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राखड़ की धूल में कायदे कानूनों को धुंधला कर रकम वसूल रहे अधिकारी ( अनिल दुबे की रिपोर्ट )

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मामला अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई के सेलो प्लांट का

इन्ट्रो- अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई बीते कई माह से निविदाओं में उलट-फेर कर चहेतों को कार्य आवंटित करने के मामले में सुर्खियों में रहा है। लेकिन इस बार ऊर्जा उत्पादन के बाद निकलने वाले अपशिष्ट(राखड़) के परिवहन के लिए बनाये गये कायदे-कानूनों को धुंधला कर पहले तो वाहनों में लोडिंग देने व बाद में क्षमता से अधिक परिवहन के नाम पर अच्छी-खासी रकम वसूली कर सुर्खियों में हैं। पहले पदस्थ रहे अधिकारी का साफ कहना है जब तक मेरे समय का हिसाब-किताब जिन वाहन मालिकों व चालकों के द्वारा पूरा नहीं कर दिया जाता, तब तक वह यूं ही कतार में लोडिंग के लिए खड़े रहेंगे। भले ही वाहन मालिकों व चालकों से वर्तमान में पदस्थ अधिकारी ने कमीशन की रकम निर्धारित कर एडवांस में ले ली हो। अधिकारियों को इससे कोई मतलब नहीं कि राखड़ की पहियों से उड़ती धूल से मानव जीवन को कितना खतरा है, उन्हें तो सिर्फ मतलब है अपने कमीशन से।

ऊर्जा उत्पादन के बाद निकलने वाली राखड़ के परिवहन व उसके उपयोग व उस क्षेत्र को प्रदूषणमुक्त रखने के लिए बनाए गए कायदे-कानूनों को उसी राखड़ की धुंध में धुंधला करने को लेकर अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई के अधिकारी इन दिनों चर्चाओं में हैं। जानकारी के अनुसार जब तक यहां पदस्थ अधिकारियों को कमीशन की भेंट नहीं चढ़ा दी जाती, तब तक वहां बने सेलो प्लांट से वाहन मालिक व चालक द्वारा नहीं किया जा सकता। भले ही उक्त राखड़ को अधिकारियों द्वारा राखड़ डेम में बहा दिया जाए। जबकि उक्त राखड़ लघु उद्योगों को निःशुल्क प्रदाय की जानी है। ऐसा नहीं कि अधिकारियों ने सूचना पटल पर राखड़ निःशुल्क दिए जाने की जानकारी चस्पा नहीं की है। लेकिन जो भी अधिकारी सेलो प्लांट की जिम्मेदारी संभालता है, सबसे पहले वह अपना रेट तय करता है। इसके बाद ही वाहनों में राखड़ की लोडिंग हो पाती है और जिस भी वाहन चालक या मालिक ने अधिकारी के द्वारा तय की गई दर का भुगतान समय पर नहीं किया तो वह फिर कतार में लगा रहता है।

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किसकी शह पर हो रही वसूली

सेलो प्लांट से पूर्व में पदस्थ रहे अधिकारी का मोह भंग नहीं हो रहा है, जबकि उनका स्थानांतरण हो चुका है। यह अलग बात है कि उन्हें स्थानांतरित पावर प्लांट के लिए रिलीफ नहीं किय गया है। विभाग बदलकर यही जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके द्वारा पूर्व माहों का हिसाब-किताब बराबर किए जाने को लेकर आए दिन वाहन मालिकों व चालकों से वसूली की जाती है और जिनके द्वारा अभी तक उनका हिसाब-किताब नहीं किया गया है। उसे आए दिन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

रिनुअल के भी लगते पैसे

कार्यपालन निदेशक (उत्पादन) अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई के द्वारा ईंट, टाईल्स के निर्माण हेतु फ्लाई एस निःशुल्क उपलब्धता की सार्वजनिक सूचना भले ही वहां चस्पा की गई है, लेकिन इन लघु उद्योगों में भी राखड़ का परिवहन करने वाले वाहन मालिकों, चालकों से प्रतिमाह रुपए लिए जाते हैं। इतना ही नहीं कार्यपालन निदेशक के द्वारा जारी सूचना में मांगे गए समस्त दस्तावेज जमा करने के बाद होने वाले अनुबंध को रिनुअल कराने के भी 5 हजार रुपए मांगे जाते हैं। ऐसे में तो स्वरोजगार खड़ा करने के पहले ही मालिक कमजोर हो जाता है।

तय है वाहनों के रेट

यहां पर राखड़ के परिवहन में लगे छोटे-बड़े समस्त प्रकार के वाहनों से प्रति ट्रिप के हिसाब से रेट तय किए गए हैं, जिसमें 500 से लेकर 2000 रुपए तक ले लिए जाते हैं। यदि किसी के द्वारा पूरी रकम अदा नहीं की गई तो उस वाहन को लोडिंग नहीं मिलती। अभी बीच में अधिकारियों ने वाहनों में लोडिंग न देख राखड़ डेम में तक बहा दी, कुल मिलाकर यह स्पष्ट है कि यहां की कमान संभालने वाले अधिकारी को उसकी मुंहमांगी रकम नहीं दी जाएगी तब तक नियम कानून कुछ भी कहे, उसे परिवहन के लिए राखड़ प्रदाय नहीं होगी।

नहीं प्रदूषण की परवाह

अधिकारियों को इसकी कतई ही परवाह नहीं कि उड़ती राखड़ के प्रदूषण की चपेट में आने से उपजाऊ भूमि बरबाद हो रही है। फलदार वृक्ष सूखने लगे हैं। आस-पास के रहने वाले वासिंदे विभिन्न बीमारियों के चपेट में आ रहे हैं। उन्हें मतलब है तो सिर्फ प्रति गाड़ी कमीशन से। जबकि नियमानुसार आस-पास पूरे समय पानी का छिड़काव किया जाना चाहिए, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि नियम-कायदे तोड़ने के लिए ही होते हैं। समय रहते इस मामले में जिम्मेदार नींद से नहीं जागे तो कभी भी अनहोनी हो सकती है।

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