# मुख्यमंत्री सीएम शिवराज सिंह का हुआ आगमन ##

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भू माफिया पर कार्यवाही करना रेंजर को पड़ा भारी ( आशुतोष सिंह की रिपोर्ट )

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8 मार्च को मिला प्रभार 9 मार्च को हुआ स्थानान्तरण

प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भी छुटभैया नेताओं का रौब बदलने का नाम नहीं ले रहा है। क्या सत्ता क्या विपक्ष इन सफेद पोश नेताओं और कुछ भ्रष्ट प्रसासनिक अमले की मिली भगत से कोतमा विधानसभा क्षेत्र में अवैध उत्खनन परिवहन का कारोबार फल-फूल रहा है। इससे जहां एक ओर राजस्व एवं वन भूमि से प्राप्त होने वाले राजस्व का सरकार को लाखों रुपये का चूना प्रतिदिन माफियाओं का गठजोड़ लगा रहा है वहीं ये अवैध कारोबारी दिन दूनी रात चैगनी कमाई कर कानून को पैसों के दम पर ठेंगा दिखा रहे है। रही सही कसर जननायक बनने की दिखावटी छवि लिये नये नवेले नेता पूरी कर रहे है। उसी का उदाहरण वन परिक्षेत्राधिकारी दीपंकर के स्थानांतरण के रूप में जिले को देखने को मिला है। यही गठजोड़ अवैध कारोबार खुलेआम करवा रहा है। जब भी कोई ईमानदार प्रशासनिक अधिकारी लगाम लगाने की कोशिश करता है, तब ये भू माफिया सत्ताधारी नेता से अपने दिये गये चंदे का हिसाब मांगते हुये अपने अवैध कारोबार का संरक्षण चाहते है। कार्यवाही के दौरान अवैध करोबार मे लिप्त वाहन आदि को छुड़वाने का दबाव भी नेताओं पर चंदे के एवज मे बनाते हैं। इधर ईमानदार अधिकारी जब अवैध कारोबार से जब्त किये वाहनों को नहीं छोड़ता तब उक्त अधिकारी का स्थान्तरण कराने ये कथाकथित देश भक्ती का चोला पहनने वाले नेता भोपाल में डेरा डाल स्थान्तरण आदेश लेकर ही वापस आते हैं। कारण साफ है भू माफिया अपने चंदे का हिसाब तो माँगेगा और नेता को आगामी चुनाव में भी इनसे चंदा भी चाहिए।

कोतमा वन परिक्षेत्राधिकारी ने अवैध परिवहन पर की थी कार्यवाही

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वन परिक्षेत्र कोतमा अंतर्गत आनेवाली केवई नदी के जमड़ी घाट मे दिनांक 21 फरवरी 2019 को आरएफ नं 292 पोकलेन मशीन व सीजी 16-सीएच 9876 ट्रक पर जप्ती करते हुये पीओआर नं 45,49, 14 के तहत मामला दर्ज कर राजसात की कार्यवाही के लिये अग्रसर किया वनपरिक्षेत्राधिकारी दिपांकर की अवैध कारोबारी जो नेताओं को भारी भरकम चंदा रुपी रकम देते है उन्हे नागवार गुजरी पहले तो दिपांकर पर दबाव बनाया गया किन्तु दबाव के आधार पर जब वाहन छूटता दिखाई नही दिया तो ईमानदार दिपांकर का स्थानान्तरण ही करा दिया गया। पकड़े गये वाहन लोक निर्माण विभाग मे ठेकेदारी के लिये रजिस्टर्ड अरनव विल्डकाॅन के मालिक बालमुकुन्द खेड़िया के है जिनका लोक निर्माण विभाग मे आईडी नं 160000068 व रजिस्ट्रेसन नं ईसी 160002674 होना बताया जा रहा है।

वाहन न छोड़ने पर सिद्धांत दीपांकर पर गिरी गाज

कोतमा वन परिक्षेत्राधिकारी सिद्धांत दीपांकर रेत माफियाओं पर विगत कई दिनों से मुहिम चलाकर कार्यवाही कर रहे थे जो सफेद पोश नेताओं एवं माफियाओं के गठजोड़ को रास नही आ रही थी। लगातार छापेमार कार्यवाही, वाहनों की धड़ पकड़ से माफियाओं में परिक्षेत्राधिकारी की दहशत फैली हुई थी, माफियाओं व नेताओं को यह ईमानदारी रास नहीं आई और रेत माफिया ने सत्ताधारी नेता से साठगांठ कर सिद्धांत दीपांकर का स्थानांतरण ही करा डाला। मध्य प्रदेश शासन वन विभाग मंत्रालय वल्लभ भवन भोपाल से दिनांक 9.3.2019 को आदेश क्रमांक एफ 3-8.2019.10-1 को दिनांक 8.3.2019 द्वारा परिक्षेत्र अधिकारी को सामान्य वन मंडल अनूपपुर के पद पर की गई पदस्थापना में आंशिक संशोधन कर वन परिक्षेत्र अधिकारी गढ़ाकोठा सामान्य वन्य मंडल दक्षिण सागर नवीन पदस्थापना कर दी गई। जिससे साफ साफ पता चलता है कि ईमानदारी से अपने कर्तव्य का पालन करने वाले शासकीय अमले पर सत्ताधारी नेताओं द्वारा दिये गये मौखिक आदेश का पालन न करना कितना महंगा पड़ता है।

दिलीप बिल्डकॉन पर कार्यवाही करने वाले का यही हुआ था हस्र

सरकार किसी पार्टी की हो लेकिन शासकीय अमले पर नेताओ द्वारा अक्षर दबाव बनाया जाता है जिसका जीता जागता उदाहरण राष्ट्रीय राज्य मार्ग बनाने वाली कंम्पनी दिलीप बिल्डकॉन द्वारा जब वन भूमि पर नियमो के विपरीत कार्य करने पर पूर्व मे वन परिक्षेत्राधिकारी कोतमा रहे शिशुपाल अहिरवार द्वारा वर्ष 2015-16 में कार्यवाही करना महंगा पड़ा था तब उक्त कम्पनी से संरक्षण प्राप्त आसामाजिक तत्व शिशुपाल के साथ मारपीट करने के उद्देश्य सेे वन डिपो कोतमा मे घुस गये थे इतना ही नही कुछ कर्मचारियों के साथ हाथापाई भी हुई थी तब इसकी शिकायत भालूमाड़ा थाने मे वन विभाग के अधिकारियों द्वारा दिलीप विल्डकाॅन कम्पनी के खिलाफ दर्ज कराई गई थी। वहीं उक्त कम्पनी ने भी वन विभाग के खिलाफ अपनी शिकायत थाने मे दर्ज कराई थी। और कुछ समय पश्चात् शिशुपाल का स्थानान्तरण शहडोल के लिये हो गया। और उसी क्रम मे आज दिपांकर को ईमानदारी का ईनाम स्थानान्तरण के रुप मे मिला है।

इनका कहना है

कोतमा वन परिक्षेत्राधिकारी सिद्धांत दिपांकर का स्थानान्तरण प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किया गया है।
एके जोशी
सीसीएफ, शहडोल

कुछ लोगों द्वारा पोकलेन मशीन व रेत से भरे ट्रक पर कार्यवाही न करने का दबाव बनाया जा रहा था मैने दबाव मे आने से मना कर दिया मै पहले कोतमा प्रभार में था 8 मार्च को सम्पूर्ण प्रभार कोतमा वन मंडल का दिया गया और 9 मार्च को पुनः मेरा स्थानन्तरण गढ़ा कोटा सागर कर दिया गया। हुई इस प्रकिया से मैं काफी आहत हूँ।
सिद्धांत दीपांकर
वनपरिक्षेत्र अधिकारी, कोतमा

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