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कोरोना वायरस संक्रमित से संपर्क के 10 दिन बाद वायरस दिखाता है असर Coronavirus News update Indore

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अब तक इंदौर में 25240 संदिग्ध की सैंपलिंग की जा चुकी है। इनमें से करीब 22500 की रिपोर्ट निगेटिव आई है…

Coronavirus in Indore : इंदौर। कोरोना संक्रमण की टेढ़ी चाल के बीच आइसीएमआर के नए दिशानिर्देश ने अब तक की गई जांच और उनकी रिपोर्ट को ही सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया। निर्देश में कहा गया है कि मरीज के संपर्क में आए लोगों की सैंपलिंग संपर्क में आने के पांच से 10 दिन बाद ही की जानी चाहिए, क्योंकि शरीर में कोरोना वायरस को विकसित होने में इतना समय लगता ही है। इंदौर में शुरुआती एक महीने को छोड़ दें तो ज्यादातर जगह कोरोना पॉजिटिव मरीज मिलते ही तुरंत सैंपलिंग की गई है। ऐसे में इन सैंपलों की जांच रिपोर्ट पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि वायरस को शरीर में विकसित होने का समय दिए बगैर सैंपलिंग की गई। अब तक इंदौर में 25240 संदिग्ध की सैंपलिंग की जा चुकी है। इनमें से करीब 22500 की रिपोर्ट निगेटिव आई है। कोरोना प्रकोप की शुरुआत में सैंपल जांचने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से सैंपलिंग करने और रिपोर्ट आने में आठ से 10 दिन लग रहे थे। किसी व्यक्ति के पॉजिटिव पाए जाने पर उसके संपर्क में आए जिन लोगों की सैंपलिंग हो रही थी, उन्हें संपर्क में आए 10 दिन से ज्यादा वक्त बीत चुका होता था। जांच क्षमता बढ़ने के बाद करीब एक महीने से सैंपलिंग बढ़ गई। सैंपल लेने के अगले ही दिन रिपोर्ट भी मिल रही है। रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही मेडिकल टीम संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों की सैंपलिंग कर रही है। एक तरह से यह अच्छा है कि पॉजिटिव मरीज तेजी से सामने आ रहे हैं। वहीं आशंका यह है कि बड़ी संख्या निगेटिव रिपोर्ट लेकर जो निश्चित होकर समाज में घूम रहे हैं, हो सकता है कि पांच-10 दिन बाद उनमें से कुछ पॉजिटिव हो रहे होंगे। इंदौर में पिछले एक महीने में करीब 15 हजार सैंपल जांचे गए हैं। इनमें से 90 प्रतिशत की रिपोर्ट निगेटिव आई है। इस घटनाक्रम ने कोरोना संक्रमण की जांच से जुड़े चिकित्सा अधिकारियों को चिंता में डाल दिया है।

केस एक : जांच रिपोर्ट निगेटिव, बाद में आधा दर्जन संक्रमित

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महेश नगर स्थित सुदर्शन अपार्टमेंट में कोरोना का एक मरीज मिलने के बाद अगले ही दिन अपार्टमेंट के लोगों की जांच कर सैंपलिंग की गई, लेकिन किसी में कोरोना की पुष्टि नहीं हुई। कुछ दिन बाद कुछ लोगों की तबीयत बिगड़ी। जांच हुई तो पता चला कि आधा दर्जन से ज्यादा लोग कोरोना संक्रमित हैं। फिर इन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

सीएमएचओ डॉ. प्रवीण जड़िया से सीधी बात

आइसीएमआर की नई गाइडलाइन के मुताबिक संपर्क में आने के कम से कम पांच दिन बाद ही सैंपलिंग होना है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा?…शुरुआत में हमारी जांच क्षमता कम होने से जांच रिपोर्ट आने में समय लग रहा था, इसलिए स्वतः ही गाइडलाइन का पालन हो रहा था। पॉजिटिव के संपर्क में आने के 10-15 दिन बाद ही जांच हो रही थी, फिलहाल सैंपलिंग जरूर बढ़ा दी है।

क्या सैंपलिंग को लेकर कोई नई नीति बनाएंगे?

सैंपलिंग बढ़ी है तो जांच क्षमता भी बढ़ी है। यह जरूर है कि कुछ जगह सैंपलिंग जल्दी हो रही थी। इसे नियंत्रित किया जाएगा। आइसीएमआर की गाइडलाइन के मुताबिक ही सैंपलिंग की जाएगी।

कोई बदलाव करेंगे?

हम पूरी क्षमता से सैंपलिंग और जांच कर रहे हैं। हमें सिर्फ इतना ध्यान रखना है कि पॉजिटिव मरीज के संपर्क में आने के पांच दिन बाद ही किसी का सैंपल लेना है। इसका ध्यान रखेंगे।

कोविड-19 वायरस को शरीर में विकसित होने में 5 से 14 दिन का समय लगता है। पॉजिटिव व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद कम से कम पांच दिन बाद ही सैंपलिंग की जानी चाहिए। इसके पहले सैंपलिंग हुई है तो उसकी रिपोर्ट निगेटिव ही आएगी, भले ही शरीर में वायरस मौजूद हो। डॉ. अनिता मूथा, माइक्रोबायलॉजी विभागाध्यक्ष, एमजीएम मेडिकल कॉलेज

संक्रमित मरीज के संपर्क में आए लोगों को संभालना होगा कठिन

संक्रमित मरीज के संपर्क में आए लोगों की सैंपलिंग भले ही पांच या दस दिन बाद की जाए लेकिन एहतियात बतौर उनका आइसोलेशन जरूरी है। ऐसे में या तो उन्हें क्वारंटाइन सेंटर भेजा जाए या होम आइसोलेट किया जाए। उनकी सतत निगरानी भी जरूरी है, ताकि उनमें से कोई पॉजिटिव हो तो दूसरों को संक्रमित न करें।

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