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जलसंरक्षण और पर्यावरण की सुरक्षा विषय पर अमरकंटक में आयोजित हुई कार्यशाला ( अनिल दुबे की रिपोर्ट )

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पौध रोपण कर नदियों और पर्यावरण को बचाये- कमिश्नर

धरती को बचाने में वृक्षों की होगी अहम भूमिका- मुख्य आयकर आयुक्त

अनूपपुर। 

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कमिश्नर शहडोल संभाग शोभित जैन ने कहा है कि वनों के अंधाधुंध विदोहन से नदियों का जल स्तर कम हुआ है। नदिया प्रदूषित हुई है वही पृथ्वी के तापमान में वृद्धि होने के साथ-साथ पृथ्वी का पर्यावरण भी निरंतर बिगड़ता जा रहा है। उन्होंने कहा है कि आज हम सभी का यह दायित्व है कि हम नदियों और पर्यावरण की सुरक्षा के लिये अपने खेतो, वनों पढ़त भूमि में एवं वनों में पौधरोपण कराये। कमिश्नर ने कहा है कि पौधरोपण से हरियाली बढेगी और हरियाली से नदियों का जलस्तर बढेगा और स्वच्छ पर्यावरण होगा। कमिश्नर ने शहडोल संभाग के नागरिकों से अपील करते हुये कहा है कि वे नदियों के संरक्षण एवं पर्यावरण की सुरक्षा के लिये पौधरोपण करें। कमिश्नर शहडोल संभाग जेके जैन आज अमरकंटक में आज जल संरक्षण और पर्यावरण की सुरक्षा विषय पर आयोजित संभाग स्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कमिश्नर ने कहा कि तालाबों और नदियों में जल संरक्षण और संवर्धन के कार्यो को बढ़ावा देने के लिये शहडोल संभाग के शासकीय तालाबों से अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की जायेगी तालाबो को पुराने स्वरूप में लाया जायेगा। इसी प्रकार गांव की चरनोई भूमि में अतिक्रमण को हटा कर ऐसी भूमि जल संरक्षण के कार्य कराये जायेगे। कमिश्नर ने कहा कि शहडोल नगर के सभी तालाबो से गाद निकालने की कार्यवाही आगामी रविवार से प्रारंभ की जायेगी। कमिश्नर ने कार्यशाला में बताया कि पुष्पराजगढ़ क्षेत्र में ग्रीष्मकाल में कुंए और हैण्डपंप सूख जाते है जिसे दृष्टिगत रखते हुये पुष्पराजगढ क्षेत्र में जलसंरक्षण एवं संवर्धन के व्यापक स्तर पर कार्य कराये जायेगे। कमिश्नर ने निर्देश दिये है कि जलसंरक्षण और संवर्धन के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिये ग्राम पंचायत के सचिव उद्यानिकी विभाग, आजीविका मिशन के सदस्य और कृषि विभाग के मैदानी कर्मचारी गांवो में जाकर लोगो को जलसंरक्षण एवं संवर्धन का महत्व बतायेगे तथा उन्हें जलसंरक्षण संरचनाएं बनाने के लिये प्रेरित और प्रोत्साहित करेगे। कमिश्नर ने बताया कि शहडोल संभाग में तिपान नदी और घोडछत्र नदी के पुर्नजीवन का कार्य कराया जा रहा है। उन्होने कहा कि दोनो नदियों में जलसंरक्षण के कार्य कराये जा रहे है। इसके अलावा शहडोल संभाग में अन्य नदियों में जलसंरक्षण एवं जल संवर्धन के लिये कार्य कराये जाने की कार्य योजना बनाई जा रही है। कार्यशाला को संबोधित करते हुये मुख्य आयकर आयुक्त भोपाल पंतजली झा ने कहा कि मैने शासकीय सेवा के साथ-साथ एक कृषक के रूप में भी कार्य किया है। कार्यशाला में उन्होने अपने खेती के अनुभव को साझा करते हुये कहा कि खस, सहजन और शोबबूल की खेती से किसानों को अच्छा लाभ हो सकता है वही पर्यावरण की सुरक्षा हो सकती है। मुख्य आयकर आयुक्त ने कहा कि सहजन की फल्लियां कैल्शियम का बढ़ा स्त्रोत है। सहजन के फल्लियों से और उसके पत्तो में सभी तरह के मिनरल्स और विटामिन उपलब्ध होते है। उन्होंने कहा पर्यावरण की सुरक्षा में भी हमारी मदद करता है। इसी प्रकार पर्यावरण और जलसंरक्षण के लिये खस की घास की खेती मील का पत्थर साबित हो सकती है खस की जड़े लगभग 5 मीटर तक अंदर तक जाती है तथा दूषित पानी को भी शुद्ध करती है। उन्होने कहा कि खस का एक पौधा लगभग 15 किलो कार्बन को सोख कर पर्यावरण को शुद्ध करता है। उन्होने कहा कि खस का व्यवसायिक उपयोग भी किया जा सकता है किसान को इससे कई प्रकार का लाभ हो सकता है। उन्होने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा के लिये कीटनाशको का उपयोग कम करना चाहिये तथा जैविक खेती को बढ़ावा देना चाहिये। उन्होने कहा कि हर्रा, बहेडा, गंध राज नीबू भी लगाने के लिये लोगों को प्रोत्साहित करना चाहिये उन्होंने कहा कि हमारा हजारो सालो से संजोया गया पंरपरागत ज्ञान खत्म हो रहा है इसे बचाने की आवष्यकता है। मुख्य आयकर आयुक्त ने कहा कि हमारी छोटी नदियां मर चुकी है मुख्य नदियों में पानी का प्रवाह 60 प्ररिशत कम हो गया है। हमारी खेती की मिट्टी बंजर हो रही है। इन चुनौतियों से निपटने के लिये हमे जंगलों में हमें वृहद तदाद में हर वर्ष वृक्ष लगाने की आवष्यकता है उन्होंने कहा कि धरती की सुंदरता और उसके अस्तित्व को सिर्फ और सिर्फ वृक्ष ही बचा सकते है। इसके लिये हमे सभी को मिल कर अच्छे मन से प्रयास करने होगे। कार्यशाला को संबोधित करते हुये मुख्य वन संरक्षक एके जोशी ने कहा कि वनों के संरक्षण के लिये वन विभाग लगभग 150 वर्षो से काम कर रहा है। कार्यशाला को संबोधित करते हुये प्राध्यापक पर्यावरण तरूण ठाकुर ने कहा कि अमरकंटक से लगभग 16 नदिया निकालने का उल्लेख प्राप्त होता है किन्तु पानी के श्रोत बंद होने के कारण नदिया विलुप्त हो गई है। उन्होंने कहा कि आज नदियों को संरक्षित करने की आवश्यकता है। कार्यशाला में अमरकंटक विभिन्न आश्रमों के धर्मगुरूओं ने भी नर्मदा सहित अन्य नदियों को संरक्षित करने के लिये अपने विचार रखे। कार्यशाला में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत एसकृष्णन चेतन, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सरोधन सिंह, दिनेश कुमार मौर्य शहडोल वनवृत्त के सभी वनमण्डलाधिकारी अधिकारी, शहडोल संभाग के सभी मुख्य नगर पालिका अधिकारी, आजीविका मिशन के अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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