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मौन मतदाता, किस करवट बैठेगा चुनाव,(आशुतोष सिंह की रिपोर्ट)

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प्रचार-प्रसार में नहीं दिखा उत्साह…

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की सभा का पड़ेगा असर…

इन्ट्रोः- लोकसभा शहडोल के लिए चुनाव प्रचार के 11 दिन निकल गए, लेकिन वह शोरगुल नहीं सुनाई पड़ा जो बीते समय में सुनाई देता था। प्रचार के शेष बचे 4 दिनों में कौन सी पार्टी अभियान में गति लाती है, यह देखने लायक होगा। फिलहाल मतदाता मौन है, ऐसे में किस करवट चुनाव बैठेगा, कहा नहीं जा सकता। यहां दोनों ही राष्ट्रीय दलों में ऊहा.पोह की स्थिति दिखाई दे रही है। वजह साफ है कि पार्टी का मूल कार्यकर्ता सिद्धांतों से परे हटकर कार्य करने को मजबूर हुआ है।

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अनूपपुर।

29 तारीख को देश की सर्वोच्च संसद के सदस्य का भाग्य ईव्हीएम में कैद हो जाएगा। संसद के सदस्य के रूप में जनता किसकी ताजपोशी करेगी, परिणाम के बाद ही सामने होगा। लेकिन अब तक के बीते लोकसभा चुनावों में जो उत्साह जनता में दिखाई पड़ता था खासकर शहडोल लोकसभा क्षेत्र में नहीं दिखाई दे रहा है। वजह भी जानना आवश्यक है। इस बार यहां कांग्रेस हो या भाजपा उसने अपने मूल कार्यकर्ता पर भरोसा न करते हुए दल-बदलकर उनके साथ जोड़ने वाली नेत्रियों पर भरोसा किया है। किसके लिए यह ठीक होगा और किसके लिए गलत इसका फैसला शायद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने तो कर लिया होगा, लेकिन जनता ने अभी नहीं किया है।

भाजपा ने जोड़े रखा नाता

शहडोल मूल रूप से विंध्य का हिस्सा है। इस संसदीय क्षेत्र की पहचान विंध्य के नाम से ही रही है। यहां के पर्यटन व प्रचुर मात्रा में उपलब्ध विभिन्न प्रकार के खनिज हमेशा लुभाते रहे हैं। लेकिन इस बार कांग्रेस ने विंध्य से शहडोल को राजनैतिक रूप से अलग कर महाकौशल से जोड़कर पूरे समय रणनीति तैयार की। तो भाजपा ने विंध्य से अपना नाता जोड़े रखते हुए चुनाव लड़ा है। इस मामले में कौन कितना सफल रहा यह भी परिणाम आने के बाद स्पष्ट होगा।

एकजुट नहीं हो पाए नेता

कांग्रेस पार्टी में शहडोल केन्द्र बिन्दु रहा है और शहडोल के नेता प्रत्याशी को लेकर एकजुट नहीं हो पाए। तिवारी व बहादुर की आपसी खींचतान में सुभाष भी मुंह फेरे हुए है। यह अपने आप में कांग्रेस के दिग्गज हैं। चुनाव प्रचार के शेष बचे चार दिनों में क्या कुछ पार्टी का शीर्ष नेतृत्व व प्रत्याशी आपसी खींचतान को दूर करने में कितना सफल हो पाते हैं यह देखने लायक होगा।

कहां, कब, किसकी हुई सभा

कांग्रेस व भाजपा प्रत्याशी के लिए शीर्ष नेताओं ने कहां और कब सभाएं की। उसमें भाजपा प्रत्याशी श्रीमती हिमाद्री सिंह के पक्ष में पहली सभा पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा के स्टार प्रचारक शिवराज सिंह चैहान ने पुष्पराजगढ़ मुख्यालय में की। वहीं दूसरी सभा शिवराज सिंह चैहान ने कोतमा के गांधी चैक में की और तीसरी सभा केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने जमुना कालरी दुर्गामंदिर ग्राउण्ड में करते हुए प्रत्याशी हिमाद्री सिंह के लिए जनता से आर्शीवाद मांगा। कांग्रेस प्रत्याशी श्रीमती प्रमिला सिंह के पक्ष में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अनूपपुर के मानपुर में पहली सभा की तो दूसरी सभा राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने लालपुर हवाई अड्डे में मंगलवार को की। इसके अलावा स्थानीय नेता नुक्कड़ सभाओं के माध्यम से डटे हुए हैं। फिलहाल भाजपा सभाओं के मामले में कांग्रेस पर भारी है।

कांग्रेस ने मारा नहले पर दहला

भाजपा प्रत्याशी श्रीमती हिमाद्री सिंह के पक्ष में भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के कमला सिंह ने समर्थन 21 तारीख को दिया। जिसका ऐलान भाजपा जिला अध्यक्ष बृजेश गौतम ने जमुना कालरी में हुई राजनाथ सिंह की सभा के दौरान किया तो कांग्रेस ने भाजपा के इस नहले पर दहला मारते हुए मंगलवार को लालपुर हवाई अड्डे में राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की उपस्थिति में ऐलान किया कि गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी के प्रत्याशी विमल सिंह पार्चे ने कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन दिया है। दोनों ही पार्टियों के प्रत्याशियों के लिए यह समर्थन कितना खास साबित होगा यह बाद में सामने आयेगा।

कौन सी विधानसभा होगी निर्णायक

शहडोल संसदीय क्षेत्र में आठ विधानसभा क्षेत्र आते हैं। जिसमें सर्वाधिक मतदाता जयसिंहनगर विधानसभा में है। निर्वाचन आयोग द्वारा लोकसभा के लिए जारी की गई मतदाता सूची में जयसिंहनगर विधानसभा में सर्वाधिक 2 लाख 33 हजार 326 मतदाता और 02 थर्ड जेंडर बताए गए हैं। इसी क्रम में कटनी जिले की बड़वारा विधानसभा में 2 लाख 34 हजार 277 मतदाता और 03 थर्ड जेंडर हैं। इसके बाद नंबर आता है जयसिंहनगर विधानसभा का जहां पर 2 लाख 35 हजार 326 मतदाताओं के साथ 02 थर्ड जेंडर शामिल हैं। इसके बाद मानपुर विधानसभा में 2 लाख 30 हजार 680 मतदाता हैं। फिर विधानसभा बांधवगढ़ में 2 लाख 10 हजार 918 मतदाता और 03 थर्ड जेंडर हैं। इसके बाद अनूपपुर जिले की पुष्पराजगढ़ विधानसभा में 01 लाख 87 हजार 676 मतदाता हैं। उसके बाद अनूपपुर विधानसभा में 01 लाख 66 हजार 662 मतदाता व 03 थर्ड जेंडर हैं। अंत में सबसे कम मतदाता कोतमा विधानसभा में 01 लाख 49 हजार 386 मतदाता व 01 थर्ड जेंडर हैं। कुल 16 लाख 46 हजार 252 मतदाता सांसद के भाग्य का फैसला करेंगे। इनमें कौन सी विधानसभा निर्णायक होगी यह देखना होगा।

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