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हिमाद्री हुई भाजपा की, टिकट भी फाइनल ( आशुतोष सिंह की रिपोर्ट )

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दलवीर सिंह की विरासत जा सकती है नर्मदा के हांथों में
स्टार टाइम्स की खबर पर लगी मुहर

इन्ट्रो-शहडोल संसदीय क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी में टिकट को लेकर चल रही उहा-पोह की स्थित हिमाद्री नरेन्द्र सिंह के सदस्यता लेने के बाद लगभग साफ हो गई है, तो वहीं अब साफ हो गया कि केन्द्रीय मंत्री रहे स्व. दलवीर सिंह की राजनैतिक विरासत नर्मदा सिंह के हांथों पर होगी, शहडोल लोकसभा का अपना एक इतिहास रहा है कि पुष्पराजगढ़ विधानसभा से ही अधिकतर बार कांग्रेस भजपा के प्रत्याशी रहे हैं, अगर ऐसा हुआ तो इस बार इतिहास के पन्नो एक और बात दर्ज हो जायेगी वह की भाई-बहन राजनीति में आमने -सामने होेंगे बहरहाल यह तब तक नही कहा जा सकता जब तक दोनो ही दल टिकट पर अंतिम मोहर न लगा दें।

स्टार टाइम्स लोकसभा शहडोल के लिये बुधवार 20 मार्च का दिन यादगार पलों में रहेगा, क्योंकि सालों-साल तक जिस दलवीर सिंह व राजेश नन्दनी सिंह का सम्पूर्ण राजनैतिक जीवन कांग्रेस के लिये समर्पित रहा हो उनकी पुत्री हिमाद्री सिंह ने पति नरेन्द्र सिंह मराबी के राजनैतिक सफर में साथ-साथ चलने का फैसला लेते हुये भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। हलांकि यह संकेत हिमाद्री सिंह ने वर्ष 2018 में हुये विधानसभा चुनाव में तब दे दिये थे जब भाजपा ने उनके पति नरेन्द्र सिंह मराबी को पुष्पराजगढ़ विधानसभा से विधायक का दावेदार बनाया था और हिमाद्री सिंह ने साथ मिलकर चुनाव प्रचार किया था लेकिन तब उन्होंने भाजपा की सदस्यता नही ली थी, अब सब कुछ स्पष्ट हो गया है, रही बात कांग्रेस की तो लोकसभा की टिकट को लेकर भले ही तस्वीर साफ न हो लेकिन शहडोल लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस की राजनीति में जो बड़ा नाम स्वर्गीय दलवीर सिंह का था अब उनकी राजनैतिक विरासत उनके भतीजे नर्मदा सिंह सम्भालेंगे यह साफ हो गया है। यदि कांग्रेस आलाकमान ने नर्मदा सिंह का नाम फाइनल की तो मुकाबला कांटे का हो सकता है।

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बीजेपी बना सकती है हिमाद्री को उमीदवार

लोकसभा उप चुनाव वर्ष 2016 मे जिस हिमाद्री सिंह को बीजेपी मे लाने का भरसक प्रयास तात्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान सहित बीजेपी के अन्य पदाधिकारियों द्वारा किया गया था तब हिमाद्री सिंह ने माता पिता की कांग्रेसी राजनीतिक विरासत के नाम पर बीजेपी मे जाने से इंकार कर दिया। वही हिमाद्री विधानसभा चुनाव के दौरान शिवराज सिंह की आयोजित दमेहड़ी सभा मे एआईसीसी की सदस्य रहते हुये मंच साझा कर सब को अचंभित कर दिया था। और सम्पन्न हुये विधानसभा चुनाव मे पति नरेन्द्र मरावी के लिये वोट भी मांगे तभी से लगातार कयास लगाये जा रहे थे कि देर सबेर ही सही हिमाद्री बीजेपी मे सामिल हो सकती है। और आज अटकलों को विराम लगाते हुये युवा नेत्री हिमाद्री सिंह ने बीजेपी का दामन थाम लिया। अब पति पत्नी दोनो एक ही पार्टी मे रहकर राजनीति करेगे। अब कयासों का एक नया दौर भी चल पड़ा जिसमे हिमाद्री सिंह को बीजेपी से लोकसभा का उमीदवार बनाये जाने की बात कही जा रही है। बहरहाल टिकट वितरण से पूर्व राजनीतिक गलियारों मे चर्चा का एक और वातावरण निर्मित हुआ है।

नर्मदा, हिमाद्री और बंगले की राजनीति

स्व. दलबीर सिंह व स्व. राजेश नंदनी सिंह का संसदीय क्षेत्र के पुष्पराजगढ़ मे बना घर जिसे लोकसभा क्षेत्र बंगले के नाम से जानता है। यह क्षेत्र स्व. दलबीर सिंह का पैतृक गांव भी है। जहां से तीन दशक तक राजनीति मे गहरा प्रभाव रखने वाले दम्पत्तियों की तूती बोलती रही है। और इस बंगले पर कांगे्रसी झण्डा लहराता रहा है, किन्तु इनकी पुत्री हिमाद्री सिंह का विवाह बीजेपी से पूर्व अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रहे नरेन्द्र मरावी से होने व नरेेन्द्र मरावी को विगत वर्ष हुये विधान सभा चुनाव मे पुष्पराजगढ़ से प्रत्यासी के तौर पर उतरने के साथ ही कहे जाने वाले इस बंगले पर बीजेपी का झण्डा लोगो ने पहली बार लगा देखा। वहीं इसी बंगले मे पले बढ़े नर्मदा सिंह जो कुछ समय पूर्व घरेलू विवाद के कारण बंगले से अलग रहते हुये बीजेपी मे चले गये थे। वे इस दम्पत्ति के भतीजे और राजनीति मे वर्षो से सक्रिय रहे है। बंगले मे लगे बीजेपी के झण्डे को देख चाचा चाची की कांग्रेसी राजनीतिक विरासत संभालने के नाम पर बिना शर्त कांग्रेस मे सामिल हो चुके है। अब जब कि हिमाद्री सिंह कांगे्रसी विरासत छोड़ बीजेपी मे सामिल हो गई है तो अब दलबीर राजेष नंदनी की राजनीतिक विरासत नर्मदा सिंह के हाथों मे होगी।

इतिहास के पन्नो से

स्व. दलबीर सिंह जो राजीव गांधी मंत्री मंडल मे केन्द्रीय शहरी विकास राज्य मंत्री व नरसिम्हा राव मंत्री मण्डल मे केन्द्रीय राज्य वित्त मंत्री रह चुके है साथ ही उनकी पत्नी स्व. राजेश नंदनी जो शहडोल संसदीय क्षेत्र से सांसद व कोतमा विधानसभा से विधायक रह चुकी है की पुत्री हिमाद्री सिंह जो खुद भी वर्ष 2016 मे तात्कालीन सांसद रहे स्व. दलपत सिंह परस्ते के आकस्मिक निधन पर हुये उप चुनाव मे कांगे्रस की टिकट पर संसदीय चुनाव लड़ते हुये बीजेपी के ज्ञान सिंह से अल्प मतों से पराजित हुई थी ने आज बीजेपी प्रदेष कार्यालय पहुंचकर राकेश सिंह से बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर माता पिता की कांग्रेसी विरासत को पीछे छोड़ दिया है। यहां यह बात उल्लेखनीय है कि हिमाद्री सिंह को वर्ष 2016 मे भी बीजेपी मे लाने का प्रयास किया जा रहा था तब राजनैतिक विरासत के नाम पर हिमाद्री सिंह ने मरते दम तक कांग्रेस मे रहने की बात कर बीजेपी मे जाने से इंकार कर दिया था। जिसकी पुष्टि हिमाद्री सिंह द्वारा तात्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान को लिखे और शोशल मीडिया मे वायरल किये गये पत्र से होती है।

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