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सिकल सेल बीमारी पर शोध के लिए आईजीएनटीयू को आईसीएमआर का महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट मिला ( अनिल दुबे की रिपोर्ट )

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देशभर के चुनिंदा छह सेंटर्स में एक होगा आईजीएनटीयू, अनूपपुर के लिए बनेगा पायलट प्रोजेक्ट

बीमारी की सही समय पर पहचान और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव पर सुझाव देंगे

स्वास्थ्य सेवाओं पर शोध के लिए सर्वोच्च भारतीय संस्था इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के बायोटेक विभाग का एक महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट मंजूर किया है जिसमें सिकल सेल बीमारी पर शोध संभव हो सकेगा। आईसीएमआर ने देशभर में छह स्थानों पर एक साथ शोध के लिए यह प्रोजेक्ट मंजूर किया है। अनूपपुर जिले में शोध के लिए आईजीएनटीयू को पायलट प्रोजेक्ट के तहत चुना गया है जिसमें जिले की सिकल सेल रोग से लड़ने की क्षमता और रोगियों की समस्याओं को चिन्हित कर इसमें मूलभूत बदलाव की अनुशंसा की जाएगी जिसे बाद में राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जा सकेगा। बायोटेक विभाग की अस्सिटेंट प्रोफेसर डॉ.पी. श्रीदेवी के इंप्रूविंग द कैपेसिटी ऑफ हैल्थ सिस्टम एंड कम्युनिटी फॉर सिकल सेल डिजिज स्क्रिनिंग एंड मैनेजमेंट-एन इंटरवेंशन स्टडी इन अनूपपुर डिस्ट्रिक्ट शीर्षक के इस प्रोजेक्ट में अनूपपुर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं और यहां के सिकल सेल बीमारी से पीड़ित रोगियों पर शोध होगा। मध्यप्रदेश में सिकल रोग बीमारी की स्थिति काफी भयावह है। प्रदेश के 27 जिले सिकल सेल रोग की पट्टी में सम्मिलित किए गए हैं जिसमें अनूपपुर भी शामिल है। सिकल सेल रोग के होने के बाद इसका स्वास्थ्य और समाज दोनों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। कई परिवार इस रोग के अभिशाप से ग्रस्त हैं। इस बीमारी के फैलने का मुख्य कारण स्वास्थ्य सेवाओं में सिकल सेल रोग से लड़ने की पर्याप्त क्षमता न होने, सामाजिक भ्रांतियां और बीमारी से ग्रस्त गांवों का दूर-दराज के क्षेत्र में होना है। शोध के अंतर्गत स्वास्थ्य अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्रामीणों के मध्य शोध किया जाएगा जिससे इस बीमारी के प्रभावी इलाज के बारे में कार्ययोजना तैयार की जा सके। तीन वर्ष के इस शोध से प्राप्त नतीजों को रिपोर्ट के रूप में आईसीएमआर को सौंपा जाएगा जहां छह सेंटर्स की रिपोर्ट के आधार पर सिकल सेल डिजिज से लड़ने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कार्य योजना तैयार की जा सकेगी। कुलपति प्रो. टी.वी. कटटीमी ने प्रोजेक्ट के लिए डॉ. श्रीदेवी को बधाई देते हुए शिक्षकों का आह्वान किया है कि वे जनजातीय समस्याओं को दूर करने के लिए इस प्रकार की शोध परियोजनाओं को कार्यान्वित करें जिससे स्वास्थ्य और सामाजिक समस्याओं के प्रभावी हल खोजे जा सके।

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