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लगातार अवैध खदानों मे हो रही मौतें खनिज विभाग बना रहता है उदासीन ( आशुतोष सिंह की रिपोर्ट )

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विगत कुछ माहों मे अवैध खदान धसकने या अन्य कारणों से जिले मे कई मौते हो चुकी है। खनिज विभाग आंख मूंदे इन खदानों के पास से गुजर जाता है और तब तक उसे कुछ दिखाई नही देता जब तक हादसे मे किसी की जान ना चली जाये। फिर पुलिस और खनिज विभाग द्वारा जांच, पंचनामा, कार्यवाही की बात कही जाती है। इन सब के बीच पेट की आग बुझााने के चक्कर मे ग्रामीण मजदूर अपनी जिंदगी से हाथ धो बैठता है महज सौ दो सौ की मजदूरी देकर खनिज माफिया जहां अधिकारियों की सय पर मालामाल हो रहे है। वहीं इन खदानों मे मौत का सिलसिला बेदस्तूर जारी है।

जिले मे कोयला, बाक्साइड, पत्थर, मुरुम, रेत जैसी संपदा की भरमार है। कोतमा क्षेत्र मे जहां कोयला पाया जाता है वहीं अनूपपुर कोतमा मे रेत की कई खदाने संचालित है। जिले के सबसे बड़े 119 पंचायत वाली जनपद पुष्पराजगढ़ मे पत्थर और मुरुम की अनगिनत अवैध खदाने संचालित है। इन खदानों से अवैध कारोबारी प्रशासन से गठजोड़ कर मजदूरों का शोषण करते हुये अपने गोरख धंधे को अंजाम दे रहे है। प्रशासन और अवैध करोबारी की गठजोड़ से जहां दोनो मालामाल हो रहे है वहीं ग्रामीण मजदूर इन संचालित अवैध खदानों मे अपनी जान गंवा रहे है।

राॅक ब्रेकर लगे पोकलेन से होती है खुदाई

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पुष्पराजगढ़ मे खनन माफिया इतने बेखौफ है कि पोकलेन मशीन मे राॅक ब्रेकर लगाकर खुदाई करते है यह बात समझ के परे है कि खनिज विभाग को इन अवैध खदानों के संचालन की जानकारी आखिर कैसे नही लगती ? प्रायः देखा गया है कि जब खनिज विभाग को हो रहे अवैध उत्खनन की जानकारी दी जाती है तब ठीक उसी समय दी गई जानकारी खनिज माफिया तक पहुंच जाती है ऐसे मे खनिज विभाग की कार्यप्रणाली मे प्रश्न चिन्ह खड़ा होता है। बात यहीं खत्म नही होती यदि मजबूरन खनिज विभाग इन अवैध खदानों मे कार्यवाही के लिये जाता भी है तब पहले ही खनिज माफिया अपनी खदानों से सभी प्रकार की मशीने हटा चुके होते है ऐसे मे किसी पर कार्यवाही करने की बात ही नही उठती दूसरे दिन फिर वहीं राॅक ब्रेकर वाले पोकलेन से इन अवैध खदानों मे खुदाई कार्य शुरू हो जाता है।

आये दिन होते है बारुदी धमाके

जिले के पाठे कहे जाने वाली इस जनपद मे ब्लैक स्टोन की भरमार है ये पत्थर स्टोन क्रेसर मे खपाये जाने के लिये सर्वयुक्त माने जाते है यही कारण है कि यहां तीन दर्जन से ज्यादा स्टोन क्रेसर संचालित है। इन क्रेशर मालिको द्वारा ग्रामीण किसानों से उनकी ही जमीन पर मजदूरी कराई जाती है और अवैध खदानों से पत्थर निकालने के लिये कभी भी बारुदी धमाके भी कर लिये जाते है धमाकों से आस पास के मकानों मे क्षति पहुंचती है वहीं धमाके के समय हवा मे उछल रहे पत्थरों से ग्रामीणों के जान माल का खतरा भी बना रहता है नियमतः जिले मे ऐसे बारुदी धमाके की प्रशासन से स्वीकृती नही है फिर भी गठजोड़ के दम पर क्षेत्र मे बारुदी धमाके होना आम बात मानी जाती है।

खदान से पोकलेन निकलने की खनिज विभाग को पत्रकारों ने दी थी सूचना

ग्राम लपटी मे अवैध खदान धसकने और उसमे ग्रामीण सकुंतला की मौत के दूसरे दिन पत्रकारों द्वारा खनिज विभाग को राॅक ब्रेकर वाली पोकलेन मशीन को अवैध खदान से अन्यत्र ले जाने की सूचना दी गई थी किन्तु विभागीय सुस्त रवैया का फायदा उठाकर ये मशीने छ.ग. की सीमा मे पहुंचा दी गई जब खनिज अधिकारी इन मशीनो तक पहुंचे तब दूसरे राज्य का मामला बताकर कार्यवाही करने से अधिकारियों द्वारा इंकार कर दिया गया। यह बात समझ के परे है कि ट्रक, ट्राला आदि से जिन मशीनो का परिवहन किया जाता है वे मशीने सड़को पर आखिर अचानक क्यों दौड़ने लगी ?

इनका कहना है

चूंकि मशीने छ.ग. सीमा मे प्रवेश कर गई थी ऐसे मे यह अंतर्राज्यीय मामला बनता है मेरे द्वारा कार्यवाही नही की जा सकती थी।
खनिज इंस्पेक्टर
सुरेन्द्र पाटले

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