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इस वजह से अपने शो पर दे पाती हूं पॉलिटिकल ‘ज्ञान’, बोलीं वरिष्ठ पत्रकार नविका कुमार

टाइम्स नाउ चैनल की शुरुआत से ही इसके साथ जुड़ीं नविका कुमार वर्तमान में मैनेजिंग एडिटर की निभा रही हैं जिम्मेदारी

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वरिष्ठ पत्रकार नविका कुमार टाइम्स नेटवर्क के अंग्रेजी न्‍यूज चैनल ‘टाइम्‍स नाउ’ (Times Now) की शुरुआत के समय से ही इसके साथ जुड़ी हुई हैं। इन दिनों चैनल में मैनेजिंग एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रहीं नविका कुमार उन पत्रकारों की फेहरिस्त में शामिल हैं, जिन्होंने पॉलिटिकल रिपोर्टिंग में अपनी अलग पहचान बनाने के साथ-साथ बिजनेस रिपोर्टिंग में भी अलग धाक बनाई हुई है।

उन्हें कई बड़ी स्टोरी ब्रेक करने और इंवेस्टिगेट करने का श्रेय दिया जाता है, जिनमें सोनिया गांधी का इस्तीफा, कॉमनवेल्थ घोटाले में फंसे सुरेश कलमाड़ी का इस्तीफा, अगस्ता हेलीकॉप्टर घोटाला, एयरसेल-मैक्सिस डील जैसी कई खबरें शामिल हैं।

चैनल और उनकी भूमिका से जुड़े सवालों को लेकर हमारी सहयोगी मैगजीन ‘इम्पैक्ट’ (IMPACT) की संवाददाता नीता नायर ने नविका कुमार से विशेष बातचीत की। प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश-

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मुझे अभी भी वह समय याद है, जब हमें पहली बार खुद को इंट्रोड्यूज करना था और लोगों को बताना था कि टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप टेलिविजन की दुनिया में प्रवेश करने जा रहा है। समय के साथ ‘टाइम्स नाउ’ एक इंस्टीट्यूशन बन चुका है। सबसे पहली बड़ी स्टोरी हमने ‘Matter of Propriety’ की थी। इसको लेकर संसद का कामकाज ठप हो गया था और आधे संसद सदस्यों के हस्ताक्षर से युक्त यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया था। लोगों का कहना था कि अरे, जनवरी में तो यह चैनल लॉन्च हुआ था और फरवरी में इसने इतनी बड़ी स्टोरी कर दी।

इसके बाद हमने ‘Office of Profit’ यानी लाभ के पद पर स्टोरी की थी, जिसकी वजह से सोनिया गांधी और जया बच्चन को लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देना पड़ा था। कहने का मतलब है कि लॉन्चिंग की पहली तिमाही के भीतर ही चैनल को एक नई पहचान मिल गई थी। उसके बाद से चैनल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार आगे बढ़ता जा रहा है। 26 नवंबर 2008 की कवरेज भी हमारे लिए एक टर्निंग पॉइंट थी। हमने हमेशा से काफी एक्सक्लूसिव और इंवेस्टिगेटिव स्टोरी की हैं।

सच बताऊं तो मैंने कभी प्रोफाइल पर ध्यान नहीं दिया है। मेरी कुछ स्टोरीज ने टाइम्स नाउ की ब्रैंड वैल्यू तैयार करने में मदद की है। हां, अरनब गोस्वामी जब यहां थे तो उन्होंने वाकई में अपने काम को भरपूर एंज्वॉय किया, लेकिन पत्रकारिता में चेहरे बदलते रहते हैं। मैं कंटेंट पर फोकस करती हूं।

मुझे आज भी खबरों की एक तरह से भूख रहती है। इसलिए रात को नौ बजे अपने प्राइम टाइम शो में मैं पॉलिटिकल ‘ज्ञान’ इसलिए दे पाती हूं, क्योंकि मैं फील्ड रिपोर्टिंग करती हूं और मैंने जो अनुभव हासिल किया है, वह एयरकंडीशंड स्टूडियो में बैठकर नहीं आया है।

इस तरह की सोच उन लोगों ने बना रखी है जो न्यूज नहीं देखते हैं। इसलिए वे न्यूज चैनल्स के बारे में इस तरह की खबरें बना रहे हैं। हम सिर्फ वही दिखाते हैं जो धरातल पर हो रहा है। देश में मोदी को लेकर एक अलग तरह का माहौल है। विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर उन्हें लेकर तमाम चर्चाएं होती हैं और यही चर्चाएं हमारे चैनल पर भी दिखाई देती हैं। ऐसे में कैसे हम चीयर लीडर हुए। हम तो सिर्फ जनता का मूड दिखाते हैं। जब जनता का मूड बदलता है तो हम उसे दिखाते हैं, क्योंकि हमारा चैनल रिपोर्टर केंद्रित है।

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