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टूटे फूटे माकान मे रहने को मजबूर ”ईमानदारी” (आशुतोष सिंह की रिपोर्ट )

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पुष्पराजगढ़:-

लचर प्रशासनिक व्यवस्था का शिकार हुआ पीडब्ल्यूडी इंजीनियर एलएन सुनपुरिया

इन्ट्रो- निहायत ईमानदार इंजीनियर एलएन सुनपुरिया जिसके ईमानदारी की कसमे वे सभी खा सकते है जो सुनपुरिया इंजीनियर को जानते है। अपनी इमानदारी और विभागीय षड़यंत्र की मार झेल रहे इस इंजीनियर को 2004 मे रिटायरमेंट के बाद आज तक पेंसन नही मिल सका आज भी झोपड़ पट्टे के टूटे फूटे मकान पर रहने को मजबूर है। ईमानदारी की पराकाष्ठा इतनी कि अपने बच्चों से भी एक रुपये तक की मदद लेने से इंकार कर देते है।

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क्या है मामला

इंजीनियर होने का लोग सीधा मतलब निकालते है चमक धमक भरी जिंदगी, मोटर कार, आलीशान बंगला और खुसहाल जिंदगी किन्तु एलएन सुनपुरिया जो लोक निर्माण विभाग के राष्ट्रीय राज्य मार्ग मेे बी एण्ड आर साखा पर पदस्थ रहे। सारी जिंदगी ईमानदारी से विभाग को सेवा देने का प्रयास करते रहे उनके साथ ऐसा कुछ भी नही है। 1972 से इन्होने विभाग को सेवा देना सुरु किया म.प्र. के खुरई पाॅलिटेकनिक से सिविल मे इंजीनीरिंग कर राजनंद गांव मे पहली पोस्टिंग हुई। यहां से कर्तव्यपरायणता के साथ जिंदगी की नई सुरुआत एलएन सुनपुरिया ने ईमानदारी के साथ की, लेकिन भ्रष्ट हो चुका प्रशासनिक तंत्र एक ईमानदार व्यक्ति को आसानी से बरदास्त नही कर पा रहा था। कारण साफ था कि इनकी जहां पदस्थापना होती वहां कमीसन का खेल बन्द हो जाता और यही बात विभाग के आला अफसरों को नागवार गुजरी सर्विस के दौरान इन्होने अकेले ही भ्रष्ट तंत्र से अपनी छमता अनुसार लड़ाई जारी रखी। सुनपुरिया इंजीनियर ईमानदारी के पथ पर चलता रहा और कई भ्रष्ट अधिकारियों कर्मचारियों को सही मार्ग पर लाने की कोशिस करता रहा वर्ष 2004 मे शहडोल जिले से रिटायरमेन्ट के समय बी एण्ड आर विभाग के पूर्व अधिकारी सीएस सोनी ने साजिस कर इन्हे अनुपस्थित होना बताया जबकि बीएण्ड आर के ही अधिकारी व्ही. के. श्रीवास्तव के आदेश पर सुनपुरिया ऑफिस कार्यालय मे अपनी सेवा दे रहे थे। सुनपुरिया को नही पता था कि उनके विभाग के ही अधिकारी विस्वास मे लेकर साजिस रच रहे थे और आखिर ईमानदारी साजिस का शिकार हो गई और उपहार स्वरुप 2004 मे सेवा से निर्वित्त होकर आज तक सिर्फ गुजारा भत्ता के रुप मे मिला। पेंसन का प्रकरण आज भी फाईलों के माध्यम से विभाग के आलमारियों मे धूल खा रहा है जिसको देखने वाला कोई नही लगातार भ्रष्ट तंत्र से लड़ते लड़ते इनकी मानसिक हालत अब बिगड़ने लगी है। म.प्र. का विभाजन हुआ सरकारे आई सरकारे बदली सत्ता परिवर्तन हुआ किन्तु न्याय की आस लगाये बैठे इस ईमानदार इंजीनियर की सुध ना तो शासन ने ली और ना ही इनके विभागीय प्रशासन ने।

कौन है एलएन सुनपुरिया ?

बुदेलखण्ड मे आने वाले सागर जिले की रहली तहसील के एक छोटे से गांव मे सन् 05.06 1944 मे अत्यन्त गरीब परिवार मे जन्मे एलएन सुनपुरिया की जिंदगी का सफर आसान ना था सरकारी स्कूल मे पढ़ने के बाद एक कार्यक्रम के दौरान जज एनएस चौहान से सुनपुरिया की मुलाकात हुई। जहां सुनपुरिया के ईमानदारी से प्रभावित होकर न्यायालय के जज एनएस चौहान ने सुनपुरिया के पढ़ाई आगे जारी रखने का जिम्मा उठाया और अपने निवास मे रखकर सुनपुरिया की पढ़ाई लिखाई करवाई। खुरई पाॅलिटेकनिक के अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कर 1972 मे एक ईमानदार वा काबिल इंजीनियर एलएन सुनपुरिया के रुप मे देश को मिला और इसी वर्ष राजनंद गांव मे इंजीनियर के रुप मे पहली पदस्थापना एलएन सुनपुरिया को मिली। गरीब परिवार मे जन्मे एलएन सुनपुरिया के तीन बच्चे है बेहद कठिन ईमानदारी के इस सफर मे इन्होने अपने तीनो बच्चो को पढ़ाया लिखाया और काबिल इंसान बनाया आज तीनो अलग अलग जगह अच्छी पोस्टो मे रहकर अपना जीवन यापन कर रहे है। अपनी पत्नी राजरानी के अलावा किसी से भी मदद ना लेने वाले सुनपुरिया अपने बच्चों की कमाई का एक दाना भी नही लेते और आज भी अपने टूटे हुये झोपड़ीनुमा माकान मे रहते है। मानसिक दशा धीरे धीरे बिगड़ती गई और अब नगर मे आवारा पशुओ के गोबर बीनना और उन गोबरो से उपले बनाकर बेंचना इनकी दिनचर्या मे शामिल हो चुका है सुनपुरिया जिस जगह निवास करते है उस पूरे मोहल्ले की सफाई हर रोज प्रातः काल उठकर वर्षो से करते आ रहे है। इन्हे जानने वाले इनकी मदद तो करना चाहते है पर किसी की भी मदद नही लेते आवस्यकता पड़ने पर उधार स्वरुप लिये गये पैसों का निपटान पैसे आते ही तुरंत कर देते है।

…….क्या मिलेगा न्याय ?

पीड़ित इंजीनियर सुनपुरिया ने रिटायरमेंट वर्ष 2004 के बाद विभाग से लेकर तात्कालीन म.प्र. के मुखिया पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कमिसनर कलेक्टर विभागीय आला अधिकारी को लगातार पत्रों के माध्यम से न्याय की गुहार लगाई किन्तु भ्रष्ट तंत्र ने ग्रहण मान लिये इस इंजीनियर को न्याय देने सेे आज तक वंचित रखा। पेंसन जैसा संवेदनसील मुद्दा होने पर भी जवाबदार के कानों मे जूं तक ना रेंगी। एक बार पुनः म.प्र. मे नई सरकार आई है तो क्या इस ईमानदार इंजीनियर को न्याय मिल सकेगा ? हर तरीके से उम्मीद खो चुके मानसिक कुटाराघात और बेबसी मे जीने वाले ईमानदार इंजीनियर एलएन सुनपुरिया आखिर कब तक ऐसे ही प्रताड़ित होते रहेंगे ? यह दास्तां केवल एलएन सुनपुरिया की नही है यह दास्ता ईमानदारी का राग अलापने वाले भ्रष्ट तंत्र के हर उन ईमानदारों की है जो सच मे ईमानदार है।

इनका कहना है

यह मामला मेरे संज्ञान मे नही आया था यदि मुझे आवेदन के साथ दस्तावेज उपलब्ध कराये जाते है तो निश्चित रुप से एलएन सुनपुरिया के पेंसन प्रकरण को हल करवाने का भरसक प्रयास करुंगा।
विधायक फुन्देलाल सिंह मार्को पुष्पराजगढ़

चूंकि यह प्रकरण काफी पुराना है पर विभागीय कर्मचारियों से पूंछे जाने पर पता चला कि एलएन सुनपुरिया पीडब्ल्यूडी विभाग मे पदस्थ रहे है मुझसे जो भी मदद हो सकेगी अवश्य करुंगा।
एसडीओ पीडब्लूडी पुष्पराजगढ़
पंकज कुमार

चाहे जैसे भी है ईमानदार है इसी लिये मै हमेसा इनके साथ देती आई हूं आगे भी चाहे जो हो अपने ईमानदार पति के साथ ही रहूंगी पेंसन का पैसा यदि मिल जाता तो हम भी अपना मकान बनवा लेते।
राजरानी सुनपुरिया
पत्नी एलएन सुनपुरिया

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