# मुख्यमंत्री सीएम शिवराज सिंह का हुआ आगमन ##

Post 5

अनोखी है फादर्स डे मनाने की शुरुआत

Post 1

खिलौना भी पापा, बिछौना भी पापा, जब सीने से लगता है प्रतिबिंब अपना सा तो पापा के दिल को लगता है कोई सपना सा। बच्चों को खुश करने के लिए वे बन जाते हैं खुद खिलौना। अगर नींद आ जाए उनको तो बन जाते हैं बिछौना। कभी कंधों पर बिठाकर दिखाते हैं सारा जहां तो कभी अंगुली पकड़कर सहारा बन जाते हैं। यहां मिलता है उसे सुकून भी और सुरक्षा का अनकहा विश्वास भी। अलग-अलग देशों में अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है फादर्स डे। ज्यादातर जगहों पर जून के तीसरे संडे को इसे मनाया जाता है।
फादर्स डे पूरी दुनिया में सेलिब्रेट किया जाता है जिसका मकसद बच्चों की लाइफ में पिता का क्या महत्व ये बताना और जताना है। सबसे पहले 19 जून 1910 को वाशिंगटन में इसे मनाया गया था। लेकिन 1972 में इसे आधिकारिक मान्यता मिली। साथ ही साथ इस दिन छुट्टी की भी घोषणा की गई।

आज है फादर्स डे

16 जून 2019

Post 2

क्यों मनाते हैं फादर्स डे

ज्यादातर जगहों पर इसे जून के तीसरे संडे को सेलिब्रेट किया जाता है। सबसे पहले 5 जुलाई 1908 को वेस्ट वर्जीनिया के फेयरमोंट में फादर्स डे मनाया गया था। Grace Golden Clayton अनाथ थी और उन्होंने इस दिन को खास महत्व दिलाने के लिए बहुत समय तक प्रयास किया। महीनों पहले 6 दिसंबर 1907 को हुए एक खान(माइंस) हादसे में तकरीबन 210 लोगों की जान चली गई थी। Clayton ने उन्हीं 210 लोगों की याद में इस दिन को सेलिब्रेट करने की सोची। लेकिन अफसोस तब इसके लिए छुट्टी नहीं होती थी।

फादर्स डे मनाने के पीछे एक दूसरी कहानी भी सुनने को मिलती है। साल 1910 में 19 जून को वाशिंगटन के सोनोरा स्मार्ट डोड के प्रयासों के बाद मनाया गया। 1909 में स्पोकाने के चर्च में मदर्स डे पर उपदेश दिया जा रहा था जिसके बाद डोड को लगा कि मदर की ही तरह फादर्स डे भी मनाया जाना चाहिए। ओल्ड सेन्टेनरी प्रेस्बिटेरियन चर्च के पादरी डॉक्टर कोनराड ब्लुह्म की मदद से इस विचार को स्पोकाने YMCA से ले गई। जहां स्पोकाने YMCA और अलायन्स मिनिस्ट्री ने इस विचार पर अपनी सहमति जताई और 1910 में पहली बार फादर्स डे मनाया गया।

कैसे मनाते हैं फादर्स डे

बच्चों की लाइफ में जितनी अहम भूमिका मां की होती है उतनी ही पिता की भी। लेकिन मदर्स डे सेलिब्रेशन की धूम ज्यादा देखने को मिलती है। ये अच्छा मौका होता है जब आप अपने पिता को हर उस चीज़ के लिए धन्यवाद कह सकते हैं जो उनकी वजह से हासिल हुई हैं। इसे सेलिब्रेट करने का कोई प्रचलित तरीका नहीं है। जहां कोई गले मिलकर, गिफ्ट देकर इसे मनाता है वहीं कुछ लोग फादर्स के साथ ट्रिप प्लान कर, उन्हें लंच या डिनर पर ले जाकर इसे स्पेशल बनाते हैं।

 

 

Post 4
Post 2
Post 3

Leave A Reply

Your email address will not be published.

पत्रकार बंधु भारत के किसी भी क्षेत्र से जुड़ने के लिए इस नम्बर पर सम्पर्क करें- +919424776498

फर्जी बिल लगाने के बादशाह निकले…….गुप्ता     |     सी.एम. हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों का निराकरण ना करने वाले अफसरों का वेतन आहरण नहीं होगा@अनिल दुबे9424776498     |     प्रक्रिया का पालन करें पंचायतें, टेंडर से हो खरीदी फर्जी बिल पर लगेगा अंकुश…….यदुवंश दुबे ने व्यक्त किये अपने विचार@आसुतोष सिंह     |     बस वाहन चालक यात्रियों के जेब मे डाल रहे डाका ( वरिष्ठ पत्रकार यदुवंश दुबे की कलम से )     |     पशु चिकित्सालय के अस्तित्व पर खतरा ( वरिष्ठ पत्रकार यदुवंश दुबे की कलम से )     |     बिना कनेक्शन पहुंचा बिजली बिल, आश्रम को लगा करेंट का झटका (वरिस्ट पत्रकार यदुवंश दुबे की कलम से)     |     पुष्पराजगढ़ विधायक फुंदेलाल मार्को द्वारा दसवें उप स्वास्थ्य केंद्र भवन का किया भूमि पूजन ( अनिल दुबे की रिपोर्ट )     |     जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ मे समीक्षा बैठक का हुआ आयोजन ( अनिल दुबे की रिपोर्ट )     |     पटना लांघाटोला से करपा जाने वाली रोड का कब होगा कायाकल्प ( अनिल दुबे की रिपोर्ट )     |     शिशु मृत्यु दर मे कमी लाने समीक्षा बैठक हुई संपन्न ( अनिल दुबे की रिपोर्ट )     |