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जीलंग में खुलेआम आयकर की चोरी (आशुतोष सिंह की रिपोर्ट )

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कागजों में संचालित फर्म 

 

 

पुष्पराजगढ़।

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वैसे तो सरकार ग्राहकों को जागरूक करने के लिए जागो ग्राहक जागो का मिशन चलाकर खरीद्दारों को किसी भी सामान के खरीदने का पक्का बिल लेने की बात कहती है, इस पूरे जागरूकता अभियान मे शासन प्रचार के लिए लाखों खर्च भी करती है, वहीं दूसरी ओर जिले की पंचायतों में कच्चे बिल का खेल लंबे अर्से से चला आ रहा है, जिस पर वाणिज्यकर सहित आयकर विभाग ने चुप्पी साधी हुई है। जिले के सबसे बड़े 119 पंचायतों वाली जनपद पुष्पराजगढ़ की पंचायतों में इन दिनों फर्मों की बाढ़ आई हुई है, कुछ फर्मे तो महज कागजों में संचालित हो रही हैं, तो वंही कुछ फर्मों का श्रम विभाग में पंजीयन तक नहीं है, बावजूद उसके ऐसी फर्में पंचायतों में सामग्री सप्लाई के नाम पर सरपंच, सचिव व रोजगार सहायकों से सांठ-गांठ कर लाखों की सामग्री खरीदी बिक्री के बिल लग रही है, वहीं दूसरी ओर आय-व्यय की निगरानी करने वाले आयकर-वाणिज्य विभाग ने इस ओर से आंखे बन्द कर रखीं है, दूसरी ओर उक्त फर्मों का नियमानुसार श्रम विभाग में पंजीयन होना चाहिए, लेकिन बगैर पंजीयन की ये फर्मे वर्षों से संचालित हो रही है, जिससे जंहा एक ओर शासन को चूना लग रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरपंच, सचिव व रोजगार सहायक सहित फर्में संचालक भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने में लगे हुए है।

लाखों का खेल

पुष्पराजगढ़ जनपद पंचायत की जीलंग पंचायत में कई ऐसे दुकानदार है, जो हजारों के माल को लाखों में तब्दील कर देते हैं, होने वाले फायदे पर लगने वाला कर जहां उक्त फर्मों द्वारा शासन को देना चाहिए, वहीं इन फर्मो के संचालक कच्चे बिल लगाकर लाखों का राजस्व खुद ही हजम कर रहे है, मजे की बात तो यह है कि ऐसे कार्य में शासन-प्रशासन सन के नुमाईंदे ही इनका साथ दे रहे हैं, उक्त पंचायत में अशो क गुप्ता नामक फर्म द्वारा जीलंग सहित बसनिहा, मझगवां, जुहिली, लखौरा सहित अन्य पंचायतों में कच्चे में लाखों की सामग्री सप्लाई की, लेकिन लगे हुए बिलों को देखा जाये तो आज भी उक्त फर्म संचालक सादे कागज पर फर्म का नाम अंकित करवाकर पंचायतों में लाखों के बिल लगाये, अगर सरकार जो ग्राहकों के लिए जागरूकता अभियान चला रही है, तब क्या यह जागरूकता अभियान पंचायतों में लागू नहीं होता ?

फर्जी बिलों की भरमार

जानकारों की माने तो जीलंग पंचायत में गली कूचों में निवासरत लोगों से भी सचिव ने सांठ-गांठ कर पंचायत में बिल लगावा लिए हैं, पूरे अंचल में हार्डवेयर की सैकड़ों दुकाने कागजों में चल रही है, इन दुकानों से सरिया, सीमेंट, रेत, ईंट, गिट्टी सहित अन्य सामग्री पंचायतों में सप्लाई की जा रही है, ऐसी ही एक फर्म भूपेन्द्र सिंह ग्राम नांदपुर के नाम से पंचायत में सामग्री सप्लाई कर रही है, मजे की बात तो यह है कि उक्त फर्म या तो पूरी सामग्री खुद ही फैक्ट्री लगाकर निर्माण कर रही है, या तो इन्होंने रेत का ठेका ले रखा है, क्योंकि उक्त फर्म के संचालक द्वारा पंचायतों में लाखो का बिल तो लगाया, लेकिन फर्म द्वारा किसी भी प्रकार का टैक्स अदायगी के बगैर सादे कागज पर फर्म का नाम अंकित कर केवल जीलंग पंचायत में ही लाखों की सामग्री सप्लाई कर दी। जानकारों की माने तो अगर उक्त फर्म की जांच कराई जाए तो टैक्स चोरी का मामले सहित सांठ-गांठ कर फर्जी बिल लगाने का भी मामला सामने आ सकता है।

खुलेआम विभागों को चुनौती

जनपद पंचायत में संचालित दुकानदार सरेआम आयकर की चोरी कर स्वयं तो दोगुना कमा ही रहे हैं वहीं जीरो टॉलरेंस वाली मध्यप्रदेष सरकार खुद ही अपने कर्मचारियों की लापरवाही से ठगी जा रही है। आयकर व सेल टैक्स विभाग को भी खुलेआम चूना लग रहा है, ग्राम पंचायत जीलंग में संगीता जायसवाल नामक फर्म द्वारा पंचायत में कच्चे बिलों पर इस कदर चूना लगाया जा रहा है कि पंचायत में पदस्थ शासकीय नुमाईंदे भी इस ओर से ध्यान अलग कर अपनी जेब गर्म करने के चक्कर में लगे हुए हैं, मजे की बात तो यह है कि उक्त पूरे मामले की जानकारी जनपद सहित जिले में बैठे अधिकारियों को भी है, उसके बाद भी मौन स्वीकृति कहीं न कहीं भ्रष्टाचार को खुला संरक्षण दिये हुए है।

जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान

विभाग के जिम्मेदारों की उदासीनता और लापरवाहियों के चलते व्यापारी टैक्स के रूप में शासन को प्रतिमाह लाखों रुपये का चूना लगा रहे हैं और जिम्मेदार तनिक भी गंभीर नजर नहीं आते। आयकर विभाग के कोई भी अधिकारी पंचायतों में चल रहे गड़बड़झाले को लेकर गंभीर नहीं है, और ना ही इन सादे कागजों की पर्चियों पर लाखों का व्यापार करने वालों पर कोई कार्रवाई करता। विभाग के जिम्मेदारों को चाहिए कि सादे कागजों की पर्चियों पर चल रहे लाखों करोड़ों के व्यवसाय पर नजर रखी जाए और उपभोक्ताओं सहित शासन द्वारा किये जा रहे निर्माण कार्यो में भी पक्के बिल न देने पर उक्त दुकानदारों पर कार्यवाही की जाये।

इनका कहना है

नरेगा के तहत हुए निर्माण कार्यों में जिले से बनाये गये वेन्डरों जिनका टिन नम्बर होता है को ही भुगतान किया जा सकता है।

रंजीत सिंह रघुवंषी
सीईओ जनपद पंचायत पुष्पराजगढ

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