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मध्‍यप्रदेश में चार माह में 24 तेंदुओं की मौत

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भोपाल।

बाघ के प्रति जनता के आकर्षण को देखते हुए राज्य सरकार का वन्यप्राणी प्रबंधन भी बाघों तक सिमट कर रह गया है। इस कारण शेड्यूल-वन के प्राणियों में दूसरे नंबर पर गिने जाने वाले तेंदुओं पर ध्यान ही नहीं दिया जा रहा है। यही कारण है कि प्रदेश में हर साल अलग-अलग कारणों से 40 से ज्यादा तेंदुओं की मौत हो रही है। वर्ष 2019 के शुरुआती चार महीनों में 24 तेंदुओं की मौत हो चुकी है, लेकिन तेंदुओं की सुरक्षा के लिए किसी स्तर पर कोई उपाय देखने को नहीं मिले हैं।

तेंदुए जंगल और जंगल से बाहर, कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। इन चार माह में जंगल के अंदर बाघों ने चार तेंदुओं को मारा है तो गांवों के नजदीक पहुंचे तीन तेंदुओं की कुओं में डूबने से मौत हो गई। दो तेंदुए ट्रेन दुर्घटना में भी मारे गए हैं और पांच तेंदुओं की मौत का कारण ही पता नहीं चल पाया है। तेंदुओं की मौत के आंकड़े साल दर साल बढ़ रहे हैं, लेकिन वन विभाग और सरकार के तेंदुआ संरक्षण को लेकर प्रयास नहीं दिखाई दे रहे हैं।

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खाने की तलाश में गांवों के आसपास

तेंदुओं का जंगल में बाघों से टकराव बढ़ रहा है। असुरक्षा और खाना नहीं मिलने की स्थिति में वे रहवासी क्षेत्रों की ओर जाते हैं, क्योंकि वहां उन्हें पेट भरने के लिए कुत्ते मिल जाते हैं और वह उनका प्रिय खाना भी हैं, लेकिन रहवासी क्षेत्रों में तेंदुआ-मानव संघर्ष की स्थिति बनती है। कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें लोगों ने पीट-पीटकर तेंदुओं को मारा है। वन विभाग ऐसी घटनाओं को रोकने में भी नाकाम साबित हुआ है।

रातापानी में सबसे ज्यादा मौत

राजधानी के नजदीक स्थित रातापानी अभयारण्य में तेंदुओं की संख्या सौ से ज्यादा है और यहां तेंदुओं की मौत का ग्राफ भी ज्यादा है। पिछले तीन साल में यहां आधा दर्जन से ज्यादा तेंदुओं की मौत हुई है। इनमें से करीब चार तेंदुए ट्रेन की चपेट में आकर मरे हैं।

मानव संग्रहालय तक टेरेटरी

राजधानी में ही तेंदुओं ने मानव संग्रहालय तक टेरेटरी बना ली है। पिछले आठ साल में करीब तीन बार तेंदुए संग्रहालय तक पहुंच चुके हैं। इनमें से दो बार तेंदुओं को रेस्क्यू करना पड़ा है।

निगरानी करने को कहा

तेंदुआ जंगल और आबादी के बीच रहता है। उसकी इसी आदत की वजह से मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है। हमने मैदानी अफसरों को तेंदुओं की विशेष निगरानी करने को कहा है। 

– यू. प्रकाशम्, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन, मप्र

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