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ब्रह्म मुहू्र्त में खुले बद्रीनाथ धाम के कपाट

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गढ़वाल (उत्तराखंड)।

10 मई, शुक्रवार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 4 बजकर 15 मिनट पर भगवान बद्रीनाथ मंदिर के कपाट खोल दिए गए। इसके लिए मंदिर को सुगंधित फूलों से श्रंगारित किया गया। गुरुवार को योग-ध्यान बद्री मंदिर पांडुकेश्वर से भगवान बद्रीनाथ की उत्सव डोली के साथ आद्य शंकराचार्य की गद्दी और गाडू घड़ा ( तिल्ली के तेल से भरा कलश) बदरीनाथ धाम पहुंचे थे। इसके साथ ही देवताओं के खजांची कुबेरजी और भगवान बदरी विशाल के बालसखा उद्धवजी की डोली भी बदरीनाथ पहुंची। मंदिर में अखंड ज्योति के दर्शन करने के लिए गुरुवार शाम तक हक-हकूकधारियों समेत आठ हजार से अधिक यात्री बद्रीनाथ धाम पहुंच चुके थे। उधर, शुक्रवार को ही पंचबद्री में शामिल भविष्य बद्री धाम, पंचकेदारों में शामिल तृतीय केदार तुंगनाथ धाम के कपाट भी खोल दिए गए।

इससे पहले गुरुवार सुबह योग-ध्यान बद्री मंदिर से भगवान बद्री विशाल की डोली, तेल कलश, शंकराचार्य की गद्दी और कुबेरजी और उद्धवजी की डोली सेना के बैंड की मधुर धुनों के बीच बद्रीनाथ धाम के लिए रवाना हुई। यहां धाम के मुख्य पुजारी रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी, धर्माधिकारी भुवनचंद्र उनियाल और वेदपाठियों ने बद्री नारायण की डोलियों की अगवानी की। इसके बाद उद्धवजी की उत्सव मूर्तिं को रावल निवास और कुबेरजी की उत्सव मूर्तिं को जयकारों के बीच बामणी गांव स्थित नंदा देवी मंदिर में विराजमान किया गया।

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कपाट खुलने पर कुबेरजी और उद्धवजी की उत्सव मूर्तिंयों को बद्रीनाथ मंदिर लाया गया। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी हरीश गौड़ ने बताया कि धाम में लगभग 20 हजार यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि पहले दिन श्रद्धालुओं को घृत कंबल यानी ऊन की चोल का प्रसाद दिया जाएगा। यह घृत कंबल शीतकाल में भगवान बद्रीनाथ की मूर्तिं ओढ़े रहती है। इसे माणा गांव की कन्याएं बुनकर तैयार करती हैं, जिस पर घी का लेपन किया जाता है।

पंचबद्री में शामिल भविष्य बद्री धाम के कपाट सुबह 10.04 बजे श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले गए। इसके अलावा पंचकेदारों में शामिल तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम के कपाट भी आज ही दोपहर 12 बजे कर्क लग्न में श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। केदारनाथ धाम के कपाट भले ही गुरुवार को खुल गए हों, लेकिन बाबा की आरती और नित्य पूजाएं शनिवार को भैरवनाथ मंदिर के कपाट खुलने के बाद ही शुरू होगी। भैरवनाथ मंदिर के कपाट केदारबाबा के कपाट खुलने के बाद पड़ने वाले पहले मंगलवार या शनिवार को खुलते हैं। भैरवनाथ को बाबा केदार का रक्षक माना गया है।

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