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निजी स्कूलों की मनमानी पर लगााम, अब 5 साल से पहले नही बदल सकेंगें यूनिफार्म

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भोपाल।

लंबे समय के बाद राज्य सरकार ने स्कूली बच्चों और अभिभावकों को बड़ी राहत दी है।शिक्षा विभाग द्वारा मध्यप्रदेश निजी विद्यालय नियम 2018 में बड़ा बदलाव किया गया है। उन्होंने निजी स्कूलों की बढ़ती मनमानी पर लगाम लगाने के लिए बड़ा फैसला  लिया है। जिसके बाद अब फीस-स्कूल ड्रेस व कॉपी-किताब के मामले में प्राइवेट स्कूल  मनमानी नहीं कर सकेंगे। वे पांच साल तक न तो ड्रेस बदल सकेंगे न फीस के रूप में वसूल की जाने वाली राशि नकद ले सकेंगे।

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इसके साथ ही फीस जमा करने के लिए उन्हें पालकों को बैंक एकाउंट बताना होगा। नया शिक्षण सत्र प्रारंभ होने के 150 दिन पहले नए सत्र की फीस पोर्टल पर डालनी होगी। पिछले तीन साल के लाभ हानि की डिटेल भी शिक्षा अधिकारी को बतानी होगी। नियमो को अंतिम रूप देने से पहले एक महीने अर्थात 25 जुलाई तक दावे-आपत्ति भी मांगे गए हैं। इसके बाद नियमों को अंतिम कर दिया जाएगा। इसकेअलावा आपत्तियां उप सचिव स्कूल शिक्षा केके द्विवेदी को वल्लभ भवन या फिर ईमेल ds.school@mp.gov.in पर भेजी जाएंगी।ऐसे में किसी भी स्कूल की शिकायत जिला समिति तक पहुंचती है और यदि वह सही पाई जाती है तो उसके खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी।

मप्र निजी विद्यालय नियम 2018 –

– पोर्टल पर फीस की संरचना प्रस्तुत नहीं करने पर लेट फीस के साथ 135 दिन में जानकारी देनी होगी।

– जो स्कूल लाभ 10 फीसदी से कम बताकर फीस बढ़ाएंगे, जांच के लिए उनके दस्तावेज जब्त हो सकेंगे।

– 10 फीसदी की वृद्धि तभी मंजूर होगी जब कोई शिकायत नहीं होगी, अंतिम निर्णय डीईओ लेंगे।

– 10 से 15 फीसदी वृद्धि प्रस्तावित होने पर फीस वृद्धि पर निर्णय 45 दिन मे जिलास्तरीय समिति लेगी।

– प्राइवेट स्कूल फीस की डिटेल वेबसाइट पर नहीं डालते पर उन्हें हिंदी-अंग्रेजी में यह बताना होगा।

– कोई भी स्कूल छूट के नाम पर एक तिमाही से ज्यादा फीस एक साथ नहीं ले सकेगा।

-इस नियम के तहत यूनिफॉर्म को छोड़कर किसी भी कापी-किताब, बैग जैसे सामान पर स्कूल का नाम नहीं होगा

– किताबों की बिक्री के लिए स्कूल परिसर में सरकारी प्रकाशकों की छोटी दुकानें खुल सकेंगी।

– जिला स्तर की समिति किसी भी स्कूल में जांच के लिए प्रवेश कर सकेगी।

– मनमानी करने पर पहली बार दो लाख, दूसरी बार चार लाख तथा तीसरी बार छह लाख जुर्माना लगाया जाएगा।

– जुर्माना न देने पर इसकी वसूली राजस्व अधिकारियों की मदद से कुर्की और नीलामी के माध्यम से की जाएगी।

– ऑडिट होने या फिर शिकायत की जांच पूरी होने (अधिकतम 7 साल) तक रिकॉर्ड रखना होगा।

– स्कूल की शिकायत पालक-छात्र ही कर सकेंगे, अखबार में छपी खबर भी अफसर संज्ञान में लेंगे।

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