दोनो आदेशों का हवाला देकर कार्यकर्ता रीतू कोल उच्च न्यायालय की शरण मे चली गई। इस प्रकार देखा जाये तो सरकारी कर्मचारी होने के दायित्व से बाहर जाकर वैमनस्यता और व्यक्तिगत कारणों से अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को प्रताणित करना सतीश जैन के लिये महज आमबात बनकर रह गई है।

चचाई आबाद कार्यकर्ताओं का क्या है मामला ?

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जैतहरी विकासखण्ड अंतर्गत आने वाले चचाई आबाद आंगनबाड़ी केन्द्र मे पदस्थ कार्यकर्ता राधिका यादव को सेवा समाप्ति का आदेश क्रमांक 1755 दिनांक 07.10.2017 को दिया गया था। तत्पाश्चात रिक्त पद की भर्ती निकाली गई थी। जिसमे रीतू कोल का चयन हुआ। चयन से पूर्व रीतू कोल पंचायत मे पंच चुनी गई थी वा साथ ही अपने जीवकोपार्जन के लिये अतिथि शिक्षक के रुप मे शासकीय स्कूल मे सेवा दे रही थी। जैसे ही आंगनबाड़ी के रिक्त पद की जानकारी रीतू कोल को लगी उसने अपना आवेदन महिला बाल विकास अधिकारी जैतहरी को दिया चयन होने के पश्चात रीतू कोल ने पंच के पद से वा अतिथि शिक्षक से इस्तिफा देकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रुप मे अपनी सेवा देना सुरु किया। भर्ती के समय जारी किये गये ज्ञापन मे यह जानकारी उल्लेखित नही की गई थी कि चचाई आबाद का प्रकरण कमिश्नरी मे चल रहा है लेकिन जब रीतू कोल को पद से पृथक किया गया तब सतीश जैन द्वारा जालसाजी कर हवाला दिया गया कि रीतू कोल की भर्ती राधिका यादव द्वारा दायर याचिका के अधीन रहेगी। इन बातों को लेकर अब रीतू कोल उच्च न्यायालय की शरण मे चली गई है साथ ही अपना प्रभार देने से इंकार कर दिया है रीतू कोल ने जैतहरी महिला बाल विकास अधिकारी सतीश जैन को पत्र द्वारा अवगत कराया है कि उच्चन्यायालय के आदेश के साथ ही प्रभार दिया जायेगा।

मामू होटल के लगते है फर्जी बिल नही निकाला जाता टेन्डर

जैतहरी महिला बाल विकास अधिकारी सतीश जैन द्वारा भाई भतीजा वाद फैलाया जा रहा है वा जातिगत समीकरणो के आधार पर सपलाई आदि के कार्य बिना टेन्डर जारी कर जैन समाज के ही लोगो को दिया जाता है इसका जीता जागता उदाहरण जैतहरी मे संचालित मामू होटल है जिसका मालिक भी जैन समाज से आता है। ज्ञात हो कि सतीश जैन की जैतहरी पदस्थापना के बाद जितने भी सरकारी कार्यक्रमों का आयोजन हुआ और उन आयोजनो मे खाना, चाय, नास्ता आदि की व्यवस्था रही है तब ये समस्त लगे बिल इसी मामू होटल के है। जब लाखों की सपलाई चाहिये होती है तब क्या उसका टेन्डर जारी कर खाने की गुणवत्ता और शासन का पैसा नही बचाया जा सकता ?

चाय बिस्किट देकर लंच का निकलता है पैसा

 बाल विकास जैतहरी अंतर्गत लगने वाले कैम्पो मे खाने के नाम पर जहां लाखो रुपये का गबन कर लिया जाता है वहीं कैम्प मे आने वाले लोगो को चाय बिस्किट ही नसीब हो पाती है। जबकि शासन द्वारा इन कैम्पो के लिये भारी भरकम बमहिलाजट का आवंटन किया जाता है। और आगन्तुको को चाय नास्ता के साथ भोजन आदि की व्यवस्था भी देने के निर्देश होते है। लेकिन मनमर्जी के माहिर सतीश जैन द्वारा चाय बिस्किट देकर खाने के पैसे हजम कर लिये जाते है और ये सारे बिल उसी मामू होटल के नाम काट दिये जाते है जहां से ये फर्जी बिल नगद मे परिवर्तित होकर जैतहरी महिला बाल विकास अधिकारी सतीश जैन की जेब मे पंहुच जाते है। अधीनस्थ कर्मचारी सतीश जैन के तानासाही रवैया से इतने डरे हुये है कि इसकी शिकायत उच्च अधिकारियो से नही कर पाते किन्तु दबी जुबानो मे सभी सतीश जैन को कोसते हुये लगे कैम्पो मे अपने भूखे रहने का कारण जानते है।

कार्यालय की टूटी कुर्सी, बंद है लाईट, निकल रहे बिल

जैतहरी महिला बाल विकास कार्यालय की कुर्सी टूटी पड़ी है लाईट के नाम पर एक बल्ब भी नही जल रहा पंखो की हालत बंद के रुप मे साफ देखी जा सकती है। भवन की पुताई आदि वर्षो से नही हुई है किन्तु इन सभी के मरम्मत के नाम पर बिल लगाकर पैसे आहरित कर लिये गये है जिस विभाग मे शासन द्वारा भारी भरकम बजट दिया जा रहा हो उस विभाग की ऐसी दुर्दशा भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाली अधिकारियो की वजह से ही हो सकती है क्या दौरे पे आये उच्च अधिकारियो को भी ये अनियमितता दिखाई नही देती या वो भी जान बूझकर अंजान बने हुये है ?

फर्जी बिलो का लगा अंबार

जैतहरी महिला बाल विकास कार्यालय मे फर्जी बिलो का अंबार लगा हुआ है जितने बिलों का भुगतान कार्यालय के माध्यम से किया जाता है उनमे से अधिकांस बिल फर्जी तरीके से बनाये जाते है। यदि इसकी सच्चाई जाननी है तब बिल क्रमांक का अध्ययन कर देखा जाये तो ”दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा“ जिन प्रतिष्ठानो के बिल महिला बाल विकास जैतहरी के नाम लगे है उनके बिल क्रमांक और प्रतिष्ठानों द्वारा काटे गये बिल क्रमांक का मिलान किया जाये तब या तो एक ही क्रमांक के दो बिल मिल जायेगें या उनके क्रमांको का क्रम ही नही मिल पायेगा इस प्रकार स्पष्ट रुप से समझा जा सकता है कि लगे हुये बिल फर्जी है।

इनका कहना है

रीतू कोल की भर्ती के समय ही स्पष्ट कर दिया गया था कि चचाई आबाद का प्रकरण न्यायालय मे विचाराधीन है उसके द्वारा यदि राधिका यादव को प्रभार नही दिया जाता तब अनुशासनात्मक कार्यवाही की जावेगी।
सतीश जैन
महिला बाल विकास अधिकारी जैतहरी

मेरे साथ सच मे सतीश जैन द्वारा यौन उत्पीड़न किया गया था और मुझे पद से पृथक करने की साजिस रची गई थी मै केश जीतकर आ गई हूं फिर भी मुझे प्रभार नही मिलने से मै कार्य नही कर पा रही हूं।
राधिका यादव
चचाई आबाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता

मेरी भर्ती के समय यह नही बताया गया था कि भर्ती न्यायालय के आने वाले फैसले के अधीन रहेगी वर्ना मै अतिथि षिक्षक वा पंच के पद से स्थीफा देकर इस पद के लिये आवेदन नही करती पहले कुछ नही बताया गया था अब जालसाजी की जा रही है।
रीतू कोल
चचाई आबाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता

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