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हैवी ब्लास्टिंग से ग्रामीणों में दहसत, जांच में पंहुचा प्रशासनिक अमला ( आशुतोष सिंह की रिपोर्ट )

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इन्ट्रो- जिले के पुष्पराजगढ़ तहसील अंतर्गत आने वाले दूरांचल मे बसे आदिवासी बाहुल्य ग्राम बड़ी तुम्मी मे दो स्टोन क्रेसर संचालित है जिनमे पत्थर उत्खनन हेतु क्रेशर संचालकों द्वारा बारुदी धमाके किये जाते है जिससे ग्रामीणों को दहसत के साये में जीना पड़ता है वहीं बड़ी तुम्मी गांव मे प्रकृति का वरदान पानी का एक मात्र स्रोत गांव मे बना छोटा सा बांध है जिसका जल स्तर धीरे धीरे कम होने लगा है ग्रामीणों की चिंता हो रही ब्लास्टिंग से घरों की दीवारों पर आ रही दरारों से कहीं ज्यादा बांध के घट रहे जल स्तर का होना है कारण भीषण गर्मियों के दिनों मे आस पास के गांवों का यह एकमात्र जल स्रोत है। ग्रामीण परिवेश मे रहने वाले ग्रामीणों के साथ गाय बैल जैसे पालतू जानवर भी रहते है गर्मी के दिनों मे पानी की कमी का खामियाजा सवार्धिक इन पालतू जानवरों पर पड़ता है साथ ही जिस जगह ये स्टोन क्रेशर संचालित है वह वन्य क्षेत्र के निकट आते है ऐसे मे घट रहे जल स्तर वाले बांध पर वन्य प्राणी भी अपनी प्यास बुझाने निष्चित ही आते होगें।

जांच दल पंहुचा बड़ी तुम्मी

कुछ दिनों पूर्व क्रेशर मालिकों के मनमानी पूर्वक कार्य से व्यथिथ होकर दूरांचल मे बसे ग्राम बड़ीतुम्मी के साथ अन्य चार ग्राम पंचायतो के लोगो ने तहसील मुख्यालय आकर ज्ञापन के माध्यम से अपनी आपबीती पुष्पराजगढ़ तहसीलदार को सुनाई थी जिस पर प्रशासन द्वारा त्वरित संज्ञान लेते हुये जांच दल का गठन किया गया। यह जांच दल मौके मे पहुंचा और ग्रामीणों से रुबरु होते हुये चौपाल लगाकर ग्रामीणों की समस्याये सुनी। ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने बताया था कि ब्लास्टिंग से घरों की दीवारो पर दरारे आ जाती है ब्लास्टिंग के समय तेज धमाके के साथ कंपन भी होता है ये धमाके के्रसर मालिकों द्वारा आये दिन किये जाते है। जिससे गांव मे बने तालाबनुमा बांध का जल स्तर इस बार समय से पहले ही कम हो चुका है यदि सीघ्र ही इन अवैध ब्लास्टिंगों पर प्रतिबंध नही लगाया तब आने वाले दिनों मे हमें पेय जल संकट से गुजरना पडे़गा इन बिंदुओ के तहत तहसीलदार पंकज नयन तिवारी की अगुवाई मे माईनिंग इंस्पेक्टर राहुल सांडेल सहित प्रशासनिक अमला बड़ीतुम्मी जांच हेतु पहुंचा। वहां उन्होने पाया कि ग्रामीणों की अधिकांस समस्याये सही है यदि ब्लास्टिंग मे सीघ्र प्रतिबंध नही लगाया जाता तब जल स्तर और भी नीचे जा सकता है साथ ही जांच दल ने पाया कि ग्रामीणों के घरों की दीवारों मे बड़े बड़े दरारे साफ दिखाई दे रही है। जो हैवी ब्लास्टिंग की वजह से ही निर्मित हुई है।

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प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क भी हो रही क्षतिग्रस्त

बड़ीतुम्मी ग्राम मे जहां दो स्टोन क्रेशर संचालित है वहां का पहुंच मार्ग प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योंजना के तहत बनवाया गया था जिसकी भार क्षमता 9-10 टन की होेती है उन सड़को पर भारी वाहनों के माध्यम से पत्थर गिट्टी आदि लाई ले जाई जाती है जिससे दूरांचल पहुंच मार्ग समय से पूर्व ही क्षति ग्रस्त हो रही है नियमतः इन सड़को पर भारी वाहन प्रवेश निषेध रहता है फिर भी खनिज माफिया बेखौफ होकर भारी वाहनों से अधिक मुनाफा के लिये माल की ढुलाई करते है। जिससे जहां एक ओर प्रशासन के मनसूबे मे पानी फिरता है वहीं दूसरी तरफ नियम कायदे कानून की धज्जियां भी उड़ती दिखाई देती आखिर जब नियम का पालन प्रशासन द्वारा नही कराया जा रहा तब ऐसे नियमों का होना अपने आप मे बेमानी सिद्ध होती है।

ग्रामीणों को जल स्रोत बचाने की सर्वाधिक चिन्ता

वैसे तो स्टोन क्रेशर संचालन पर उड़ती डस्टों से भूमि का बंजर होना, ब्लास्टिंग के समय दहसत का माहौल, दीवारों पर दरारों का आना, ब्लास्टिंग से असमय पत्थरों का उड़ना, सिंगल मार्ग पर भारी वाहनो के प्रवेश से दुर्घटनाओं का भय, चलते स्टोन क्रेशर से शोरगुल आदि की समस्या बनी रहती है किन्तु ग्रामीणों को सर्वाधिक चिन्ता अपने जल स्रोत मे घटते जल स्तर का है। यह तालाब रुपी बांध आस पास के ग्रामीणों के लिये किसी वरदान से कम नही है जिसकी दूरी स्टोन क्रेशर से महज 200 मी. है वैसे तो नियमतः किसी भी स्टोन क्रेसर को प्राकृतिक जल स्रोत वन्य भूमि आदि से 300 मी. अन्दर लगाने की अनुमति ही नही दी जाती फिर भी यहां स्टोन क्रेशर और बांध के बीच 200 मी. दूरी के होने का कारण अलग है चूंकि स्टोन क्रेशर विगत कई वर्षो से उक्त स्थान पर संचालित है वहीं बांध महज दो वर्ष पूर्व ही निर्मित कराया गया है शासन प्रशासन को इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेते हुये कार्यवाही करने की आवस्यकता है। ताकि ग्रामीणों के जीवन मे वरदान की तरह आये इस बांध का अस्तित्व को बचाया जा सके।

जांच दल ने पाया

जिले के पुष्पराजगढ़ तहसील के दूरांचल मे बसे ग्राम बड़ी तुम्मी मे क्रेशर संचालको द्वारा ब्लास्टिंग कर पत्थरो का उत्खनन किया जाता है। जिससे ग्रामीणों मे असंतोश व्याप्त है सामूहिक रुप से सौपे गये ज्ञापन के बाद ग्राम वासियों के समक्ष जांच दल पहुंचा और शिकायत की हर बिंदुओ पर बारीकी से जांच की गई जिसमे पाया गया कि गांव मे तीन घर जिनकी कच्ची दीवारों पर बड़ी बड़ी दरारे साफ दिखाई दे रही है वहां स्थित बांध जिससे अन्य ग्रामों के रहवासी पशु पक्षी वा अन्य प्राणियों का पेय जल स्रोत जिसके जल स्तर घटने की जांच दल द्वारा पुष्टि की गई है जांच दल ने पाया कि क्रेशरों से ओव्हर लोड डम्फरों की वजह से प्रधानमंत्री सड़क भी बहुतायात मात्रा मे क्षति ग्रस्त हो रही है।

 

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