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गेंड़ीआमा पंचायत मे खुलेआम हुआ भ्रष्टाचार आयकर विभाग सहित जिले के अधिकारी मौन(आशुतोष सिंह की रिपोर्ट)

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          गंगाराम बंजारा, धेना नायक द्वारा पंचायत में लगाये गये बिलों की हो जांच

इन्ट्रो- जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गेंड़ीआमा में निर्माण कार्यों के नाम पर फर्जी बिल वाउचर लगाकर लाखों रुपए का भुगतान करने का मामला सामने आया है। पंचायत के द्वारा हुए भुगतान की अगर बारीकी से जांच की जाए तब यह घोटाला करोड़ों रुपए के आसपास हो सकता है। मामले की अगर निष्पक्ष जांच कराई जाये तो कई सफेद पोस बेनकाब हो सकते है पिछले वर्ष जनपद पंचायत मुख्यालय के ग्राम पंचायत किरगी के तात्कालीन सचिव को इसी प्रकार क्षेत्र में हुए भ्रष्टाचार के लिए सेवा से पृथक किया गया था, लेकिन ग्राम पंचायत गेंड़ीआमा में सचिव, सरपंच और वेण्डरों की अगर जनपद सहित आयकर विभाग जांच कर ले तब एक बड़ा भ्रष्टाचार सामने आ सकता है।

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अनूपपुर।

जिले में मनरेगा योजना के कार्यो का पता नही चल रहा है तथा सरपंच सचिव यह कहते हुए घूम रहे है कि कोई भी कार्य राशि के आभाव में नही चल पा रहा है, लेकिन आनलाइन साइड देखी जाये तो जिले की पुष्पराजगढ़ जनपद के गेंड़ीआमा पंचायत में लाखों रूपये तक की राशि मटेरियल तथा मजदूरी के नाम पर वर्ष 2010 से 2017 में खर्च की जा चुकी है, सूत्र बताते हैं कि गेंड़ीआमा पंचायत में जो बिल बाऊचर मटेरियल के लगे है जैसे पत्थर, मुरूम, गिट्टी, सीमेंट, छड़, रोलर तथा अन्य सामग्री वे अधिकांश बिल बाऊचर फर्जी है, क्योंकि जो बिल आनलाइन दिखाये जा रहे है उक्त नाम की फर्मे तथा दुकाने ही नही है, अगर उक्त दुकाने हैं भी तो इन्होंने पंचायतों में लाखों की सामग्री सप्लाई तो की है लेकिन शासन को मिलने वाले जीएसटी के नाम राजस्व की जमकर चोरी भी की गई है गंगाराम बंजारा, धेना नायक, नजर हुसैन, महेन्द्र ट्रेडर्स जैसी फर्मो ने इतनी सामग्री सप्लाई की है, लेकिन शासन को राजस्व के नाम पर एक धेला भी नहीं दिया।

फर्म का नहीं अस्तित्व

सूत्रों की माने तो मुरूम, पत्थर, बालू आदि के सप्लायर या तो खदान संचालक होना चाहिये या फिर डम्प की स्वीकृति खनिज विभाग से होना चाहिये। स्वीकृत खदानो या डम्प संचालन करने वालो के नाम उक्त बिल बाऊचर नही है और ना ही सप्लाई करने वाले फर्म उक्त नामो से है। इस प्रकार का फजीवाड़ा कर गेंड़ीआमा पंचायत में लाखों रूपये का घोटाला किया गया है। उक्त घोटाला में सरपंच-सचिव उपयंत्री तथा संबंधित जनपद पंचायत के अधिकारी शामिल हो सकते है।

जांच में खुल सकते हैं राज

जिले की पुष्पराजगढ जनपद पंचायत में सबसे अधिक गेंड़ीआमा पंचायत में फर्जीवाड़ा सामने आया है, गेंड़ीआमा पंचायत में जो राशि खर्च करना दर्शाया गया है, उसके उपयंत्री की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सूत्रों की माने तो ग्राम पंचायत मे जो राशि खर्च की गई यदि उसकी बारीकी से जांच कराई जाये तब अधिकांश बिल बाऊचर संबंधित सरपंच, सचिव या उपयंत्री द्वारा फर्जी फर्मो के नाम से लगाकर आहरित किये गये है।

राशि निकालने के लिए फर्मों का उपयोग

जनपद पंचायत पुष्पराजढ़ के गेंड़ीआमा पंचायत में कैसे पंचायत राशि को हड़प किया जाये, इसके लिए सचिव, सरपंच सहित रोजगार सहायक ने वेण्डरों से मिली भगत कर जमकर शासकीय राशि की होली खेली है, सूत्रों की माने तो इसके लिए बकायदा फर्जी फर्मों के नाम पर रजिस्ट्रेशन करा पंचायतों से राशि आहरित की गई, पंचायत कर्मियों ने निर्माण अपने अनुसार कराया और उसका भुगतान भी अपने अनुसार कर लिया। इसमें फर्जी फर्मों का जीएसटी सहित अन्य खर्चे भी दिये गये है जिसमें उन्होंने अपनी फर्मांे के बिल बनाकर उन्हें दिये, हकीकत में ये फर्में जमीनी स्तर पर है ही नहीं, इसलिए इन्हें सिर्फ पंचायतों ने अपनी राशि आहरित करने के लिए इस्तेमाल करती है।

इन फर्मो ने लगाया चूना

इन दिनों पुष्पराजगढ़ जनपद अपने क्षेत्र में हुए भ्रष्टाचार के लिए जिले समेत संभाग में मषहूर है, जनपद पंचायत में जिन पंचायतों को विकास कार्य के लिए राशि आवंटित की गई उसमें सरपंच, सचिव ने मिलकर पहले फर्जी वेण्डर बनवाये और फिर जमकर पंचायतों से मलाई लूटी, गेंड़ीआमा पंचायत में लगे बिलो में अगर गंगाराम बंजारा, धेना नायक, नजर हुसैन, महेन्द्र ट्रेडर्स जैसी फर्मांे ने पंचायत में बगैर जीएसटी लाखों की सप्लाई की, अगर उक्त फर्मों की जनपद, जिले सहित आयकर विभाग के अधिकारी जांच करे तो शासन को मिलने वाले कर सहित एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आ सकता है। ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि पंचायत में लगे बिलों की जांच कराकर दोषीजनों पर कार्यवाही की जाये।

इनका कहना है

ये लगाये गये बिल मेरे इस पंचायत मे स्थानान्तरण के पूर्व के है इन बिलों के विषय मे पूर्व सचिव ही बता सकते है मेरी पदस्थापना के बाद ऐसे बिलोें को नही लगाया गया है।
लवकेष चैकसे
सचिव ग्राम पंचायत गेंड़िआमा

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