# मुख्यमंत्री सीएम शिवराज सिंह का हुआ आगमन ##

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गृह जिले में पदस्थापना के बाद भी नहीं हटाये गये सोनवानी ( आशुतोष सिंह की रिपोर्ट )

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परिवहन अधिकारी के सामने बौना हुआ चुनाव आयोग

परिवहन विभाग पर सुनील नामक दलाल का कब्जा

परिवहन विभाग इन दिनों लूट का अड्डा बना हुआ है, अमरकंटक से लेकर राजनगर तक के लोग रोजाना आरटीओ दफ्तर पहुंचते हैं, जहां पर पहले से तैनात सुनील नामक दलाल उन्हें हलाल करने के लिए तैयार रहता हैं। इस दलाल का पूरा मैनेजमेंट स्थानीय कर्मचारियों और अधिकारियों से है, अगर आपने दलाल को नहीं पकड़ा तो कई किलोमीटर आपको बैरंग ही लौटना पड़ सकता हैं, वाहन मालिक दलाल के चक्कर में फंस जाता है और शुरू होती इनकी सौदेबाजी। 100 रूपये के काम को हजारों रूपये में करवाने का ठेका ले लेता हैं और पूरी राशि आपस में बंदर बांट कर ली जाती है, आदिवासी जिला होने के चलते अधिकांश लोगों को ऑनलाईन सेवा की जानकारी यह दलाल जमकर उठा रहा हैं।

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मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सहित जिला निर्वाचन अधिकारी अनूपपुर जिले में बौने साबित होते नजर आ रहे हैं, एक ओर जहां विधानसभा चुनाव खत्म हो गये और लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो गई है, चुनाव आयोग ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) को तीन साल से एक स्थान या गृह जिले में पदस्थ अधिकारियों को हटाने के निर्देश दिए हैं। सभी विभागों को 28 फरवरी तक का समय दिया गया है। इसी प्रकार का समय विधानसभा चुनाव में यही आदेष दिये गये थे, लेकिन जिला परिवहन अधिकारी पर इस आदेश का लागू न होना इस बात को प्रमाणित करता है कि उनके सामने यह सब आदेश किसी काम के नहीं, सूत्रों की माने तो जिला परिवहन अधिकारी एल.आर.सोनवानी अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ विधानसभा क्षेत्र के निवासी है, लेकिन मैनेजमेंट में माहिर सोनवानी को यहां से हटाने में चुनाव आयोग का कोई भी फरमान काम नहीं करता।

चाटुकार और दलालों की इंट्री

परिवहन कार्यालय इन दिनों पूरी तरह से दलालों की गिरफ्त में है, अधिकारियों व कर्मचारियों से ज्यादा दलालों व उनके ग्राहकों की कार्यालयों में घुसपैठ है। आमजन को नियमों का पाठ रटाया जाता है, लेकिन दलाल नियमों को ताक में रखकर चंद दिनों में मनमाने काम करवा लाते हैं। यही कारण है कि अवधि पार कर चुकी खटारा गाडियां नए कागजों से सड़कों पर दौड़ती नजर आ रही हैं। इसका खामियाजा आमजन को उठाना पड़ रहा है। परिवहन अधिकारी एल.आर. सोनवानी की पदस्थापना के बाद से दलालों ने आरटीओ कार्यालय को अपना घर कर लिया है। विभाग के कायदों को ताक पर रखते हुए सारे काम कार्यालय से किये जा रहे हैं, जहां पर सिर्फ चंद दलालों और चाटुकार बस मालिकों को ही इंट्री मिलती है।

खाली हाथ से महल तक

परिवहन कार्यालय में खाली हाथ आये सुनील नामक व्यक्ति साहब का मैनेजमेंट का काम देखता है, सूत्रों की माने तो सुनील खाली हाथ जिले में आया था, लेकिन आज सुनील ने दलाली के चलते अकूत संपत्ति अर्जित की, सुनील ने इस कदर परिवहन विभाग से मलाई लूटी की आज वह 6-7 बड़े वाहनों का मालिक है, आयकर विभाग अगर उक्त व्यक्ति पर भी हाथ डाले तो इसके पास भी कई चैकाने वाले खुलासे हो सकते हैं, लोगों का कहना है कि सुनील का परिवहन विभाग में इस कदर दखल है कि उसकी अनुमति के बिना कोई भी कागज पर साहब के दस्तखत पाना दूर की कौड़ी के समान है। इसी वजह से उक्त दलाल ने पुराने कार्यालय के पास अपना सर्वसुविधा युक्त आलिशान मकान भी तान रखा है।

ऐसे होती है वसूली

सूत्रों की माने तो अधिकारी ने दलालों और बाबुओं के माध्यम से हर एक काम के लिए रेट फिक्स कर रखा है, अगर आपको लायसेंस बनवाना है तो फीस के अलावा 250 रूपये, बरात का परमिट चाहिए तो 300 रूपये, मासिक टीपी का 600 रूपये, नये परमिट का 10 हजार रूपये, वाहनों के ट्रांसर्फर का 3000 रूपये जिसमें बड़े वाहनों शामिल रहते हैं, इसके अलावा छोटे वाहनों का 200 रूपये, फिटनेस का 1000 रूपये और परमिट का 3000 रूपये, बड़े वाहनों के पंजीयन का 3000 रूपये, छोटे वाहनों के पंजीयन का 200 रूपये, स्थाई परमिट जारी करने के लिए 25 से 30 हजार रूपये वसूल किये जा रहे हैं।

होनी चाहिए संपत्ति की जांच

सूत्रों की माने तो साहब अनूपपुर जिले के निवासी हैं, विभाग की कृपा से गृह जिले में अधिकारी तो बनकर बैठे ही हैं, पुष्पराजगढ़ अंचल में कई एकड़ जमीन, आलीशान हवेली, अनूपपुर और शहडोल में भी मकान भी किराये पर चल रहा है, लोगों का कहना है कि इनकी कई बसों में भी हिस्सेदारी है, अगर इनकी संपत्ति की जांच लोकायुक्त और आर्थिक अपराध शाखा से कराई जाये तो यह भी मध्यप्रदेश के कई अधिकारियों की तरह धनकुबेर निकलेंगे। सूत्रों का कहना है कि परिवहन अधिकारी के परिवार सहित रिष्तेदारों की भी अगर संपत्ति की जांच की जाये तो आय से अधिक संपत्ति के मामले में उन्हें जेल की हवा खाने से कोई नहीं रोक सकता।

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