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आरटीओ कार्यालय में भ्रष्टाचार का बोलबाला (आशुतोष सिंह की रिपोर्ट)

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इन्ट्रो- परिवहन विभाग में जितना भ्रष्टाचार फैला है उतना शायद किसी अन्य विभाग में नजर नहीं आता। भ्रष्टाचार की बानगी लायसेंस से लेकर हर कामो के लिये परिवहन विभाग मे देखने को मिल जाती है। ज्यादातर सभी कामो के लिए यहां पर दलाल सक्रिय रहते है। ये दलाल अक्सर दफतर के अन्दर बाहर घूमते मिल जाते हैं। यह हाल किसी एक परिवहन विभाग का नहीं बल्कि खुद तात्कालीन केन्द्रीय परिवहन मंत्री रहे नितिन गडकरी ने सभी परिवहन कार्यालय के लिये कही थी।

अनूपपुर। आम लोगों की यह शिकायत तो रही है कि क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय अर्थात आरटीओ भ्रष्टाचार का अड्डा हैं, लेकिन सरकारी बाबू और सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग इसे स्वीकार नहीं करते। कॉलेज के छात्रों का भ्रष्टाचार से पहला सामना आरटीओ कार्यालय के माध्यम से होता है, क्योंकि वहां दलालों को बिना रिश्वत दिए काम ही नहीं कराया जा सकता। परिवहन महकमें में इन दिनों अमले की कमी नहीं है, बावजूद इसके आंख मूंदकर बसों का फिटनेस जारी किया जा रहा है, बस स्टैण्ड से रवाना होने वाली दर्जन भर से ज्यादा ऐसी बसे हैं, जिनकी जांच करना तो दूर देखते ही कर्मठ जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा उसका फिटनेस सहित परमिट तत्काल रद्द कर दिया जायेगा पर जिले में दलालों के माध्यम से जारी परमिट और उससे मिले कमीषन की मोटी रकम के फेर में साहब को फुर्सत ही नहीं है, जब हादसे होते हैं तब अक्सर तेजी दिखाते हैं और बाकी समय लोगों की जान माल से खिलवाड़ करना उनके लिये आम बात बनकर रह गई है।

हादसे के इंतजार मे परिवहन विभाग

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कंडम बसों को परमिट-फिटनेस जारी करने वाला परिवहन महकमा एक बार फिर किसी बडे हादसे का इंतजार कर रहा है। बीते महीनों में हुई सड़क दुर्घटनाओं पर गौर करें तो क्षतिग्रस्त होने वाले अधिकांष वाहन परिवहन नियमों का पालन करने में सक्षम साबित नहीं हुई थी। अनूपपुर से अमरकंटक कोतमा, जैतहरी सहित डिण्डौरी के लिए लगभग सैकड़ो बसें प्रतिदिन अपनी सेवाएँ दे रही हैं। और इन सेवा दे रही बसों मे से आधी से ज्यादा बगैर परमिट, फिटनेस के संचालित हो रही हैं, जिनका परिमिट है भी तो तय मार्ग की जगह अपने मनमाफी मार्गों से बेरोकटोक आवाजाही करती आसानी से देखी जा सकतीं है। यही वजह है कि आये दिन दुर्घटना ग्रस्त होकर कई लोगों को जीवन भर के लिए अपाहिज बना रही है, तो कइयों को अपनी जिंदगी से ही हाथ धोना पड़ रहा है।

ग्रह जिले में प्रभारी अधिकारी

परिवहन अधिकारी लालता राम सोनवानी का गृह जिला होने से ऐसा नहीं है कि वह जिले में दौड़ रही किसी भी बस मालिक से वाकिफ न हो, जानकारी अनुसार अधिकारियों के कृपा पर प्रभारी परिवहन अधिकारी का पद हमेषा से उन्हे उत्कृत करते हुये उनके पास बना रहता है। जहां भी रहे वहां उन्होंने अलग ही कारनामें किये हैं। इन प्रभारी अधिकारी का अनूपपुर जिले से तबादला होने पर लोटा से कोठी तक पहुंचने वाले दलाल जहां दुखी हुये थे वहीं तबादले पर रोक लगते ही अधिकारी सहित दलाल के लिए चांदी काटने का एक और नायाब मौका हाथ लगा है। बची हुई दुकानदारी के साथ जितना हो सके बटोरने की तर्ज पर इन दिनों परिवहन विभाग मे कार्य किया जा रहा है।

दूर की जाती है कार्यवाही, बस सटैण्ड से परहेज

परिवहन अधिकारी जिले में घूमकर वाहनों पर कार्यवाही तो करते हैं, लेकिन बस स्टैण्ड में खड़ी बसों को जांचने में पीछे रह जाते हैं। आते-जाते सड़कों पर नजर आने वाली बसों पर भी शायद उन्होंने ठीक से गौर नहीं किया, यही वजह है कि कंडम बसे धड़ल्ले से सड़कों पर दौड़ रही हैं। बस स्टैण्ड में यदि महज एक दिन पूरी बसों की जांच की जाए तब खस्ताहाल वाहनों पर कार्यवाही कर व्यवस्था में सुधार लाया जा सकता है। जानकारों की माने तो यदि कोई वाहन 15 वर्ष पुराना है तब उसे फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं दिया जाना चाहिये। परिवहन विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सुनील नांमक दलाल अधिकारी के साथ सांठ-गांठ कर बसों को बिना जांचे कमीषन देकर वाहन मालिकों को फिटनेस और परमिट उपलब्ध करवा रहा है। जिले में अधिकांष बस अड्डो पर खड़ी बसों को देखा जाये तब उन बसों मे बैक लाइट, सामने की लाईट, आगे के पहिये पर रिमोल्ड टायर लगे हुये, फास्ट एड बाॅक्स का न होना आसानी से दिखाई दे जाती है। कुछ बसें इतनी पुरानी हो चुकी है कि उन्हें बंद कर देना चाहिए। उसके बाद भी परिवहन अधिकारी के शह पर ये बसें यमराज बनकर बेलगाम दौड़ रही है।

कैसे मिले बीमा की राशि

जिले में दौड़ रही अधिकांष बसें या तो बगैर फिटनेस के दौड़ रही है, या बगैर परमिट के उसके बावजूद परिवहन अधिकारी सहित जिले का पुलिस विभाग इनके कागजों की कभी जांच करने की जहमत नहीं उठाता, जानकारों की माने तो बीमा कंपनी के नियमानुसार बिना परमिट चलने वाली बसों का बीमा दावा स्वीकृत नहीं किया जाता, जबकि हर बस में सीटों की संख्या के हिसाब से बीमा होता है, इसमें बस संचालक और उसमें हताहत हुए यात्रियों को भी इलाज के लिए राषि मिलती है, साथ ही तत्काल सहायता के रुप मे राषि वाहन मालिक द्वारा घायल यात्रियों को दी जाती है। लेकिन जिले में हुई दुर्घटनाओं में आज तक किसको बीमा भुगतान प्राप्त हो सका है य वाहन मालिक द्वारा हताहत लोगोे को कितनी राषि दी गई है समझ से परे है।

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