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पर्यटन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश का सिरमौर- प्रो. अतुल पांडेय ( स्वाति वर्मा की रिपोर्ट )

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यूरोप, श्रीलंका सहित देशभर से 22 विषेशज्ञ कार्यशाला में हुए शामिल, 90 से अधिक शोध पत्र हुए शामिल

जनजातीय विश्वविद्यालय के अद्वितीय विकास के लिए निश्चित ही कुलपति महोदय ने विशेष प्रयास किए हैं। पिछले पांच वर्षों में यूनिवर्सिटी ने तीव्र गति से विकास किया है। हमें उम्मीद है कि जल्द ही देश में इस यूनिवर्सिटी का उच्च स्थान होगा। यह बात पुष्पराजगढ़ के विधायक फुंदेलाल सिंह मार्कों ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय में “इंडीजिनस एंड रिलिजस टूरिज्म इन साउथ एंड ईस्ट एशिया ओपर्चुनिटी एंड चैलेंजेस” विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला के समापन सत्र पर कही। क्षेत्रीय विधायक फुन्देलाल सिंह मार्को ने कहा कि जनजातीय विश्वविद्यालय आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि कुलपति ने इस विश्वविद्यालय को शिक्षा, खेल, समाज-संस्कृति और चहुंमुखी विकास के साथ नए आयाम तक पहुंचाया है। इसके पूर्व स्वागत भाषण देते हुए सेमीनार के समन्वयक डाॅ. आशीष माथुर ने यूरोप से आए अतिथियों सहित अतिथिजनों का स्वागत किया।

तीन दिवसीय कार्यशाला का आज समापन समारोह

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तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का समापन 13 जनवरी की शाम प्रशासनिक भवन के आडिटोरियम में समारोह के साथ हुआ। समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में एपीएसयू रीवा के प्रो. अतुल पांडेय मौजूद रहे, वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता जनजातीय विश्वविद्यालय के कुलपति कुलपति प्रो. टीवी कट्टीमनी रहे। इस दौरान विशिस्ट अतिथि के रूप में यूरोपीय देश लातविया की विड्जम यूनिवर्सिटी की प्रो. अगीता लिविना, जनजातीय विश्वविद्यालय के कामर्स विभाग के अधिष्ठाता प्रो. अजय वाघ, फार्मेसी विभाग के अधिष्ठाता प्रो. एचएनएसएन मूर्ति, रजिस्ट्रार पी. सिलुवैनाथन, फाइनेंस अधिकारी ऐ. जेना, परीक्षा नियंत्रक प्रो. बसवराज पी. डोनूर, टूरिज्म विभाग प्रमुख डाॅ. जितेंद्र मोहन मिश्रा और सेमीनार समन्वयक डाॅ. आशीष माथुर मौजूद रहे। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा के बिजनेस मैनेजमेंट विभाग प्रमुख मुख्य अतिथि प्रो. अतुल पांडेय ने कहा कि इस विश्वविद्यालय में मैं जब पहले आया था तो यह टिन शेड में संचालित एक विश्वविद्यालय था लेकिन जिस तीव्र गति से विश्वविद्यालय का विकास हुआ है इसका पूरा श्रेय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टी. वी. कटटीमनी को जाता है।

पर्यटन की नजर से

अमरकंटक तीर्थ पर्यटन के साथ अब जनजातीय विश्वविद्यालय के नाम से पहचाना जाता है। प्रो. पांडेय ने कहा कि मध्यप्रदेश पर्यटन के मामले में बेहद धनी है और पिछले तीन वर्षों से लगातार पर्यटन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को पुरस्कार प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश भारत में पर्यटन के सिरमौर के रूप में पहचान स्थापित करेगा। उन्होंने मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों पर चर्चा करते हुए उनकी विशेषताओं को विस्तार से बताया। प्रो. पांडेय ने कहा कि मध्यप्रदेश स्वदेशी और धार्मिक, ऐतिहासिक पर्यटन के साथ प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण मध्यप्रदेश पर्यटन के क्षेत्र में तीव्र गति से बढ़ रहा है। उन्होंने तकनीकि के जरिए पर्यटन क्षेत्र में होते विकास पर चर्चा की और विस्तार से जानकारी दी। प्रो. पांडेय ने स्वदेशी पर्यटन की स्वच्छता, समस्या पर भी चर्चा की और निदान पर सुझाव दिए।

अतिथि प्रोफेसरों के व्याख्यान

प्रो. अगीता लिवीना ने कहा कि पर्यटन को मुख्यतः दो चीजें प्रभावित कर रही हैं। एक तो सांस्कृतिक और स्वदेशी पर्यटन में बढ़ती व्यवसायिकता और दूसरा पर्यटन के बदलते प्रकार और प्रवृत्तियां हैं। उन्होंने कहा कि व्यवसायिकता का पर्यटन का दोनों ही प्रकार का असर पड़ता है। जहां इसका नुकसान लोगों को व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा के रूप में होता है तो पर्यटन के नए अवसर और जानकारियों का लाभ भी प्राप्त होता हैै। इसी प्रकार पर्यटन को लेकर लोगों के अनुसार बढ़ते प्रकार भी पर्यटन की प्रवृत्तियों पर असर डालते हैं। यूरोपिय देश लातविया से आईं प्रो. लिवीना ने बताया कि पर्यटन के प्रति लोगों की बढ़ती इच्छा शक्ति ने इसे विश्व के सबसे बड़े लाभकारी व्यवसायों में शामिल कर दिया है। डीन प्रो. एचएनएसएन मूर्ति, डीन अजय वाघ, कुलसचिव पी. सिलुवैनाथन, फाइनेंस अधिकारी ऐ. जेना, परीक्षा नियंत्रक बसवराज पी. डोनूर, टूरिज्म विभाग प्रमुख डाॅ. जितेंद्र मोहन मिश्रा ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान आभार प्रदर्शन डाॅ. रघु ने किया। डाॅ. अनुश्री ने तीन दिवसीय सेमीनार की रूप रेखा की संक्षिप्त जानकारी दी। डाॅ. अनुश्री ने बताया कि पिछले तीन दिनों में 90 शोधार्थी छात्रों ने अपने शोध पत्रों को प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन सहायक मैनेजमेंट विभाग के प्राध्यापक डाॅ. राहिल युसुफ जई ने किया।

कुलपति का उद्बोधन

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में जनजातीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टी. वी. कटटीमनी ने देश-विदेश से आए शोधार्थी छात्र-छात्राओं का स्वागत किया। उन्होने तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला के सफलतापूर्वक क्रियान्वयन और संचालन के लिए समन्वयक डाॅ. आशीष माथुर और संचालन समिति को बधाई दी।

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